हीराकुंड में जलस्तर बढ़ा, गेट खोले गए

Update: 2026-07-19 05:29 GMT

संबलपुर : ऊपरी इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण जलाशय का जलस्तर बढ़ने के बाद ओडिशा के संबलपुर स्थित हीराकुंड बांध से अतिरिक्त पानी छोड़ा गया है। जलस्तर को नियंत्रित करने और बांध की सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से अधिकारियों ने रविवार को बांध के चार स्लुइस गेट खोल दिए।

अधिकारियों के अनुसार, जलाशय में पानी की लगातार बढ़ती आवक को देखते हुए यह निर्णय लिया गया। बांध प्रबंधन की ओर से बताया गया कि पानी के बहाव को नियंत्रित करने और जलाशय के जलस्तर को सुरक्षित सीमा में बनाए रखने के लिए कुल चार गेट खोले गए हैं। इनमें से तीन गेट बाएं स्पिलवे पर और एक गेट दाएं स्पिलवे पर खोला गया है।

हीराकुंड बांध देश के प्रमुख बहुउद्देशीय बांधों में से एक है। इसका उपयोग बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और जल विद्युत उत्पादन सहित कई महत्वपूर्ण उद्देश्यों के लिए किया जाता है। मानसून के दौरान जलाशय में पानी की आवक बढ़ने पर बांध प्रबंधन लगातार स्थिति की निगरानी करता है और जरूरत के अनुसार गेट खोलकर पानी का नियंत्रित निकासी करता है।

इस बार भी ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में हुई भारी बारिश के कारण बांध में पानी का स्तर बढ़ने लगा था। लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए अधिकारियों ने समय रहते एहतियाती कदम उठाए और अतिरिक्त पानी को नियंत्रित तरीके से बाहर निकालने का फैसला लिया।

बांध के गेट खोलने के बाद नदी में पानी का प्रवाह बढ़ सकता है। इसे देखते हुए प्रशासन ने संबंधित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

प्रशासन का कहना है कि बांध से पानी छोड़े जाने की प्रक्रिया पूरी तरह नियंत्रित है और जलस्तर, बारिश की स्थिति तथा पानी की आवक पर लगातार नजर रखी जा रही है। अधिकारियों की टीम बांध की स्थिति और आसपास के क्षेत्रों की निगरानी कर रही है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।

मानसून के मौसम में हीराकुंड बांध क्षेत्र में जलस्तर में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया है। भारी बारिश के दौरान जलाशय में तेजी से पानी जमा होता है, जिसके बाद बांध के गेट खोलकर अतिरिक्त पानी छोड़ा जाता है। इससे एक ओर बांध पर दबाव कम होता है, वहीं दूसरी ओर बाढ़ की स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

स्थानीय प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि वे नदी और जलाशय के आसपास जाने से बचें, खासकर उस समय जब पानी का प्रवाह बढ़ रहा हो। अधिकारियों ने कहा है कि लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह की लापरवाही से बचना जरूरी है।

हीराकुंड बांध से पानी छोड़े जाने के बाद निचले इलाकों में भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने संबंधित विभागों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। जल संसाधन विभाग और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी आपसी समन्वय के साथ स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल बांध की स्थिति नियंत्रण में है। गेट खोलने का फैसला पूरी तरह तकनीकी आकलन और जलस्तर की स्थिति को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति के आधार पर आगे के कदम तय किए जाएंगे।

इस बीच, प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें। जलाशय और नदी क्षेत्रों में सुरक्षा नियमों का पालन करना सभी के लिए जरूरी है।

हीराकुंड बांध के चार स्लुइस गेट खोलने की कार्रवाई को जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण की दिशा में उठाया गया एहतियाती कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का उद्देश्य जलाशय के बढ़ते दबाव को कम करना और आसपास के क्षेत्रों को संभावित खतरे से सुरक्षित रखना है।

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