नासिक : मानसून की शुरुआत के साथ ही नासिक शहर में डेंगू का खतरा एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। जुलाई के पहले तीन हफ्तों में डेंगू के 22 नए मामले सामने आने के बाद शहर में कुल संक्रमित मरीजों की संख्या 45 तक पहुंच गई है। इसके अलावा डेंगू के संदिग्ध मरीजों का आंकड़ा बढ़कर 260 हो गया है, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है।
बारिश के मौसम में जलभराव और मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनने के कारण वेक्टर जनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर साफ पानी में पनपता है और मानसून के दौरान घरों, गलियों और खाली स्थानों में जमा पानी इसके लिए अनुकूल माहौल तैयार करता है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, शहर में डेंगू के मामलों में वृद्धि को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी गई है। संदिग्ध मरीजों की जांच, प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे और मच्छरों के नियंत्रण के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि लोगों को भी अपने आसपास पानी जमा नहीं होने देने और साफ-सफाई बनाए रखने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
नासिक नगर निगम की ओर से दावा किया गया है कि डेंगू की रोकथाम के लिए फॉगिंग, कीटनाशक छिड़काव और अन्य एहतियाती उपाय लगातार किए जा रहे हैं। निगम अधिकारियों का कहना है कि मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान कर उन्हें नष्ट करने का काम भी किया जा रहा है।
हालांकि, शहर के कई इलाकों के निवासियों ने नगर निगम की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि फॉगिंग अभियान केवल कागजों तक सीमित रह गया है और जमीनी स्तर पर इसका असर बहुत कम दिखाई दे रहा है। लोगों का कहना है कि कई क्षेत्रों में नियमित रूप से फॉगिंग नहीं की जा रही है, जिसके कारण मच्छरों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
नागरिकों के अनुसार, बारिश के बाद कई जगहों पर पानी जमा हो जाता है, लेकिन समय पर सफाई और मच्छर नियंत्रण की कार्रवाई नहीं होने से समस्या बढ़ रही है। लोगों ने मांग की है कि नगर निगम को केवल औपचारिक कार्रवाई के बजाय प्रभावित क्षेत्रों में नियमित निगरानी और प्रभावी उपाय करने चाहिए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू जैसी बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए केवल फॉगिंग पर्याप्त नहीं है। इसके लिए लोगों की भागीदारी, साफ-सफाई, जलभराव रोकने और मच्छरों के लार्वा को खत्म करने जैसे उपाय जरूरी हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, घरों और आसपास के क्षेत्रों में छोटी-छोटी जगहों पर जमा पानी भी मच्छरों के प्रजनन का कारण बन सकता है।
डेंगू के सामान्य लक्षणों में तेज बुखार, सिर दर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द, कमजोरी और त्वचा पर लाल चकत्ते शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें और बिना जांच के दवाइयों का सेवन न करें।
नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती बढ़ते मामलों को नियंत्रित करना है। मानसून के आगे बढ़ने के साथ यदि मच्छरों की संख्या पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो डेंगू के मामलों में और वृद्धि होने की आशंका जताई जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि शहर में विशेष अभियान चलाकर संवेदनशील क्षेत्रों पर ध्यान दिया जा रहा है। इसके तहत मच्छरों के लार्वा की जांच, दवा छिड़काव और लोगों को जागरूक करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
वहीं, स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बीमारी फैलने के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से ही प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए। उनका मानना है कि नियमित सफाई, समय पर फॉगिंग और जलभराव की समस्या का समाधान कर डेंगू के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
फिलहाल नासिक में डेंगू के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। आने वाले दिनों में नगर निगम की कार्रवाई और नागरिकों की सतर्कता यह तय करेगी कि शहर में डेंगू के प्रसार को कितना नियंत्रित किया जा सकता है।