भुवनेश्वर। ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल (BJD) के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने शनिवार, 7 नवंबर 2026 को बाढ़ और चक्रवात से प्रभावित गंजाम जिले का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने प्रभावित किसानों और स्थानीय लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। नवीन पटनायक ने कहा कि गंजाम के शेरगढ़ और हिंजिली क्षेत्रों में हालात अच्छे नहीं हैं। किसान भारी संकट में हैं और उन्हें तत्काल सरकारी सहायता की जरूरत है। उन्होंने राज्य सरकार से प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द मुआवजा देने और राहत कार्यों में तेजी लाने की मांग की।गंजाम जिले में चक्रवात अर्नब और इसके बाद हुई भारी बारिश तथा बाढ़ ने किसानों की फसलों और स्थानीय बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। खेतों में खड़ी धान की फसल खराब होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कई ग्रामीण इलाकों में सड़क, आवागमन और अन्य सुविधाएं भी प्रभावित हुई हैं। नवीन पटनायक ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया और लोगों से सीधे बातचीत की।
शेरगढ़ और हिंजिली में किसानों से मिले नवीन पटनायक
नवीन पटनायक ने अपने दौरे की शुरुआत शेरगढ़ से की। यहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उनसे मिलने पहुंचे। लोगों की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन को बैरिकेडिंग की व्यवस्था करनी पड़ी। ग्रामीणों ने पूर्व मुख्यमंत्री को अपनी समस्याओं से अवगत कराया और खराब हुई फसलों को दिखाया।कई किसान अपने साथ सड़ी हुई धान की पौध लेकर पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि चक्रवात और उसके बाद आई बाढ़ के कारण खेतों में पानी भर गया, जिससे फसलें बर्बाद हो गईं। किसानों ने कहा कि महीनों की मेहनत और खेती पर लगाया गया पैसा पानी में चला गया है। अब उनके सामने अगली फसल की तैयारी और परिवार का खर्च चलाने की चुनौती है।नवीन पटनायक ने किसानों की बातें सुनीं और उनकी परेशानियों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि शेरगढ़ और हिंजिली में स्थिति संतोषजनक नहीं है। किसान परेशान हैं और उन्हें तत्काल मदद की आवश्यकता है। उन्होंने प्रशासन से प्रभावित परिवारों को जल्द मुआवजा उपलब्ध कराने के लिए कहा।
चार क्षेत्रों का किया दौरा, राहत कार्यों की भी समीक्षा
नवीन पटनायक ने अपने एक दिवसीय दौरे में गंजाम जिले के शेरगढ़, हिंजिलीकट, असिका और सोराडा क्षेत्रों का निरीक्षण किया। शेरगढ़ के बाद वह हिंजिलीकट ब्लॉक की नुआबरुपाड़ा ग्राम पंचायत पहुंचे। यहां उन्होंने स्थानीय लोगों से मुलाकात कर फसलों और अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान की जानकारी ली।इसके बाद उन्होंने असिका और सोराडा ब्लॉक के बालिगोछा क्षेत्र का दौरा किया। इन इलाकों में भी किसानों और ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं उनके सामने रखीं।उन्होंने खेतों में हुए नुकसान के साथ-साथ स्थानीय बुनियादी ढांचे की स्थिति का भी जायजा लिया। इसके अलावा राज्य सरकार और जिला प्रशासन की ओर से चलाए जा रहे राहत, पुनर्वास और मरम्मत कार्यों की समीक्षा की।नवीन पटनायक ने प्रभावित लोगों की शिकायतें सुनते हुए कहा कि प्रशासन को नुकसान का सही आकलन कर जल्द राहत पहुंचानी चाहिए। उनका कहना था कि किसानों को सहायता मिलने में देरी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि प्राकृतिक आपदा के बाद उनकी आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर हो चुकी है।
खराब धान और गन्ने की फसल ने बढ़ाई परेशानी
