चंडीगढ़। पंजाब पुलिस के रोपड़ रेंज के तत्कालीन डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) हरचरण सिंह भुल्लर के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। भ्रष्टाचार और आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने उन्हें गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद भुल्लर को चंडीगढ़ की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें आठ दिन की ईडी कस्टडी में भेज दिया गया। जांच एजेंसी अब उनसे मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन और कथित अवैध संपत्ति के संबंध में पूछताछ करेगी।प्रवर्तन निदेशालय के चंडीगढ़ जोनल ऑफिस-I की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, हरचरण सिंह भुल्लर को 9 अक्टूबर 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में की गई है। इसी मामले में ईडी इससे पहले एक अन्य आरोपी कृशानू शारदा को भी गिरफ्तार कर चुकी है।
9 अक्टूबर को ईडी ने की गिरफ्तारी
प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी आधिकारिक जानकारी में बताया कि पंजाब पुलिस के रोपड़ रेंज के तत्कालीन डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर को 9 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया।उनकी गिरफ्तारी पीएमएलए की धारा 19 के तहत की गई है। यह प्रावधान निर्धारित कानूनी शर्तों के अधीन प्रवर्तन निदेशालय को मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में गिरफ्तारी का अधिकार देता है।जांच एजेंसी के अनुसार, मामला भ्रष्टाचार और ज्ञात आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोपों से जुड़ा हुआ है।गिरफ्तारी के बाद भुल्लर को विशेष अदालत के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने ईडी को पूछताछ के लिए आठ दिन की कस्टडी प्रदान की।इस दौरान जांच एजेंसी मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर सकेगी।
आठ दिन की ईडी कस्टडी में भेजे गए भुल्लर
चंडीगढ़ की विशेष पीएमएलए अदालत ने हरचरण सिंह भुल्लर को आठ दिन की ईडी कस्टडी में भेजने का आदेश दिया है।ईडी कस्टडी का अर्थ है कि निर्धारित अवधि के दौरान आरोपी जांच एजेंसी की हिरासत में रहेगा और उससे पूछताछ की जा सकेगी।जांच एजेंसी के लिए यह अवधि मामले से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण होती है।भुल्लर से कथित वित्तीय लेनदेन, संपत्ति और मामले में अन्य व्यक्तियों की भूमिका के संबंध में सवाल किए जा सकते हैं।हालांकि, ईडी की उपलब्ध प्रेस विज्ञप्ति के विवरण में पूछताछ के लिए तैयार किए गए सवालों या किसी विशेष संपत्ति की जानकारी नहीं दी गई है।अदालत की ओर से कस्टडी दिया जाना आरोपी के दोषी साबित होने के बराबर नहीं है। मामले में आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही होगी।
भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति का मामला
ईडी की जांच भ्रष्टाचार और आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने से जुड़े आरोपों पर केंद्रित है।आय से अधिक संपत्ति के मामलों में जांच एजेंसियां सामान्य तौर पर किसी व्यक्ति की घोषित या ज्ञात वैध आय और उसके पास मौजूद संपत्तियों तथा खर्च के बीच अंतर की जांच करती हैं।मनी लॉन्ड्रिंग की जांच में यह भी देखा जाता है कि कथित आपराधिक गतिविधियों से प्राप्त धन या संपत्ति का इस्तेमाल किस प्रकार किया गया।धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत अपराध से प्राप्त आय से संबंधित लेनदेन और अन्य गतिविधियों की जांच की जाती है।हरचरण सिंह भुल्लर के मामले में ईडी ने भ्रष्टाचार और कथित आय से अधिक संपत्ति से जुड़े धन शोधन के पहलुओं की जांच के तहत गिरफ्तारी की है।हालांकि, उपलब्ध जानकारी में कथित अवैध संपत्ति की कुल कीमत या वित्तीय लेनदेन की राशि का उल्लेख नहीं किया गया है।
कृशानू शारदा पहले ही हो चुका गिरफ्तार
इस मामले में हरचरण सिंह भुल्लर की गिरफ्तारी से पहले प्रवर्तन निदेशालय एक अन्य आरोपी के खिलाफ भी कार्रवाई कर चुका है।ईडी के अनुसार, 18 सितंबर 2026 को कृशानू शारदा को पीएमएलए के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया था।जांच एजेंसी ने कृशानू शारदा को हरचरण सिंह भुल्लर के लिए बिचौलिए या माध्यम के तौर पर काम करने वाला व्यक्ति बताया है।इस जानकारी के आधार पर मामले में दोनों आरोपियों की कथित भूमिकाओं की जांच की जा रही है।हालांकि, उपलब्ध विवरण में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कृशानू शारदा के माध्यम से कितनी राशि का लेनदेन हुआ या किन व्यक्तियों के बीच कथित वित्तीय गतिविधियां संचालित की गईं।इन पहलुओं पर जांच एजेंसी की आगे की कार्रवाई और न्यायिक कार्यवाही के दौरान अधिक जानकारी सामने आ सकती है।
क्या है पीएमएलए की धारा 19?
धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 की धारा 19 प्रवर्तन निदेशालय के अधिकृत अधिकारियों को निर्धारित परिस्थितियों में गिरफ्तारी की शक्ति प्रदान करती है।इस प्रावधान के तहत गिरफ्तारी के लिए कानून में तय शर्तों और प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक होता है।मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में जांच एजेंसी को कथित अपराध से प्राप्त आय और उससे जुड़ी गतिविधियों की जांच करनी होती है।गिरफ्तारी के बाद आरोपी को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार सक्षम अदालत के समक्ष पेश किया जाता है।हरचरण सिंह भुल्लर को भी गिरफ्तारी के बाद चंडीगढ़ की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें आठ दिन की हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया।
रोपड़ रेंज के तत्कालीन डीआईजी रहे हैं भुल्लर
हरचरण सिंह भुल्लर पंजाब पुलिस के रोपड़ रेंज में डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल के पद पर कार्यरत रहे हैं।डीआईजी पुलिस विभाग का वरिष्ठ पद होता है और इस स्तर के अधिकारी को निर्धारित क्षेत्र में पुलिस प्रशासन से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं।ईडी की प्रेस विज्ञप्ति में भुल्लर का उल्लेख रोपड़ रेंज के तत्कालीन डीआईजी के रूप में किया गया है।उनके खिलाफ कार्रवाई भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित जांच के तहत हुई है।इस मामले में उनकी पूर्व प्रशासनिक भूमिका और कथित वित्तीय गतिविधियों से संबंधित तथ्यों की जांच एजेंसी पड़ताल कर रही है।हालांकि, उपलब्ध जानकारी में भुल्लर की वर्तमान विभागीय स्थिति या उनके खिलाफ किसी अलग विभागीय कार्रवाई का विवरण नहीं दिया गया है।
जांच में आगे क्या हो सकता है?
हरचरण सिंह भुल्लर की आठ दिन की ईडी कस्टडी के दौरान जांच एजेंसी उनसे मामले से जुड़े वित्तीय पहलुओं पर पूछताछ कर सकती है।जांच में कथित संपत्ति, धन के स्रोत और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हो सकते हैं।कृशानू शारदा की पहले हुई गिरफ्तारी के कारण मामले में कथित बिचौलिए की भूमिका भी जांच का हिस्सा है।हालांकि, ईडी की उपलब्ध जानकारी में किसी नई गिरफ्तारी, अतिरिक्त छापेमारी या संपत्ति जब्त किए जाने की घोषणा नहीं की गई है।ऐसे में आगे की कार्रवाई को लेकर किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
अदालत की अगली कार्यवाही पर नजर
हरचरण सिंह भुल्लर की गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसी की पूछताछ और विशेष अदालत की आगामी कार्यवाही पर नजर रहेगी।ईडी ने स्पष्ट किया है कि गिरफ्तारी भ्रष्टाचार और आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत की गई है।इससे पहले कृशानू शारदा की गिरफ्तारी के बाद भुल्लर के खिलाफ हुई कार्रवाई इस मामले का एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।फिलहाल दोनों व्यक्तियों के खिलाफ लगाए गए आरोप न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं। अदालत के अंतिम निर्णय से पहले उन्हें दोषी नहीं माना जा सकता।