पुरी। ओडिशा के पुरी स्थित विश्वप्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर में दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए दर्शन व्यवस्था को अधिक सुगम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। 12वीं सदी के इस ऐतिहासिक मंदिर में दिव्यांग भक्तों की सुविधा के लिए विशेष रैंप और रेलिंग का निर्माण पूरा कर लिया गया है। मंदिर प्रशासन अब इस व्यवस्था को व्यवस्थित तरीके से लागू करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार कर रहा है। नई सुविधा शुरू होने के बाद दिव्यांग श्रद्धालुओं को भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने में पहले की तुलना में अधिक आसानी होगी। हालांकि, कार्तिक महीने में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए फिलहाल इस सुविधा का परीक्षण टाल दिया गया है। सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद इसे शुरू किया जाएगा।

मंदिर के उत्तरी द्वार के पास बनाया गया रैंप

प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने दिव्यांग श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिर के उत्तरी प्रवेश द्वार के पास रैंप का निर्माण कराया है।

यह रैंप उत्तरी द्वार के निकट स्थित 'गुमुटा' से लेकर 'कूर्म बेधा' तक बनाया गया है। इसके साथ ही श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सहूलियत के लिए रेलिंग भी लगाई गई है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य उन भक्तों को मंदिर परिसर में आवाजाही की सुविधा प्रदान करना है, जिन्हें चलने-फिरने में परेशानी होती है या जो व्हीलचेयर का उपयोग करते हैं।

मंदिर प्रशासन की यह पहल दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि अब उन्हें निर्धारित मार्ग से दर्शन स्थल तक पहुंचने में सहायता मिल सकेगी।

जया-विजया द्वार के पास से होंगे भगवान के दर्शन

नई व्यवस्था के तहत दिव्यांग भक्तों को मंदिर के भीतर निर्धारित स्थान तक जाने की अनुमति देने की योजना बनाई गई है।

प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, श्रद्धालु जया-विजया द्वार के पास स्थित 'बाहरा कथा' क्षेत्र तक पहुंच सकेंगे। यहां से उन्हें भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

इस व्यवस्था से उन श्रद्धालुओं को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है, जो शारीरिक परेशानियों के कारण सामान्य दर्शन कतार में लंबे समय तक खड़े नहीं रह सकते।

हालांकि, दिव्यांग भक्तों के प्रवेश, सहायता और दर्शन की पूरी प्रक्रिया एसओपी तैयार होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए तैयार हो रही विशेष एसओपी

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन दिव्यांग भक्तों के दर्शन को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए विशेष मानक संचालन प्रक्रिया तैयार कर रहा है।

इस एसओपी में श्रद्धालुओं के प्रवेश, निर्धारित मार्ग, सुरक्षा व्यवस्था और दर्शन की प्रक्रिया से संबंधित नियम तय किए जा सकते हैं।

मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में दिव्यांग भक्तों को अलग सुविधा प्रदान करते समय सामान्य दर्शन व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन का ध्यान रखना भी जरूरी होगा।

प्रशासन का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिससे दिव्यांग श्रद्धालुओं को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े और वे सुरक्षित तरीके से भगवान के दर्शन कर सकें।

शुरुआत में प्रतिदिन 20 भक्तों के साथ होगा ट्रायल

मंदिर प्रशासन ने नई सुविधा को लागू करने से पहले इसका परीक्षण करने की योजना बनाई है।

प्रारंभिक चरण में प्रतिदिन लगभग 20 दिव्यांग श्रद्धालुओं के साथ ट्रायल रन आयोजित करने का प्रस्ताव है।

इस परीक्षण के माध्यम से यह समझने में मदद मिलेगी कि रैंप, रेलिंग और निर्धारित दर्शन मार्ग का उपयोग करते समय श्रद्धालुओं को किन सुविधाओं या अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता पड़ सकती है।

इसके अलावा परीक्षण से भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता का भी आकलन किया जा सकेगा।

यदि परीक्षण के दौरान कोई समस्या सामने आती है, तो नियमित संचालन शुरू होने से पहले उसमें सुधार किया जा सकेगा।

कार्तिक महीने की भीड़ के कारण टला परीक्षण

फिलहाल मंदिर में कार्तिक महीने के कारण श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास में भगवान जगन्नाथ के दर्शन और पूजा-अर्चना का विशेष महत्व माना जाता है।

इस अवधि में बड़ी संख्या में भक्त मंदिर पहुंचते हैं। ऐसे में दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना मंदिर प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।

इसी कारण दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए बनाई गई नई सुविधा का ट्रायल फिलहाल आयोजित नहीं किया जाएगा।

मंदिर प्रशासन ने सभी आवश्यक तैयारियां पूरी होने और भीड़ की स्थिति अनुकूल होने के बाद परीक्षण शुरू करने की योजना बनाई है।

हालांकि, नियमित सुविधा शुरू करने की निश्चित तारीख अभी घोषित नहीं की गई है।

व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं को मिलेगी सहूलियत

नई रैंप व्यवस्था विशेष रूप से उन श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी हो सकती है, जिन्हें सीढ़ियां चढ़ने या लंबे रास्ते पैदल तय करने में कठिनाई होती है।

व्हीलचेयर का उपयोग करने वाले भक्तों को भी निर्धारित मार्ग से मंदिर परिसर के भीतर पहुंचने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

रेलिंग लगाए जाने से चलने में परेशानी का सामना करने वाले श्रद्धालुओं को अतिरिक्त सहारा मिल सकेगा।

हालांकि, व्हीलचेयर की उपलब्धता, सहायकों की तैनाती और अन्य विशेष सुविधाओं के संबंध में अंतिम व्यवस्था अभी स्पष्ट नहीं है।

इन पहलुओं पर एसओपी तैयार होने के बाद अधिक जानकारी सामने आ सकेगी।

ऐतिहासिक मंदिर में सुगम दर्शन की दिशा में पहल

पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

12वीं सदी में निर्मित यह मंदिर धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।

ऐसे प्राचीन मंदिरों में आधुनिक सुविधाएं विकसित करते समय धार्मिक परंपराओं, ऐतिहासिक संरचनाओं और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है।

दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए रैंप और रेलिंग का निर्माण इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सभी तैयारियां पूरी होने के बाद शुरू होगी सुविधा

मंदिर प्रशासन की योजना है कि दिव्यांग भक्तों के लिए तैयार किए गए रैंप का उपयोग व्यवस्थित तरीके से शुरू किया जाए।

इसके लिए एसओपी को अंतिम रूप देने, सुरक्षा व्यवस्था तय करने और ट्रायल रन पूरा करने जैसे कार्य महत्वपूर्ण होंगे।

प्रारंभिक परीक्षण में लगभग 20 श्रद्धालुओं को प्रतिदिन शामिल करने की योजना है। इसके परिणामों के आधार पर आगे की व्यवस्था तय की जा सकेगी।

फिलहाल कार्तिक महीने में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए परीक्षण स्थगित रखा गया है।

नई सुविधा शुरू होने के बाद दिव्यांग भक्तों को भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने के लिए अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित मार्ग उपलब्ध हो सकेगा।

मंदिर प्रशासन की इस पहल से उन श्रद्धालुओं को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें अब तक शारीरिक कठिनाइयों के कारण दर्शन में परेशानी का सामना करना पड़ता था।

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