CMO से कथित रूप से गायब जांच रिपोर्टों के मामले में वी.के. पांडियन से पूछताछ टली

Update: 2026-07-25 09:26 GMT

भुवनेश्वर : ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के करीबी सहयोगी और पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी वी.के. पांडियन शनिवार को मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से कथित रूप से गायब हुई महत्वपूर्ण जांच आयोग की रिपोर्टों के मामले में पूछताछ के लिए कैपिटल पुलिस के सामने पेश नहीं हुए। पांडियन ने पुलिस को जानकारी दी कि वह फिलहाल विदेश में हैं और इसी कारण वह जांच अधिकारियों के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सकते।

पांडियन ने कमिश्नरेट पुलिस को ईमेल के माध्यम से अपनी स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वह देश से बाहर हैं, इसलिए पुलिस द्वारा जारी निर्देश के अनुसार व्यक्तिगत रूप से पूछताछ में शामिल होना संभव नहीं है। उन्होंने जांच में सहयोग करने की इच्छा जताते हुए वर्चुअल माध्यम से पूछताछ की अनुमति देने का अनुरोध किया है।

यह मामला ओडिशा के मुख्यमंत्री कार्यालय से कथित तौर पर कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों और जांच आयोग की रिपोर्टों के गायब होने से जुड़ा है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और इसी क्रम में पांडियन से पूछताछ के लिए उन्हें बुलाया गया था।

जांच आयोग की रिपोर्टों के गायब होने का मामला

मामले की शुरुआत तब हुई जब मुख्यमंत्री कार्यालय से कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों के उपलब्ध नहीं होने की जानकारी सामने आई। इनमें विभिन्न जांच आयोगों से संबंधित रिपोर्टें भी शामिल होने की बात कही जा रही है। इन दस्तावेजों की स्थिति और उनके गायब होने के कारणों का पता लगाने के लिए पुलिस ने जांच शुरू की।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि ये दस्तावेज किस परिस्थिति में गायब हुए, इसके लिए कौन जिम्मेदार है और क्या इसके पीछे कोई सुनियोजित कारण था। इसी सिलसिले में उन अधिकारियों और व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही है जिनकी भूमिका मुख्यमंत्री कार्यालय के कामकाज से जुड़ी रही है।

वी.के. पांडियन लंबे समय तक मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े रहे और नवीन पटनायक के करीबी सहयोगियों में उनकी गिनती होती थी। प्रशासनिक सेवा से राजनीति में आए पांडियन ने ओडिशा सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली थीं।

पांडियन ने मांगा वर्चुअल पूछताछ का विकल्प

पुलिस के सामने पेश न होने के बाद पांडियन ने जांच में सहयोग करने के लिए ऑनलाइन माध्यम से पूछताछ का विकल्प सुझाया है। उन्होंने पुलिस को भेजे ईमेल में विदेश यात्रा का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना संभव नहीं है।

अब पुलिस को यह तय करना होगा कि वर्चुअल पूछताछ के उनके अनुरोध को स्वीकार किया जाएगा या नहीं। जांच अधिकारी मामले की गंभीरता और कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई करेंगे।

राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज

इस मामले के सामने आने के बाद ओडिशा की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है। वी.के. पांडियन पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के कार्यकाल में बेहद प्रभावशाली प्रशासनिक अधिकारी रहे हैं। उनके खिलाफ चल रही जांच को लेकर राजनीतिक दलों की ओर से भी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

विपक्षी दलों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है और कहा है कि सरकारी कार्यालयों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। वहीं, पांडियन समर्थकों का कहना है कि उन्हें जांच में सहयोग करने का पूरा अधिकार है और उन्होंने अपनी अनुपस्थिति का कारण स्पष्ट रूप से पुलिस को बता दिया है।

वी.के. पांडियन की भूमिका

वी.के. पांडियन 2000 बैच के ओडिशा कैडर के IAS अधिकारी रहे हैं। उन्होंने नवीन पटनायक सरकार में लंबे समय तक काम किया और मुख्यमंत्री कार्यालय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ उन्हें राज्य सरकार की कई प्रमुख योजनाओं और कार्यक्रमों के समन्वय से जोड़ा जाता रहा।

बाद में उन्होंने सरकारी सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर राजनीति में प्रवेश किया। वह नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल (BJD) से जुड़े और चुनावी राजनीति में भी सक्रिय रहे।

उनकी प्रशासनिक पृष्ठभूमि और पूर्व मुख्यमंत्री के साथ करीबी संबंधों के कारण इस मामले में उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, अभी तक जांच पूरी नहीं हुई है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

जांच का अगला चरण

पुलिस अब मामले में आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रही है। जांच अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय से संबंधित रिपोर्टों के गायब होने की घटना कब और कैसे हुई।

जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य व्यक्तियों से पूछताछ की जा सकती है। दस्तावेजों की बरामदगी और उनकी सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

फिलहाल वी.के. पांडियन के विदेश में होने के कारण पूछताछ की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है। अब पुलिस के निर्णय पर नजर रहेगी कि उनके वर्चुअल पूछताछ के अनुरोध को स्वीकार किया जाता है या उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए दोबारा बुलाया जाता है।

मुख्यमंत्री कार्यालय जैसे महत्वपूर्ण संस्थान से जुड़े दस्तावेजों के गायब होने का मामला प्रशासनिक पारदर्शिता और रिकॉर्ड प्रबंधन पर भी सवाल खड़े कर रहा है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और सामने आने वाले तथ्यों से ही स्पष्ट होगा कि इस मामले में वास्तविक जिम्मेदारी किसकी है।

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