लुधियाना पुलिस कमिश्नरेट में तैनात 34 वर्षीय असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) डॉ. रमनदीप सिंह ने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (लोक प्रशासन) में PhD पूरी कर ली है। DCP (मुख्यालय) के साथ रीडर के पद पर तैनात सिंह ने तीन साल में अपनी डॉक्टरेट पूरी की। उनका शोध पुलिस व्यवस्था के विकास और अपराध रोकने तथा जांच-पड़ताल में तकनीक की बढ़ती भूमिका पर केंद्रित था।
सिंह 2012 में कॉन्स्टेबल के तौर पर पुलिस बल में शामिल हुए थे। 2017 में विभागीय परीक्षा पास करने के बाद उन्हें हेड कॉन्स्टेबल के पद पर प्रमोट किया गया। इसके बाद, 2023 में उन्हें ASI के पद पर पदोन्नति मिली। साइंस (नॉन-मेडिकल) बैकग्राउंड वाले सिंह ने पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ से पॉलिटिकल साइंस (राजनीति विज्ञान) में MA भी किया है। उन्होंने बताया कि PhD करना उनके स्कूली दिनों से ही एक सपना था।
उन्होंने फगवाड़ा की एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी में पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में डॉक्टरेट के लिए दाखिला लिया और अपने शोध का विषय 'पुलिस व्यवस्था' (पुलिसिंग) को चुना। उन्होंने बताया, "एक बार मैंने अपने स्कूल के शिक्षक से पूछा था कि क्या पढ़ाई कभी खत्म होती है, या कोई व्यक्ति जीवन भर पढ़ता रह सकता है? मेरे शिक्षक ने जवाब दिया कि PhD करने के बाद किसी की औपचारिक शिक्षा पूरी मानी जा सकती है। उनकी ये बातें मेरे मन में बस गईं, और अब मुझे लगता है कि मैंने अपनी शिक्षा पूरी कर ली है।"
सिंह ने कहा कि उनके शोध ने उन्हें पुलिस विभाग के कामकाज को गहराई से समझने और यह जानने का मौका दिया कि पिछले कुछ वर्षों में पुलिस व्यवस्था किस तरह विकसित हुई है। उनके शोध में कई पहलू शामिल थे, जैसे पंजाब पुलिस का इतिहास, पुलिस सुधार, पुलिस व्यवस्था में बदलाव और तकनीकी प्रगति की आवश्यकता, अपराध का विश्लेषण, जांच और अपराध का पता लगाने के तरीके, ऑनलाइन धोखाधड़ी, और अपराधियों द्वारा कानून से बचने के लिए तकनीक का इस्तेमाल।
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