Chandigarh गोवा में खनन मंत्रियों के एक सम्मेलन में, खनन और भूविज्ञान मंत्री वरिंदर कुमार गोयल ने बताया कि तकनीक-आधारित सुधारों और पारदर्शी प्रशासन के जरिए पंजाब का सालाना खनन राजस्व लगभग सात गुना बढ़ गया है - जो 2017-18 में 123.5 करोड़ रुपये था, वह 2025-26 में बढ़कर 799 करोड़ रुपये हो गया है। केंद्रीय कोयला और खान मंत्री किशन रेड्डी की अध्यक्षता में आयोजित 'खान और कोयला क्षेत्र में सुधार' विषयक सम्मेलन में, गोयल ने पंजाब से जुड़ी खनन संबंधी चिंताओं और नीतिगत मांगों को रखा। केंद्रीय मंत्री ने राज्य को सहयोग का आश्वासन दिया और SASCI फ्रेमवर्क के संबंध में राज्य के सुझावों पर विचार करने पर सहमति जताई।
राज्य की पहलों का जिक्र करते हुए, गोयल ने बताया कि वैज्ञानिक खनन प्रबंधन को मजबूत करने के लिए मार्च 2025 में हुए एक समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत IIT-रोपड़ में एक 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' स्थापित किया गया है। नदियों में संसाधनों की पुनःपूर्ति (river replenishment) के अध्ययन के लिए DGPS, ड्रोन मैपिंग और बाथीमेट्रिक सर्वे कराए जा रहे हैं। इन प्रयासों के जरिए खनन के लिए 268 संभावित स्थलों की पहचान की गई है, जबकि राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (State Environment Impact Assessment Authority) ने 13 जिला सर्वेक्षण रिपोर्टों (District Survey Reports) को मंजूरी दे दी है।
उन्होंने बताया कि 'खनन प्रबंधन प्रणाली' (Mining Management System) पोर्टल पूरे खनन क्षेत्र में गतिविधियों की निगरानी (traceability) सुनिश्चित करता है। इसके तहत 447 सत्यापित क्रशरों को स्मार्ट पावर मीटरों के साथ-साथ 'वाहन' (VAHAN), सरकारी खजाना (Treasury) और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसे विभिन्न नेटवर्कों और प्लेटफॉर्मों से जोड़ा गया है।
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