Chandigarh चंडीगढ़ की एक स्पेशल CBI कोर्ट ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के OSD (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) राजबीर सिंह घुमन की अर्जी खारिज कर दी है। राजबीर ने भ्रष्टाचार के मामले में अपने और दूसरों के खिलाफ दर्ज FIR के कथित तौर पर लीक होने को लेकर पूरी CBI टीम के खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई की मांग की थी। अपनी अर्जी में राजबीर ने दावा किया कि CBI ने FIR को ऑनलाइन अपलोड करने से छूट का कोर्ट ऑर्डर तो ले लिया था, लेकिन फिर भी यह डॉक्यूमेंट मीडिया और जनता को उपलब्ध करा दिया गया, ताकि उनकी छवि खराब की जा सके। उनके वकील ने मामले की जांच कर रही CBI टीम के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग की थी।
अर्जी का विरोध करते हुए CBI के पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नरेंद्र सिंह ने कहा कि जांच अधिकारी ने 6 अक्टूबर को दोपहर करीब 2.25 बजे कोर्ट के सामने FIR पेश की थी। साथ ही, उन्होंने जांच के उस चरण में इसे CBI की वेबसाइट पर अपलोड करने से छूट की मांग वाली अर्जी भी दी थी। अर्जी में कहा गया था कि आरोपियों की पहचान और जानकारी उजागर करने से सबूतों के साथ छेड़छाड़ हो सकती है और सही व असरदार जांच पर बुरा असर पड़ सकता है।
जांच अधिकारी ने 6 अक्टूबर को BNSS की धारा 96 के तहत सर्च वारंट के लिए एक अलग अर्जी भी दायर की थी। CBI ने तर्क दिया कि चूंकि अभी तलाशी ली जानी बाकी थी, इसलिए FIR का खुलासा होने से आरोपी सतर्क हो सकते थे और सबूतों के साथ छेड़छाड़ या उन्हें नष्ट कर सकते थे। कोर्ट ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और सबूतों की पवित्रता बनाए रखने के लिए उस चरण में FIR अपलोड करने से छूट दे दी थी। सर्च वारंट जारी होने के बाद, CBI टीमों ने 6 अक्टूबर को 11 जगहों पर तलाशी ली।
एजेंसी ने बताया कि तलाशी पूरी होने के बाद 7 अक्टूबर को FIR अपलोड की गई थी। उसने कहा कि यह कार्रवाई "यूथ बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया बनाम भारत संघ" मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की भावना के अनुरूप थी।