भुवनेश्वर। ओडिशा के बालेश्वर जिले के बिचित्रपुर वन क्षेत्र से बचाए गए पांच ओरंगुटानों को लेकर राज्य सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। वन एवं पर्यावरण मंत्री गणेश राम सिंहखुंटिया ने कहा कि ओडिशा सरकार चाहती है कि इन पांचों ओरंगुटानों को राज्य में ही रखा जाए। फिलहाल सभी ओरंगुटान भुवनेश्वर स्थित नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में हैं और पूरी तरह स्वस्थ बताए जा रहे हैं। मंत्री ने कहा कि इन जानवरों की स्थिति अच्छी है और वे लगातार बढ़ रहे हैं। राज्य सरकार की इच्छा है कि इन्हें नंदनकानन में ही रहने दिया जाए।
मंत्री गणेश राम सिंहखुंटिया ने बताया कि अब तक किसी भी देश ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन ओरंगुटानों पर अपना मालिकाना हक नहीं जताया है। उन्होंने कहा कि जानवरों के संबंध में किसी भी प्रकार का अंतरराष्ट्रीय दावा सामने आने पर आवश्यक प्रमाणों की जांच की जाएगी। फिलहाल राज्य सरकार इन पांचों ओरंगुटानों की देखभाल और उनके संरक्षण को प्राथमिकता दे रही है।
नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में रखे गए पांचों ओरंगुटान
बालेश्वर जिले के बिचित्रपुर वन क्षेत्र से बचाए गए पांचों ओरंगुटानों को भुवनेश्वर के नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में रखा गया है। यहां उनकी देखभाल की जा रही है। वन मंत्री के अनुसार, सभी जानवर स्वस्थ हैं और उनकी स्थिति अच्छी बनी हुई है।
मंत्री ने इन ओरंगुटानों के स्वास्थ्य को लेकर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जानवरों को किसी भी तरह से परेशान नहीं किया जाना चाहिए। राज्य सरकार चाहती है कि वे सुरक्षित वातावरण में रहें और उनकी देखभाल लगातार जारी रहे।
ओरंगुटान एक विशेष प्रकार के वानर हैं, जिनके संरक्षण को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष ध्यान दिया जाता है। ऐसे में इन पांच जानवरों का ओडिशा में पाया जाना और उनका संरक्षण महत्वपूर्ण विषय बन गया है।
किसी देश ने अब तक नहीं जताया मालिकाना हक
वन मंत्री गणेश राम सिंहखुंटिया ने स्पष्ट किया कि अभी तक किसी भी देश की ओर से इन पांच ओरंगुटानों पर आधिकारिक रूप से मालिकाना हक नहीं जताया गया है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन जानवरों को लेकर किसी देश का दावा सामने नहीं आया है।
मंत्री के इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि फिलहाल ओरंगुटानों के संबंध में किसी देश की ओर से स्वामित्व का औपचारिक दावा किए जाने की जानकारी राज्य सरकार के पास नहीं है। हालांकि, भविष्य में किसी देश की ओर से दावा प्रस्तुत किए जाने की स्थिति में आवश्यक प्रमाणों की जांच का विषय महत्वपूर्ण होगा।
राज्य सरकार का रुख है कि जब तक इस संबंध में कोई स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आती, तब तक इन जानवरों को नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में ही रखा जाए।
इंडोनेशिया से आ सकती है विशेषज्ञों की टीम
मंत्री ने बताया कि इंडोनेशिया के विशेषज्ञों की एक टीम इन पांचों ओरंगुटानों की जांच करने के लिए भारत आ सकती है। इस संभावित दौरे को लेकर उन्होंने कहा कि भारत सरकार संबंधित टीम से आवश्यक सबूत मांगेगी।
विशेषज्ञों की टीम के भारत आने की संभावना के बीच इन जानवरों की पहचान और उनसे जुड़े तथ्यों की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, मंत्री ने टीम के भारत आने की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत सरकार की ओर से आवश्यक प्रमाण मांगे जाएंगे। इससे संकेत मिलता है कि ओरंगुटानों के संबंध में किसी भी निर्णय से पहले संबंधित तथ्यों और दस्तावेजों की जांच की जाएगी।
वन मंत्री बोले- उन्हें बिल्कुल परेशान न करें
इन पांच ओरंगुटानों की स्थिति को लेकर वन मंत्री गणेश राम सिंहखुंटिया ने कहा, "वे स्वस्थ हैं और बढ़ रहे हैं। उन्हें बिल्कुल भी परेशान न करें। हम चाहते हैं कि वे ओडिशा में ही रहें।"
मंत्री ने अपने बयान में जानवरों के स्वास्थ्य और उनकी सुरक्षा को विशेष महत्व दिया। उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार की इच्छा इन पांचों ओरंगुटानों को नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में ही रखने की है।
उनके अनुसार, वर्तमान में सभी ओरंगुटान अच्छी स्थिति में हैं। ऐसे में सरकार चाहती है कि उनकी देखभाल में किसी तरह की बाधा न आए और वे सुरक्षित रहें।
ओडिशा सरकार ने दोहराई अपनी इच्छा
वन एवं पर्यावरण मंत्री के बयान से स्पष्ट है कि राज्य सरकार पांचों ओरंगुटानों को ओडिशा से बाहर भेजने के पक्ष में नहीं है। सरकार चाहती है कि ये जानवर राज्य में ही रहें और नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में उनका संरक्षण जारी रहे।
मंत्री ने इस संबंध में राज्य सरकार की इच्छा को दोहराते हुए कहा कि ओरंगुटानों को नंदनकानन में रखा जाना चाहिए। हालांकि, उनके स्थायी निवास या किसी संभावित अंतरराष्ट्रीय दावे पर अंतिम निर्णय के संबंध में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
फिलहाल राज्य सरकार का ध्यान इन जानवरों की सुरक्षा और उनके स्वास्थ्य पर है। नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में पांचों ओरंगुटानों की अच्छी स्थिति को लेकर मंत्री ने संतोष जताया है।
अंतरराष्ट्रीय जांच और प्रमाणों पर रहेगी नजर
बालेश्वर जिले के बिचित्रपुर वन क्षेत्र से बचाए गए इन पांच ओरंगुटानों को लेकर अब संभावित अंतरराष्ट्रीय जांच पर भी नजर रहेगी। इंडोनेशिया की विशेषज्ञ टीम के भारत आने की संभावना के बीच यह मामला महत्वपूर्ण हो गया है।
मंत्री के अनुसार, भारत सरकार संबंधित टीम से जरूरी सबूत मांगेगी। हालांकि, अब तक किसी देश की ओर से जानवरों पर मालिकाना हक जताने की जानकारी नहीं है।
ऐसे में आने वाले समय में विशेषज्ञों की जांच और आवश्यक प्रमाणों की उपलब्धता के आधार पर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल पांचों ओरंगुटान भुवनेश्वर के नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में स्वस्थ हैं और ओडिशा सरकार उन्हें राज्य में ही रखने की इच्छा जता रही है।