मुंबई: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन की मांग का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने शनिवार को कहा कि यदि सरकार लोगों से मतदान और विरोध प्रदर्शन के माध्यम से अपनी बात रखने का अधिकार छीन रही है, तो ऐसी सरकार को बदलने की जरूरत है। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के सत्ता परिवर्तन संबंधी बयान का समर्थन किया। उनका यह बयान दिल्ली में जारी प्रदर्शनों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच आया है। 
अखिल भारतीय मराठी पत्रकार परिषद के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ठाकरे ने सरकार और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों के सामने अपनी बात रखने के लोकतांत्रिक रास्ते सीमित किए जा रहे हैं। उनके मुताबिक, मतदान के जरिए राय व्यक्त करने और सड़कों पर विरोध दर्ज कराने, दोनों अधिकारों की रक्षा जरूरी है। ठाकरे ने सत्ता परिवर्तन की अपनी मांग को इन्हीं अधिकारों से जोड़ते हुए कहा कि विपक्ष सरकार के ऐसे रवैये के खिलाफ आवाज उठा रहा है। 
ठाकरे ने राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित बल प्रयोग का जिक्र भी किया। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं और महिलाओं के साथ मारपीट की जा रही है और उनके कपड़े तक फाड़े जा रहे हैं। ये आरोप ठाकरे ने अपने संबोधन में लगाए। उन्होंने सवाल किया कि सरकार लोगों की शिकायतें सुनने के बजाय उनके विरोध को रोकने के लिए इतनी बड़ी पुलिस व्यवस्था क्यों कर रही है। उनके बयान का प्रमुख निशाना प्रदर्शन स्थलों पर तैनाती और प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार रहा। 
नवरात्रि के संदर्भ में कटाक्ष करते हुए उद्धव ठाकरे ने पूछा कि दिल्ली में हजारों पुलिसकर्मियों को क्या डांडिया खेलने के लिए लाया गया है। इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर डंडों और लाठियों के इस्तेमाल को लेकर सरकार को घेरा। ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का उल्लेख करते हुए सत्ता परिवर्तन की मांग पर उठाए जा रहे सवालों का जवाब दिया। उनका कहना था कि नागरिकों के अपनी राय व्यक्त करने के रास्ते बंद किए जाएंगे तो सरकार बदलने की मांग उठेगी। 
‘रिजीम चेंज’ शब्द को लेकर विवाद वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के बयान के बाद तेज हुआ है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में भूषण ने सत्ता परिवर्तन की बात कही थी। इसके बाद भाजपा नेताओं ने विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाए। उद्धव ठाकरे ने अब इस मांग का समर्थन करते हुए बहस में अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने इसे लोगों के मतदान और विरोध के माध्यम से अभिव्यक्ति के अधिकार से जुड़ा विषय बताया।
भाजपा की ओर से इन प्रदर्शनों और सत्ता परिवर्तन संबंधी बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर बांग्लादेश जैसे घटनाक्रम से प्रेरित होकर देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश का आरोप लगाया था। उन्होंने विपक्ष पर युवाओं को अराजक राजनीति की ओर ले जाने का भी आरोप लगाया। दूसरी ओर विपक्ष के नेताओं का कहना है कि सरकार की आलोचना करना और लोकतांत्रिक तरीके से उसे बदलने की मांग उठाना राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है। 
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी प्रशांत भूषण के बयान को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध के पीछे अराजकता के जरिए सत्ता हासिल करने की मंशा है। कांग्रेस ने इस तरह के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि लोकतांत्रिक माध्यमों से सरकार बदलने का लक्ष्य छिपाया नहीं गया है। इस तरह एक ही शब्द को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष अलग-अलग राजनीतिक अर्थ प्रस्तुत कर रहे हैं। 
उद्धव ठाकरे के ताजा बयान से यह बहस और तेज हुई है। उनके संबोधन में विरोध प्रदर्शन का अधिकार, मतदान के जरिए अभिव्यक्ति और पुलिस कार्रवाई प्रमुख विषय रहे। भाजपा जहां सत्ता परिवर्तन की मांग को अस्थिरता फैलाने की कोशिश बता रही है, वहीं ठाकरे ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा से जोड़ा है। फिलहाल उनके बयान ने दिल्ली के प्रदर्शनों पर चल रहे टकराव को महाराष्ट्र की राजनीतिक बहस में भी और प्रमुख बना दिया है।
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