मणिपुर: मणिपुर वन विभाग के सेंट्रल फॉरेस्ट डिवीजन और मणिपुर स्थित गैर-लाभकारी संगठन 'द इंडियन ओरिएंट 2025' ने 30 अक्टूबर को 'रीट्रीफाई प्रोजेक्ट मणिपुर' (ReTreeFy Project Manipur) के पांच साल के पायलट चरण को लागू करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।
इस पहल का उद्देश्य इम्फाल घाटी में खत्म हो रहे मीठे पानी के स्रोतों को पुनर्जीवित करना, खराब हो चुके वन क्षेत्रों (कैचमेंट) को बहाल करना और दीर्घकालिक पारिस्थितिक (ecological) तथा जल सुरक्षा को मजबूत करना है। इस समझौता ज्ञापन पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) और वन बल प्रमुख (HoFF) तथा अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग बाजपेयी की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए।
इस साझेदारी के तहत, वन विभाग तकनीकी और संस्थागत मार्गदर्शन प्रदान करेगा, जबकि 'द इंडियन ओरिएंट 2025' परियोजना को लागू करने, वैज्ञानिक जांच और जरूरी कदम उठाने के साथ-साथ समुदाय और संसाधनों को जुटाने का काम करेगा।
अनुराग बाजपेयी ने जोर दिया कि यह पहल समुदाय के नेतृत्व में होनी चाहिए, जिसमें स्थानीय निवासी योजना बनाने के चरण से ही शामिल हों। 'द इंडियन ओरिएंट 2025' के अजय चनम ने बताया कि वनों और कैचमेंट क्षेत्रों के खराब होने, भूजल पुनर्भरण (groundwater recharge) में बदलाव, पानी के बहाव में वृद्धि, बाढ़ और मौसमी जल संकट के कारण प्राकृतिक झरनों और मीठे पानी के तंत्र को काफी नुकसान पहुंचा है।
यह पांच साल का पायलट प्रोजेक्ट उन महत्वपूर्ण 'स्प्रिंगशेड' (झरनों वाले क्षेत्रों) की पहचान करने, उनकी सुरक्षा करने और उन्हें बहाल करने पर केंद्रित होगा, जो इम्फाल घाटी को पानी उपलब्ध कराते हैं। इसमें झरनों और कैचमेंट क्षेत्रों की सूची बनाना और उनकी GIS मैपिंग करना, रिचार्ज जोन और झरनों से पानी के बहाव का हाइड्रोजियोलॉजिकल आकलन करना, मिट्टी और जल संरक्षण के उपाय करना, नदियों के किनारे वनीकरण करना और स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाना शामिल होगा।
यह परियोजना पानी और पारिस्थितिक परिणामों की समय-समय पर वैज्ञानिक निगरानी भी करेगी और स्थानीय 'जल संसाधन और संरक्षण समितियों' के माध्यम से समुदाय-आधारित जल प्रबंधन को मजबूत करेगी। पौधों को तैयार करने, उन्हें लगाने, उनकी सुरक्षा और देखभाल करने के काम में गांव की नर्सरियों और स्थानीय निवासियों को शामिल किया जाएगा, ताकि हरित आजीविका (green livelihoods) को बढ़ावा मिल सके।
इस पहल का लक्ष्य एक ऐसा वैज्ञानिक और समुदाय के स्वामित्व वाला मॉडल विकसित करना है जिसे अन्य जगहों पर भी लागू किया जा सके। इसमें वन संरक्षण, मीठे पानी की सुरक्षा, सामुदायिक भागीदारी और आजीविका सृजन को एक साथ जोड़ा जाएगा। यह परियोजना 'रीट्रीफाई मणिपुर' (ReTreeFy Manipur) के 70 साल के व्यापक विजन (2025–2095) का हिस्सा है। इसे 'द इंडियन ओरिएंट 2025' (The Indian Orient 2025) द्वारा तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य स्थानीय, फल देने वाले और फूल वाले पेड़ों के माध्यम से पारिस्थितिक तंत्र को पुनर्जीवित करना, नदियों का संरक्षण करना, समुदाय के लिए टिकाऊ आय पैदा करना और प्रकृति-आधारित पर्यटन को बढ़ावा देना है।
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