भुवनेश्वर के लिंगराज मंदिर में विवाद से पूजा प्रभावित

Update: 2026-08-03 05:01 GMT

भुवनेश्वर। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर स्थित प्रसिद्ध लिंगराज मंदिर में सावन महीने के पहले सोमवार को सेवादारों के बीच हुए विवाद के कारण पूजा-अर्चना प्रभावित हुई। मंदिर में नियमित धार्मिक अनुष्ठान बाधित होने से हजारों श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई भक्तों को बिना पारंपरिक पूजा के ही भगवान लिंगराज को जल अर्पित करना पड़ा।

जानकारी के अनुसार, विवाद रविवार शाम को सावन महीने से जुड़े विशेष ‘पौना’ (विशेष प्रसाद या चढ़ावा) के वितरण को लेकर शुरू हुआ। इस मामले को लेकर मंदिर के दो सेवा समूहों — ब्राह्मण सेवादारों और बाडू सेवादारों — के बीच मतभेद पैदा हो गया। विवाद बढ़ने के बाद मंदिर की नियमित पूजा व्यवस्था प्रभावित हुई।

सावन का पहला सोमवार होने के कारण लिंगराज मंदिर में सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे थे। सावन महीने में भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है। ऐसे में भक्तों की भारी भीड़ के बीच पूजा व्यवस्था में आई बाधा से लोगों को काफी असुविधा हुई।

श्रद्धालु दूर-दूर से भगवान लिंगराज के दर्शन और जलाभिषेक के लिए मंदिर पहुंचे थे। कई लोगों ने घंटों इंतजार किया, लेकिन विवाद के कारण पारंपरिक पूजा प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद कई भक्तों को केवल जल चढ़ाकर ही लौटना पड़ा।

लिंगराज मंदिर ओडिशा के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है और सावन के दौरान यहां बड़ी संख्या में शिव भक्त पहुंचते हैं। सोमवार के दिन मंदिर में विशेष पूजा, अभिषेक और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है। ऐसे महत्वपूर्ण दिन पर पूजा व्यवस्था प्रभावित होने से श्रद्धालुओं में नाराजगी भी देखने को मिली।

बताया जा रहा है कि मंदिर की सेवा व्यवस्था में अलग-अलग सेवादार समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। परंपरागत रूप से ये समूह मंदिर के विभिन्न धार्मिक कार्यों और अनुष्ठानों में जिम्मेदारी निभाते हैं। हालांकि, ‘पौना’ के वितरण को लेकर पैदा हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि इसका असर मंदिर की दैनिक पूजा प्रक्रिया पर पड़ा।

घटना की जानकारी मिलने के बाद मंदिर प्रशासन और संबंधित अधिकारियों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। अधिकारियों ने दोनों पक्षों के बीच बातचीत कर विवाद को सुलझाने का प्रयास किया, ताकि मंदिर की धार्मिक गतिविधियां फिर से सामान्य हो सकें।

भक्तों का कहना है कि धार्मिक स्थलों पर इस तरह के विवादों का असर श्रद्धालुओं की आस्था पर पड़ता है। उन्होंने मंदिर प्रशासन से अपील की कि भविष्य में ऐसे अवसरों पर बेहतर समन्वय और व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि पूजा-पाठ में किसी तरह की बाधा न आए।

स्थानीय लोगों ने भी सावन जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर पर हुई इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उनका कहना है कि लिंगराज मंदिर केवल भुवनेश्वर ही नहीं, बल्कि पूरे ओडिशा की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए मंदिर की व्यवस्था को लेकर सभी पक्षों को मिलकर काम करना चाहिए।

सावन के दौरान लिंगराज मंदिर में हर साल बड़ी संख्या में कांवड़िए और श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्त पवित्र जल लेकर आते हैं और भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। इस बार भी पहले सोमवार को सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी थी।

मंदिर में पूजा व्यवस्था बाधित होने की घटना ने एक बार फिर धार्मिक संस्थानों में बेहतर प्रबंधन और आपसी तालमेल की जरूरत को सामने रखा है। श्रद्धालुओं की सुविधा और धार्मिक परंपराओं के सुचारु संचालन के लिए सेवादारों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय जरूरी माना जा रहा है।

फिलहाल विवाद को शांत करने के प्रयास जारी हैं और मंदिर की सामान्य गतिविधियों को बहाल करने की कोशिश की जा रही है। श्रद्धालुओं को उम्मीद है कि आने वाले सावन सोमवारों में ऐसी स्थिति दोबारा नहीं बनेगी और वे शांतिपूर्ण तरीके से भगवान लिंगराज की पूजा कर सकेंगे।

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