करोड़ों का ट्रॉमा सेंटर बनकर तैयार, एक साल बाद भी मरीजों को नहीं मिला इलाज
भुवनेश्वर। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के कैपिटल अस्पताल में गंभीर रूप से घायल मरीजों को बेहतर आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया गया ट्रॉमा केयर सेंटर अब तक शुरू नहीं हो पाया है। पांच मंजिला इमारत का निर्माण एक साल से अधिक समय पहले पूरा हो चुका है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, केंद्र में चिकित्सा उपकरण लगाने सहित कई आवश्यक तैयारियां भी की जा चुकी हैं, लेकिन औपचारिक उद्घाटन और संचालन शुरू होने का इंतजार बना हुआ है। प्रशासनिक प्रक्रियाओं में देरी और आवश्यक चिकित्सा कर्मचारियों की कमी को इसके पीछे प्रमुख वजह बताया जा रहा है। स्थिति यह है कि आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए बनाई गई इमारत तैयार होने के बावजूद गंभीर दुर्घटनाओं के शिकार मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस देरी ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और सरकारी परियोजनाओं को समय पर शुरू करने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कैपिटल अस्पताल भुवनेश्वर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में शामिल है। यहां राजधानी के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। सड़क दुर्घटनाओं, गंभीर चोटों और अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को तत्काल विशेष चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए अस्पताल परिसर में आधुनिक ट्रॉमा केयर सेंटर विकसित करने की योजना बनाई गई थी।
जानकारी के अनुसार, इस ट्रॉमा केयर सेंटर का निर्माण वर्ष 2022 में शुरू हुआ था। परियोजना के तहत लगभग 85 करोड़ रुपये की लागत से पांच मंजिला इमारत तैयार की गई है। इसे लेवल-1 ट्रॉमा केयर सेंटर के रूप में विकसित करने की योजना है, जिसमें लगभग 200 बिस्तरों की क्षमता निर्धारित की गई है। भवन का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद सितंबर 2025 में लोक निर्माण विभाग से अंतिम मंजूरी मिलने की जानकारी सामने आई थी। निर्माण एजेंसी लार्सन एंड टुब्रो ने भी भवन का काम पूरा होने की सूचना संबंधित विभाग को दी थी।
योजना के अनुसार, इस केंद्र में हड्डी रोग, सामान्य सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी, एनेस्थीसिया और अन्य विशेष चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जानी हैं। इसके अलावा मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, मरीजों के लिए विशेष वार्ड और गंभीर घायलों के इलाज की आधुनिक व्यवस्था विकसित करने का प्रस्ताव है। इन सुविधाओं के शुरू होने से सड़क दुर्घटनाओं और अन्य हादसों में घायल मरीजों को एक ही स्थान पर विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
हालांकि भवन निर्माण और अन्य तैयारियों के बावजूद सेंटर का संचालन शुरू नहीं हो सका है। बताया जा रहा है कि आवश्यक डॉक्टरों, नर्सिंग कर्मचारियों, तकनीशियनों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में देरी हो रही है। इसके अलावा प्रशासनिक स्तर पर कुछ औपचारिक प्रक्रियाएं भी पूरी की जानी बाकी बताई गई हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी ट्रॉमा केयर सेंटर को केवल भवन और उपकरणों के आधार पर शुरू नहीं किया जा सकता। इसके लिए प्रशिक्षित चिकित्सा विशेषज्ञों, आपातकालीन सर्जरी टीम, एनेस्थीसिया विशेषज्ञों, नर्सिंग कर्मचारियों और तकनीकी स्टाफ की आवश्यकता होती है। गंभीर मरीजों को चौबीसों घंटे चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए इन सभी व्यवस्थाओं का सक्रिय होना जरूरी है।
ट्रॉमा केयर सेंटर शुरू नहीं होने का असर गंभीर रूप से घायल मरीजों के इलाज की व्यवस्था पर पड़ रहा है। कैपिटल अस्पताल में प्राथमिक उपचार और सामान्य चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन जटिल दुर्घटना मामलों में मरीजों को अक्सर कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज अस्पताल या भुवनेश्वर स्थित एम्स भेजना पड़ता है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है।
