कंधमाल हिंसा जांच आयोग की रिपोर्ट गायब होने के मामले में CID जांच शुरू

Update: 2026-07-28 11:46 GMT

भुवनेश्वर : ओडिशा पुलिस के क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) ने मंगलवार को कंधमाल हिंसा जांच आयोग की रिपोर्ट गायब होने के मामले में जांच शुरू कर दी है। यह रिपोर्ट वर्ष 2008 में विश्व हिंदू परिषद (VHP) नेता लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या और उसके बाद हुई सांप्रदायिक हिंसा की जांच के लिए गठित आयोग से जुड़ी थी।

CID ने इस मामले में एक नया केस दर्ज किया है और अब दस्तावेज के गायब होने की परिस्थितियों की जांच की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, इस जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि आयोग की रिपोर्ट कैसे गायब हुई और इसके पीछे किसी तरह की लापरवाही या अन्य कारण तो नहीं थे।

यह मामला उस समय सामने आया जब आयोग की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं मिली। इसके बाद 10 जून को भुवनेश्वर के कैपिटल पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट गायब होने को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी। शुरुआत में इस मामले की जांच भुवनेश्वर-कटक कमिश्नरेट पुलिस कर रही थी।

मुख्यमंत्री के आदेश के बाद CID को सौंपी गई जांच

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सोमवार को इस मामले की जांच CID को सौंपने का आदेश दिया था। इसके बाद CID ने मंगलवार को औपचारिक रूप से जांच शुरू कर दी।

राज्य सरकार का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच एक विशेष एजेंसी से कराना जरूरी था। अब CID दस्तावेजों की उपलब्धता, रिकॉर्ड प्रबंधन और रिपोर्ट के गायब होने से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगी।

2008 कंधमाल हिंसा से जुड़ा मामला

लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या अगस्त 2008 में कंधमाल जिले में हुई थी। इसके बाद इलाके में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। इस घटना के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए एक आयोग का गठन किया था।

आयोग को हत्या और उसके बाद हुई हिंसा के कारणों, घटनाओं और प्रशासनिक पहलुओं की जांच करने की जिम्मेदारी दी गई थी। आयोग की रिपोर्ट को लंबे समय से इस घटना से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों में शामिल माना जाता रहा है।

राजनीतिक विवाद भी जुड़ा

रिपोर्ट गायब होने का मामला सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। जिस समय कंधमाल हिंसा हुई थी, उस समय ओडिशा में बीजू जनता दल (BJD) की सरकार थी।

विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच इस मामले को लेकर आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, CID की जांच का मुख्य उद्देश्य राजनीतिक आरोपों से अलग हटकर यह पता लगाना होगा कि रिपोर्ट के रिकॉर्ड से गायब होने के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं।

CID जुटाएगी दस्तावेज और रिकॉर्ड

जांच के दौरान CID संबंधित विभागों से रिकॉर्ड जुटाएगी और उन अधिकारियों से पूछताछ कर सकती है जो आयोग की रिपोर्ट या उससे जुड़े दस्तावेजों के रखरखाव से जुड़े रहे हैं।

जांच एजेंसी यह भी पता लगाएगी कि रिपोर्ट आखिरी बार कहां उपलब्ध थी, उसे किस विभाग या अधिकारी के पास रखा गया था और उसके गायब होने की जानकारी कब सामने आई।

इसके अलावा, सरकारी रिकॉर्ड प्रबंधन व्यवस्था की भी समीक्षा की जा सकती है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि महत्वपूर्ण दस्तावेजों की सुरक्षा में कोई चूक हुई या नहीं।

आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर होगी

फिलहाल CID ने मामले में जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि रिपोर्ट गायब होने के पीछे कोई आपराधिक गतिविधि थी, लापरवाही हुई या कोई अन्य कारण जिम्मेदार था।

कंधमाल हिंसा और लक्ष्मणानंद सरस्वती हत्या से जुड़ा यह मामला पहले से ही ओडिशा के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास में संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में आयोग की रिपोर्ट के गायब होने की जांच पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।

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