हिंगोली। महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के लिंबाला गांव में एक सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल पर शराब पीने की आदत के आरोपों को लेकर विवाद बढ़ गया है। ग्रामीणों ने प्रिंसिपल के खिलाफ कई बार शिकायतें करने का दावा करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रिंसिपल की कथित शराब पीने की आदत का असर स्कूल के माहौल और विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। अब इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत दिपके भी ग्रामीणों के समर्थन में सामने आए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मंगलवार तक प्रिंसिपल को पद से नहीं हटाया गया तो वह ग्रामीणों के साथ विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे।

ग्रामीणों ने अधिकारियों से की कई बार शिकायत



जानकारी के अनुसार, लिंबाला गांव के लोगों का कहना है कि उन्होंने स्कूल प्रिंसिपल के व्यवहार और शराब सेवन को लेकर पहले भी कई बार संबंधित अधिकारियों को शिकायत दी है।

ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल बच्चों के भविष्य से जुड़ा स्थान है, इसलिए वहां कार्यरत शिक्षकों और अधिकारियों का व्यवहार जिम्मेदार और अनुशासित होना चाहिए।

प्रिंसिपल पर लगाए गंभीर आरोप

अभिजीत दिपके के अनुसार, ग्रामीणों ने प्रिंसिपल के शराब पीने के आरोपों को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों का कई बार ध्यान आकर्षित कराया है।

उनका कहना है कि ग्रामीण लंबे समय से इस मुद्दे को उठा रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अभी तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।

दिपके ने कहा कि यदि मंगलवार तक प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो ग्रामीणों के साथ मिलकर आंदोलन किया जाएगा।

स्कूल के माहौल को लेकर चिंता

ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए। उनका आरोप है कि प्रिंसिपल की कथित आदतों के कारण स्कूल की व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

लोगों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और आरोप सही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

मंगलवार तक कार्रवाई की मांग

अभिजीत दिपके ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि तय समय सीमा के भीतर प्रिंसिपल को नहीं हटाया गया तो वह विरोध प्रदर्शन करेंगे।

उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और बच्चों के हितों को ध्यान में रखते हुए जल्द फैसला किया जाना चाहिए।

ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति को परेशान करना नहीं, बल्कि स्कूल व्यवस्था को बेहतर बनाना है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल इस मामले में शिक्षा विभाग या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

अब नजर इस बात पर है कि ग्रामीणों की शिकायतों पर विभाग क्या कदम उठाता है और क्या जांच के आदेश दिए जाते हैं।

यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित प्रिंसिपल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।

शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल

इस मामले ने एक बार फिर स्कूलों में कार्यरत कर्मचारियों और अधिकारियों की जिम्मेदारियों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शिक्षा संस्थानों में अनुशासन और अच्छा वातावरण बनाए रखना बेहद जरूरी माना जाता है। ऐसे मामलों में प्रशासन की जिम्मेदारी होती है कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई करे।

ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश

लिंबाला गांव के ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से समस्या का समाधान चाहते हैं। उनका आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होने से उनका भरोसा कमजोर हो रहा है।

ग्रामीणों ने कहा कि यदि जल्द कदम नहीं उठाया गया तो वे लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराएंगे।

आगे की कार्रवाई पर नजर

फिलहाल पूरा मामला प्रशासनिक जांच और कार्रवाई पर टिका हुआ है। ग्रामीण मंगलवार तक प्रशासन के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

वहीं, शिक्षा विभाग की ओर से मामले की जांच किए जाने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

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