सड़क दुर्घटनाओं और गंभीर चोटों के मामलों में समय पर उपचार मिलना बेहद महत्वपूर्ण होता है। कई बार सिर, रीढ़ की हड्डी, छाती और पेट में गंभीर चोट लगने पर तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सा सहायता की जरूरत पड़ती है। ऐसे मामलों में उपचार में देरी मरीज की स्थिति को और जटिल बना सकती है। यही कारण है कि राजधानी में आधुनिक ट्रॉमा केयर सेंटर की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है।
कैपिटल अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर को शुरू करने के बाद मरीजों को विशेष उपचार के लिए दूसरे अस्पतालों में भेजने की आवश्यकता कम होने की उम्मीद है। इससे एससीबी मेडिकल कॉलेज और एम्स जैसे बड़े अस्पतालों पर पड़ने वाला मरीजों का दबाव भी कुछ हद तक कम हो सकता है।
इस परियोजना से जुड़ी एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि ट्रॉमा केयर सेंटर को पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ इमरजेंसी मेडिकल एंड रिसर्च की व्यवस्था के अंतर्गत विकसित किया गया है। इसके साथ प्रशासनिक भवन, विभागीय ब्लॉक और छात्रावास जैसी संबंधित सुविधाओं के निर्माण की भी जानकारी सामने आई है। इन सुविधाओं का उद्देश्य आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के साथ चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण को भी मजबूत करना है।
सितंबर 2025 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, निर्माण एजेंसी ने परियोजना से जुड़ी इमारतों को संबंधित विभाग को सौंपने के लिए औपचारिक अनुरोध किया था। उस समय स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिकित्सा उपकरणों की खरीद और मानव संसाधन की व्यवस्था करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने की जानकारी दी गई थी। इसके बावजूद अब तक केंद्र का नियमित संचालन शुरू नहीं होने से परियोजना की प्रगति पर सवाल उठ रहे हैं।
कैपिटल अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए अन्य प्रयास भी किए जा रहे हैं। जनवरी 2026 में अस्पताल की रोगी कल्याण समिति की बैठक में आईसीयू बिस्तरों की संख्या 16 से बढ़ाकर 40 करने का निर्णय लिया गया था। बैठक की अध्यक्षता भुवनेश्वर की सांसद अपराजिता सारंगी ने की थी। इस दौरान अस्पताल की विभिन्न लंबित समस्याओं और मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी।
बैठक में स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी बातचीत की गई थी। स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल की लंबित समस्याओं के समाधान और चिकित्सा सेवाओं में सुधार के प्रयासों का आश्वासन दिया था।
इस बीच कैपिटल अस्पताल परिसर की एक अन्य चिकित्सा सुविधा के लंबे समय से बंद रहने का मामला भी सामने आया है। लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित एडवांस्ड रिहैबिलिटेशन सेंटर के एक साल से अधिक समय से निष्क्रिय रहने की शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अक्टूबर 2026 में राज्य सरकार से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी थी। हालांकि यह पुनर्वास केंद्र ट्रॉमा केयर सेंटर से अलग परियोजना है। दोनों मामलों को एक ही सुविधा से संबंधित नहीं माना जाना चाहिए।
ट्रॉमा केयर सेंटर के संचालन में हो रही देरी के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि आवश्यक कर्मचारियों की नियुक्ति और प्रशासनिक औपचारिकताएं कब पूरी होंगी। यदि आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित केंद्र लंबे समय तक बंद रहता है तो मरीजों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए केवल नई इमारतों का निर्माण पर्याप्त नहीं है। उनके समय पर संचालन, नियमित रखरखाव और पर्याप्त कर्मचारियों की उपलब्धता भी जरूरी है। विशेष रूप से आपातकालीन चिकित्सा केंद्रों में इन व्यवस्थाओं का महत्व और बढ़ जाता है।
फिलहाल कैपिटल अस्पताल के ट्रॉमा केयर सेंटर के उद्घाटन की निश्चित तारीख सामने नहीं आई है। आवश्यक कर्मचारियों की नियुक्ति, उपकरणों की अंतिम जांच और अन्य प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही इसके संचालन की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। राजधानी के मरीजों और उनके परिजनों को उम्मीद है कि यह सुविधा जल्द शुरू होगी, ताकि गंभीर दुर्घटनाओं के समय उन्हें दूसरे अस्पतालों का रुख न करना पड़े।