भुवनेश्वर: ओडिशा में आठ साल के लंबे अंतराल के बाद हुए छात्र संघ चुनावों के नतीजों को लेकर राजनीतिक और छात्र संगठनों में हलचल तेज हो गई है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने राज्य के 13 विश्वविद्यालयों में से आठ में जीत हासिल करने का दावा किया है। संगठन के मुताबिक, अब तक उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर 200 से अधिक कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों में भी उसके समर्थित उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चुनाव परिणाम सामने आने के बाद ABVP कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने मिठाइयां बांटकर जश्न मनाया।ABVP की प्रदेश सचिव दीप्तिमायी प्रतिहारी ने चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए संगठन के प्रदर्शन पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्र संघ चुनावों के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिहारी के अनुसार, चुनाव प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से पूरा किया गया और विद्यार्थियों को अपने प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिला।
आठ विश्वविद्यालयों में जीत का दावा, 200 से ज्यादा कॉलेजों में सफलता
दीप्तिमायी प्रतिहारी ने बताया कि ABVP ने 13 राज्य विश्वविद्यालयों में से आठ में छात्र संघ अध्यक्ष पद हासिल करने का दावा किया है। संगठन के मुताबिक, आठ अध्यक्ष, आठ उपाध्यक्ष, 10 सचिव और 11 सहायक महासचिव पदों पर उसके समर्थित उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है।इसके अलावा, 200 से अधिक कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों में जीत का दावा भी किया गया है। हालांकि, ये आंकड़े संगठन द्वारा जारी किए गए हैं और विभिन्न छात्र संगठनों की ओर से चुनाव परिणामों को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।
आठ साल बाद हुए छात्र संघ चुनाव, विद्यार्थियों में उत्साह
ओडिशा में आठ वर्षों के अंतराल के बाद छात्र संघ चुनाव आयोजित किए गए। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने छात्र संघ चुनाव बहाल करने का अपना चुनावी वादा पूरा किया। चुनावों की वापसी के बाद विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में विद्यार्थियों को अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करने का अवसर मिला।ABVP कार्यकर्ताओं ने चुनाव कराने के फैसले पर राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया। संगठन के समर्थकों ने परिणामों का जश्न मनाते हुए मिठाइयां बांटीं। छात्र संघ चुनावों की बहाली को विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्र प्रतिनिधित्व की व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।छात्र संघों के जरिए विद्यार्थी शैक्षणिक सुविधाओं, छात्रावास, पुस्तकालय, परिवहन और परिसर से जुड़ी समस्याओं को प्रशासन के सामने उठा सकते हैं। ऐसे में निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका विद्यार्थियों और शिक्षण संस्थानों के प्रशासन के बीच संवाद स्थापित करने में महत्वपूर्ण होती है।
नामांकन से मतदान तक व्यवस्थित रही प्रक्रिया: प्रतिहारी
ABVP की प्रदेश सचिव दीप्तिमायी प्रतिहारी ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर कहा कि नामांकन दाखिल करने से लेकर उम्मीदवारों की पहचान, 'मीट-द-कैंडिडेट' सत्र और अंतिम मतदान तक पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित तरीके से संपन्न हुई।उन्होंने कहा कि विद्यार्थी परिषद लंबे समय से स्वतंत्र और निष्पक्ष छात्र संघ चुनाव कराने की मांग कर रही थी। संगठन के अनुसार, चुनावों के आयोजन से छात्र समुदाय को अपनी पसंद के प्रतिनिधियों को चुनने का अवसर मिला।प्रतिहारी ने चुनाव परिणामों को ABVP के लिए महत्वपूर्ण बताया और दावा किया कि राज्यभर में विद्यार्थियों ने संगठन के समर्थित उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है।
अन्य छात्र संगठनों ने भी किया जीत का दावा
ओडिशा के छात्र संघ चुनावों में ABVP के अलावा बीजू छात्र जनता दल (BCJD) और कांग्रेस से जुड़े भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने भी अपनी सफलता के दावे किए हैं।बीजद से जुड़े छात्र संगठन BCJD ने दावा किया कि उसके समर्थित उम्मीदवारों ने राज्य में लगभग 55 से 60 प्रतिशत छात्र संघों में जीत हासिल की है। वहीं, NSUI ने 30 कॉलेजों में अध्यक्ष पद जीतने और 80 अन्य शिक्षण संस्थानों में दूसरे स्थान पर रहने की बात कही है।उत्कल विश्वविद्यालय में ABVP समर्थित उम्मीदवारों ने कई प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की, जबकि रमा देवी महिला विश्वविद्यालय में BCJD समर्थित उम्मीदवारों ने प्रमुख पद हासिल किए। चुनावों के दौरान कुछ विपक्षी छात्र संगठनों ने सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग के आरोप भी लगाए थे। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें प्रमाणित निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।
चुनाव परिणामों के बाद छात्र राजनीति में नई सक्रियता
ओडिशा में आठ साल बाद हुए छात्र संघ चुनावों ने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्र राजनीति को फिर सक्रिय कर दिया है। विभिन्न संगठनों के समर्थित उम्मीदवारों की जीत के बाद अब निर्वाचित प्रतिनिधियों के सामने विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों को उठाने और संस्थानों में बेहतर सुविधाओं के लिए काम करने की जिम्मेदारी होगी।फिलहाल, ABVP ने आठ विश्वविद्यालयों और 200 से अधिक संस्थानों में जीत का दावा किया है। दूसरी ओर, BCJD और NSUI भी अपनी चुनावी सफलता का दावा कर रहे हैं। ऐसे में अलग-अलग छात्र संगठनों के आंकड़ों और संस्थानवार परिणामों को ध्यान में रखकर ही पूरे चुनावी प्रदर्शन का आकलन किया जा सकता है।
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