जयपुर। डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म 'इन्वेंटिवा' (Inventiva) के प्रकाशक नितिन नरेश की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं। राजस्थान पुलिस ने उनके खिलाफ जबरन वसूली, आपराधिक धमकी और आपराधिक साजिश के आरोपों में प्राथमिकी दर्ज की है। इस मामले में नाइन नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड और कुछ अन्य अज्ञात व्यक्तियों को भी नामजद किया गया है। यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय निवेश संगठन टेरा इन्वेस्ट (Terra Invest) के एक प्रतिनिधि की शिकायत के आधार पर की गई है।उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जयपुर के शास्त्री नगर पुलिस थाने में 14 सितंबर 2026 को एफआईआर संख्या 0267/2026 दर्ज की गई थी। मामले में पुलिस ने जांच अधिकारी नियुक्त कर आरोपों की पड़ताल शुरू कर दी है। हालांकि, एफआईआर की मूल प्रति का स्वतंत्र सत्यापन नहीं हो सका है।
भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं में मामला दर्ज
शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 308(2), 308(3), 351(2), 61(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है। इन धाराओं में जबरन वसूली, आपराधिक धमकी, आपराधिक साजिश और सामूहिक आपराधिक दायित्व से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।शिकायतकर्ता का आरोप है कि नितिन नरेश और अन्य संबंधित व्यक्तियों की ओर से कथित तौर पर धमकी भरे ईमेल भेजे गए थे। इन ईमेल के माध्यम से दबाव बनाने और जबरन वसूली करने का प्रयास किए जाने का आरोप लगाया गया है।पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता की जांच कर रही है। मामले में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
टेरा इन्वेस्ट के प्रतिनिधि ने लगाए आरोप
टेरा इन्वेस्ट से जुड़े प्रतिनिधि ने शिकायत में आरोप लगाया है कि उन्हें कथित तौर पर ऐसे ईमेल प्राप्त हुए, जिनके माध्यम से धमकाने और दबाव बनाने की कोशिश की गई।शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित गतिविधियां किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकती हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।इस मामले में एफआईआर दर्ज होने का मतलब है कि शिकायत औपचारिक आपराधिक जांच के दायरे में आ गई है। एफआईआर दर्ज होना अपने आप में किसी आरोपी के दोषी होने का प्रमाण नहीं है।
पहले से चल रहे हैं कानूनी विवाद
नितिन नरेश और इन्वेंटिवा से जुड़े विवाद पहले भी अदालतों तक पहुंच चुके हैं। टेरा इन्वेस्ट के संस्थापक साझेदारों अंकिति बोस और कृष्ण रतन ने अलग-अलग मामलों में कानूनी राहत हासिल की थी।दिल्ली हाईकोर्ट ने 24 अगस्त 2026 को अंकिति बोस से संबंधित मामले में कुछ विवादित लेखों के सोशल मीडिया पर प्रसार को लेकर अंतरिम प्रतिबंध लगाया था। इसी तरह 14 सितंबर 2026 को कृष्ण रतन से जुड़े मामले में भी अदालत ने मानहानिकारक आरोपों वाले नए लेख प्रकाशित करने पर अंतरिम रोक लगाई थी।ये अदालत के अंतरिम आदेश थे और इन्हें संबंधित आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।
पुलिस जांच में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की होगी अहम भूमिका
इस प्रकरण में कथित धमकी भरे ईमेल और उनसे जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड जांच के महत्वपूर्ण पहलू हो सकते हैं। पुलिस ईमेल के स्रोत, संदेशों की सामग्री और शिकायत में नामित व्यक्तियों की कथित भूमिका की पड़ताल कर सकती है।इसके अलावा, जांच के दौरान संबंधित पक्षों के बयान भी महत्वपूर्ण होंगे। शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों और आरोपियों के जवाब का मूल्यांकन उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।
जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें
नितिन नरेश के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला अब कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा। दूसरी ओर, प्रकाशन और मानहानि से संबंधित विवाद अलग न्यायिक कार्यवाहियों का विषय बने हुए हैं।मामले में आरोपियों को अपना पक्ष रखने और कानूनी बचाव प्रस्तुत करने का अधिकार है। फिलहाल जबरन वसूली, धमकी और साजिश के आरोप जांच के अधीन हैं। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही इन आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।