मानसा। पंजाब के मानसा जिले में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। गुरुवार को गिरफ्तार चारों आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। इस बीच हत्याकांड की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपने हाथ में ले ली है। अब सीबीआई जरूरत पड़ने पर आरोपियों को प्रोडक्शन वारंट के जरिए हिरासत में लेकर पूछताछ कर सकती है।मानसा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वैभव चौधरी ने बताया कि पुलिस ने अदालत के निर्देशों के अनुसार चारों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। हत्याकांड से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और अन्य साक्ष्य सीबीआई को उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
चारों आरोपियों को अदालत ने भेजा जेल
पुलिस के अनुसार, अदालत में पेश किए गए चार आरोपियों में अश्विनी कुमार, नीलम रानी, दीपन गर्ग और लाडी शामिल हैं। हालांकि कुछ अन्य रिपोर्टों में चौथे आरोपी के अतिरिक्त एक आरोपी का नाम विपिन बताया गया है।अदालत ने चारों आरोपियों को 5 नवंबर 2026 तक न्यायिक हिरासत में रखने का आदेश दिया है। पुलिस ने सुरक्षा और अन्य कारणों से उनकी पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कराई।एसएसपी वैभव चौधरी ने बताया कि अब सीबीआई प्रोडक्शन वारंट के माध्यम से आरोपियों को अपनी हिरासत में लेने के लिए अदालत से अनुमति मांग सकती है।
13 अक्टूबर को हुई थी परविंदर सिंह झोटा की हत्या
परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्टूबर को मानसा में एक मेडिकल स्टोर के अंदर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। झोटा लंबे समय से नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री के खिलाफ आवाज उठा रहे थे।घटना के समय वह सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारण कर रहे थे। बताया गया कि वह मेडिकल स्टोर में कथित रूप से नशीली दवाओं की बिक्री को लेकर सवाल कर रहे थे। इसी दौरान विवाद हुआ और उन्हें गोली मार दी गई।हत्या के बाद पूरे पंजाब में आक्रोश फैल गया था। विभिन्न सामाजिक संगठनों, किसान संगठनों और राजनीतिक दलों ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई तथा निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
राजस्थान से गिरफ्तार हुआ था मुख्य आरोपी
हत्याकांड के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी अश्विनी कुमार की तलाश शुरू की थी। पुलिस के अनुसार, घटना के बाद वह अपना मोबाइल फोन बंद करके फरार हो गया था।तकनीकी जांच और अन्य सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने उसे राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया था।इसके अलावा पुलिस ने उसकी पत्नी नीलम रानी और अन्य संदिग्ध सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया। शुरुआती जांच में सामने आया था कि जिस मेडिकल स्टोर में वारदात हुई, उसका फार्मेसी लाइसेंस नीलम रानी के नाम पर था।
CBI ने अपने हाथ में ली हत्याकांड की जांच
परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है। केंद्रीय एजेंसी ने 21 अक्टूबर को चंडीगढ़ इकाई में मामला दोबारा दर्ज किया।सीबीआई की जांच का नेतृत्व डीआईजी स्तर के अधिकारी डॉ. नवदीप सिंह बराड़ कर रहे हैं, जबकि इंस्पेक्टर बलविंदर सिंह को जांच अधिकारी बनाया गया है।जांच एजेंसी ने हत्या, हत्या के प्रयास, आपराधिक साजिश और शस्त्र अधिनियम से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। सीबीआई घटनास्थल, मेडिकल स्टोर और वारदात से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच करेगी।
पुलिस अधिकारियों पर भी हुई कार्रवाई
हत्याकांड के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों के बीच मानसा के सिटी-2 थाने की प्रभारी बेअंत कौर को निलंबित किया गया था।इसके अलावा मामले में प्रशासनिक स्तर पर अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, मानसा के डीएसपी हरजिंदर गिल और ड्रग इंस्पेक्टर नीरज को भी निलंबित किया गया है।
परिवार ने की निष्पक्ष जांच की मांग
परविंदर सिंह झोटा के परिवार ने शुरुआत से ही मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की थी। परिजनों का आरोप था कि झोटा नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ लगातार अभियान चला रहे थे और इसी कारण उनकी हत्या की गई।परिवार ने वारदात से जुड़े सभी लोगों की भूमिका सामने लाने और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।अब चारों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद सीबीआई की जांच पर सबकी नजरें टिकी हैं। जांच एजेंसी के सामने हत्या के पीछे की परिस्थितियों, संभावित आपराधिक साजिश और अन्य व्यक्तियों की भूमिका का पता लगाने की चुनौती है।
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