भुवनेश्वर। ओडिशा विधानसभा के मानसून सत्र में लगातार दूसरे दिन भी विपक्ष के विरोध के कारण कार्यवाही प्रभावित हुई। बुधवार को प्रश्नकाल शुरू होते ही कांग्रेस और बीजू जनता दल (BJD) के सदस्यों ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर विरोध शुरू कर दिया। कांग्रेस विधायक MMDR संशोधन कानून को वापस लेने की मांग को लेकर प्लेकार्ड के साथ सदन के वेल में पहुंचे, जबकि BJD विधायकों ने स्कूली पाठ्यपुस्तकों में कथित गलतियों का मुद्दा उठाया। पहले दिन भी इन्हीं दोनों मुद्दों को लेकर विधानसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई थी।
सदन में नारेबाजी और विरोध के कारण सामान्य कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। हंगामा जारी रहने पर विधानसभा अध्यक्ष को कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष दोनों मुद्दों पर सरकार से जवाब और कार्रवाई की मांग कर रहा है।
प्रश्नकाल शुरू होते ही वेल में पहुंचे विधायक
बुधवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने के बाद प्रश्नकाल के दौरान विपक्षी सदस्यों ने अपना विरोध तेज कर दिया। कांग्रेस विधायक हाथों में प्लेकार्ड लेकर वेल में पहुंचे और MMDR संशोधन कानून के खिलाफ नारे लगाए।
कांग्रेस इस संशोधन को वापस लेने की मांग कर रही है। मंगलवार को सत्र के पहले दिन भी पार्टी विधायकों ने यही मुद्दा उठाया था। पहले दिन कांग्रेस ने MMDR संशोधन कानून पर चर्चा की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया था।
लगातार दूसरे दिन यह मुद्दा सदन में विपक्ष के प्रमुख विरोध का कारण बना रहा।
BJD ने उठाया किताबों में गलतियों का मामला
दूसरी ओर मुख्य विपक्षी दल BJD ने स्कूली पाठ्यपुस्तकों में कथित त्रुटियों का मुद्दा उठाया। पार्टी का कहना है कि बच्चों को उपलब्ध कराई गई किताबों में गलतियां सामने आई हैं और इसके लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
सत्र के पहले दिन BJD विधायकों ने इसी मुद्दे पर स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे की मांग भी की थी। BJD की मुख्य सचेतक प्रमिला मल्लिक ने मंगलवार को कहा था कि पार्टी इस मामले में जवाबदेही चाहती है।
सरकार की ओर से BJP विधायक इरासिस आचार्य ने मंगलवार को कहा था कि पाठ्यपुस्तकों की गलतियों को लेकर सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं और संशोधित किताबें विद्यार्थियों तक पहुंचाई जा रही हैं।
पहले दिन भी नहीं चल सका था प्रश्नकाल
मंगलवार को मानसून सत्र के पहले दिन भी सदन में इसी तरह के दृश्य देखने को मिले थे। शोक प्रस्ताव के बाद जैसे ही प्रश्नकाल शुरू हुआ, BJD और कांग्रेस के विधायक वेल में पहुंच गए थे।
कांग्रेस के विधायक MMDR संशोधन कानून के खिलाफ विरोध कर रहे थे, जबकि BJD सदस्य स्कूली किताबों में कथित गलतियों को लेकर सरकार को घेर रहे थे।
विरोध के कारण विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने पहले सदन को दोपहर 1:10 बजे तक स्थगित किया था। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर भी विरोध जारी रहा और उपाध्यक्ष भवानी शंकर भोई को सदन शाम 4 बजे तक स्थगित करना पड़ा।
पहले दिन सिर्फ कुछ मिनट चली कार्यवाही
विपक्ष के लगातार विरोध के कारण मानसून सत्र के शुरुआती दिन विधानसभा में सामान्य विधायी कामकाज बेहद सीमित रहा। रिपोर्ट के मुताबिक पहले दिन सदन में करीब 13 मिनट ही कामकाज हो सका। इसमें भोजनावकाश से पहले लगभग दो मिनट और शाम चार बजे के बाद करीब 11 मिनट की कार्यवाही शामिल थी।
शाम को सदन दोबारा शुरू होने के बाद भी विपक्षी सदस्य अपनी मांगों पर अड़े रहे। हालांकि इस दौरान कुछ विधेयक सदन में पेश किए गए, जिसके बाद कार्यवाही बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी गई थी।
MMDR संशोधन पर कांग्रेस का विरोध
कांग्रेस का विरोध Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Act, 2026 को लेकर है। पार्टी इस कानून को वापस लेने की मांग कर रही है।
सत्र शुरू होने से पहले भी MMDR संशोधन का मुद्दा ओडिशा की राजनीति में प्रमुखता से उठाया गया था। विपक्षी दलों की ओर से इसके खिलाफ प्रदर्शन किए गए हैं। कांग्रेस इसे खनिज संसाधनों और राज्य के हितों से जोड़ते हुए सरकार को घेर रही है।
सदन में कांग्रेस इसी विषय पर विस्तृत चर्चा और अपनी मांगों पर सरकार की प्रतिक्रिया चाहती है।
किताबों की त्रुटियों पर BJD का विरोध जारी
BJD ने स्कूली पाठ्यपुस्तकों में कथित त्रुटियों को मानसून सत्र का प्रमुख मुद्दा बनाया है। पहले दिन पार्टी के विधायकों ने सदन के अंदर विरोध करने के बाद बाहर आयोजित प्रदर्शन में भी हिस्सा लिया था।
BJD ने स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री से जवाबदेही की मांग की है। दूसरी तरफ सत्तारूढ़ BJP का कहना है कि त्रुटियों को ठीक करने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है और संशोधित किताबें वितरित की जा रही हैं।
इस तरह इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव फिलहाल खत्म होता नहीं दिख रहा है।
सत्ता पक्ष ने विपक्ष के तरीके पर उठाए सवाल
सत्तारूढ़ BJP ने विधानसभा की कार्यवाही बाधित करने के विपक्ष के तरीके की आलोचना की है। BJP विधायक इरासिस आचार्य ने पहले दिन कहा था कि सरकार दोनों मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने विपक्ष पर बहस में भाग लेने के बजाय सदन में विरोध करने का आरोप लगाया।
वहीं विपक्ष का कहना है कि उसके उठाए मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
दोनों पक्षों के अलग-अलग रुख के कारण मानसून सत्र के शुरुआती दिनों में टकराव की स्थिति बनी हुई है।
मानसून सत्र में आगे भी गर्म रह सकते हैं मुद्दे
ओडिशा विधानसभा का मानसून सत्र 3 अक्टूबर तक चलना निर्धारित है और इस दौरान कई सरकारी विधेयकों पर विचार होना है। रिपोर्ट के अनुसार सत्र नौ दिनों का है और छह प्रमुख विधेयक इसके एजेंडे में हैं।
लेकिन शुरुआती दिनों में लगातार व्यवधान से विधायी कामकाज प्रभावित हुआ है। यदि विपक्ष और सरकार के बीच MMDR संशोधन तथा पाठ्यपुस्तकों की त्रुटियों पर गतिरोध बना रहता है तो आने वाली बैठकों में भी इन मुद्दों की गूंज सुनाई दे सकती है।
फिलहाल कांग्रेस MMDR संशोधन कानून को लेकर और BJD स्कूली किताबों की कथित गलतियों को लेकर सरकार पर दबाव बनाए हुए है। लगातार दूसरे दिन विरोध से साफ है कि दोनों मुद्दे मौजूदा मानसून सत्र के प्रमुख राजनीतिक विषय बने हुए हैं।