ओडिशा: सुंदरगढ़ जिले में लगातार सात दिनों तक हुई मूसलाधार बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भारी बारिश के कारण जिले के कई इलाकों में जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। बारिश की रफ्तार अब कुछ कम हुई है, लेकिन इससे हुई तबाही का असर अभी भी साफ दिखाई दे रहा है। जिला प्रशासन के अनुसार, लगातार बारिश के कारण जिले में कुल 84 कच्चे मकान ढह गए हैं, जिससे कई परिवारों के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है।
जिला आपातकालीन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान हेमगिर ब्लॉक में हुआ है। यहां कुल 59 कच्चे घर क्षतिग्रस्त होकर गिर गए। इसके अलावा बड़गांव में सात, बालिशंकरा में पांच, भस्म में चार, बिसरा में तीन, कुतरा और सबडेगा में दो-दो तथा लेफ्रीपाड़ा और राजगांगपुर में एक-एक मकान को नुकसान पहुंचा है। अचानक घर गिरने से प्रभावित परिवारों का घरेलू सामान भी मलबे में दबकर खराब हो गया है।
मकान गिरने के बाद कई परिवार बेघर हो गए हैं और उन्हें मजबूरी में दूसरों के घरों में शरण लेनी पड़ रही है। कुछ लोग प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई गई पॉलिथीन के नीचे रहकर अपना गुजारा कर रहे हैं। प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से नुकसान का जल्द सर्वे कराकर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने और सरकारी आवास योजना के तहत पक्के मकान देने की मांग की है।
बालिशंकरा ब्लॉक के कई गांवों में बारिश का असर सबसे ज्यादा देखने को मिला है। यहां मंगलवार को पांच आवासीय घर गिर गए। हालांकि राहत की बात यह रही कि हादसे में किसी भी परिवार के सदस्य को गंभीर चोट नहीं आई। लेकिन घरों में रखा अनाज, कपड़े, जरूरी सामान और अन्य घरेलू वस्तुएं मलबे में दबकर खराब हो गईं। पीड़ित परिवारों ने स्थानीय प्रशासन और राजस्व विभाग को इसकी सूचना दी है।
मौसम विभाग ने अभी भी जिले के कई हिस्सों में बारिश जारी रहने की संभावना जताई है। इसे देखते हुए प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
लगातार बारिश का असर केवल घरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकारी संस्थानों की स्थिति भी खराब हो गई है। बालिशंकरा ब्लॉक के बीरबिरा पंचायत अंतर्गत किनारीमुंडा गांव के डुंगीनाला पाड़ा स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय का रसोईघर बारिश के कारण बेहद जर्जर हो गया है।
यह रसोईघर मिट्टी की दीवार और खपरैल की छत से बना हुआ है, जो अब किसी भी समय गिर सकता है। इसी भवन में पहली से पांचवीं कक्षा तक पढ़ने वाले बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन तैयार किया जाता है। रसोईघर की खराब हालत के कारण वहां काम करने वाले रसोइया और सहायिका भी डर के माहौल में काम करने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि मिट्टी के इस जर्जर भवन में बारिश के मौसम में सांप और जहरीले जीवों के निकलने का खतरा भी बना रहता है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है। विद्यालय प्रबंधन समिति और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द पक्के रसोईघर के निर्माण और स्कूल की अन्य सुविधाओं को बेहतर करने की मांग की है।
बारिश से प्रभावित सुंदरगढ़ जिले में अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बेघर हुए परिवारों को राहत पहुंचाना और कमजोर ढांचों की मरम्मत कराना है। लगातार बदलते मौसम को देखते हुए लोगों से सावधानी बरतने की अपील की गई है।