चक्रवात और बाढ़ का सबसे ज्यादा असर कृषि क्षेत्र पर देखने को मिला है। गंजाम के कई इलाकों में धान की फसल पानी में डूब गई। लंबे समय तक खेतों में पानी जमा रहने के कारण पौधे खराब होने लगे। किसानों ने नवीन पटनायक को सड़ी हुई धान की फसल दिखाकर अपनी परेशानी बताई।कुछ क्षेत्रों में गन्ने और सब्जियों की खेती को भी नुकसान पहुंचा है। किसानों का कहना है कि उन्होंने फसल तैयार करने के लिए महीनों तक मेहनत की और खेती पर आर्थिक निवेश किया था, लेकिन प्राकृतिक आपदा ने उनकी पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया।कई किसानों के सामने अब कर्ज चुकाने और अगली फसल की बुवाई के लिए पैसे जुटाने का संकट है। उन्होंने सरकार से जल्द सर्वे कराकर वास्तविक नुकसान के आधार पर मुआवजा देने की मांग की।नवीन पटनायक ने कहा कि किसानों की परेशानी को गंभीरता से लेने की जरूरत है। उन्होंने प्रशासन से प्रभावित लोगों की पहचान कर उन्हें समय पर सहायता उपलब्ध कराने का आग्रह किया
नवीन पटनायक के दौरे के दौरान लगे 'गो बैक' के नारे
नवीन पटनायक के गंजाम दौरे के दौरान कुछ स्थानों पर विरोध का सामना भी करना पड़ा। हिंजिलीकट क्षेत्र में ऋषिकुल्या पुल के आसपास कुछ पोस्टर दिखाई दिए, जिन पर 'नवीन गो बैक' के नारे लिखे थे।कुछ स्थानीय लोगों ने उनके दौरे को लेकर नाराजगी जताई। एक महिला किसान ने अपनी फसल बर्बाद होने और परिवार की परेशानी का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने सब कुछ खो दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि अब किसानों की मदद कौन करेगा।एक अन्य किसान ने बताया कि उनकी सब्जियों की पूरी फसल बाढ़ में बर्बाद हो गई। उन्होंने कहा कि महीनों की मेहनत के बाद भी अब उनके पास घरेलू खर्च चलाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं बचे हैं।इस विरोध से पता चलता है कि प्रभावित इलाकों में किसानों की नाराजगी और सरकारी सहायता को लेकर उनकी अपेक्षाएं कितनी अधिक हैं।
बीजद पहले भी भेज चुकी है प्रतिनिधिमंडल
नवीन पटनायक के दौरे से पहले बीजद की ओर से भी प्रभावित क्षेत्रों में प्रतिनिधिमंडल भेजे गए थे। पार्टी की मुख्य सचेतक प्रमिला मल्लिक के नेतृत्व में एक टीम ने गंजाम के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया था।इसके अलावा पूर्व मंत्री सुदाम मरांडी के नेतृत्व में एक अन्य प्रतिनिधिमंडल ने कंधमाल जिले के भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया था। पार्टी नेताओं ने प्रभावित परिवारों से बातचीत कर नुकसान और राहत व्यवस्था की जानकारी जुटाई थी।बीजद के अनुसार, नवीन पटनायक 23 अक्टूबर से ही गंजाम और गजपति जिलों की स्थिति पर नजर रख रहे थे। वह जिला कलेक्टर के संपर्क में भी थे और राहत तथा पुनर्वास से जुड़ी जानकारी ले रहे थे।
तत्काल मुआवजे की मांग, सरकार के सामने रखीं समस्याएं
नवीन पटनायक ने राज्य सरकार से मांग की कि प्रभावित किसानों और परिवारों को बिना देरी किए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि नुकसान का सर्वेक्षण तेजी से पूरा होना चाहिए और मुआवजे की प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए।उनका कहना है कि फसल बर्बाद होने के कारण किसान गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। ऐसे में उन्हें तत्काल राहत देना जरूरी है। उन्होंने प्रशासन से यह भी कहा कि प्रभावित गांवों में बुनियादी सुविधाओं को जल्द बहाल किया जाए।गंजाम का यह दौरा ऐसे समय हुआ है, जब चक्रवात अर्नब और उसके बाद आई बाढ़ के असर से जिले के कई हिस्से उबरने की कोशिश कर रहे हैं। अब प्रभावित किसानों की नजर राज्य सरकार की ओर से होने वाले नुकसान के आकलन और मुआवजे के भुगतान पर है।