चेन्नई। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित ‘हैशपे’ (Hashpe) क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है। एजेंसी के मुताबिक यह कार्रवाई करीब 146 करोड़ रुपये से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत की गई है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान सैयद उस्मान उर्फ बाबू और दामोधरन बालचंद्रन के रूप में हुई है।ED के चेन्नई जोनल ऑफिस-II ने दोनों आरोपियों को 22 सितंबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया। इसके बाद दोनों को PMLA की विशेष अदालत के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने दोनों आरोपियों को तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। मामले में प्रवर्तन निदेशालय की जांच जारी है।
ED के अनुसार, इस मनी लॉन्ड्रिंग जांच की शुरुआत पुडुचेरी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन की ओर से दर्ज एक FIR के आधार पर की गई थी। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। इसी FIR में सामने आए आरोपों के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच शुरू की।जांच एजेंसी का फोकस कथित तौर पर निवेशकों से जुटाई गई रकम और उसके बाद हुए वित्तीय लेन-देन की जांच पर है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि निवेश के नाम पर प्राप्त धन कहां-कहां भेजा गया और कथित अपराध से अर्जित रकम का इस्तेमाल किस तरह किया गया। मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत बैंक खातों, डिजिटल लेन-देन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल की जा सकती है।
मामला ‘हैशपे’ नाम से जुड़ी कथित क्रिप्टोकरेंसी निवेश गतिविधियों से संबंधित है। आरोप है कि लोगों को क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े निवेश के जरिए आकर्षक रिटर्न का भरोसा देकर रकम जुटाई गई। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया और जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।ED ने इस मामले में सैयद उस्मान और दामोधरन बालचंद्रन की कथित भूमिका की जांच के बाद उन्हें गिरफ्तार किया। PMLA की धारा 19 प्रवर्तन निदेशालय के अधिकृत अधिकारियों को निर्धारित कानूनी शर्तें पूरी होने पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने की शक्ति देती है। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को संबंधित विशेष अदालत के सामने पेश किया जाता है।
दोनों आरोपियों को अदालत की ओर से तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद जांच एजेंसी अब मामले से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य संभावित कड़ियों की पड़ताल आगे बढ़ा रही है। यह भी जांच का विषय है कि कथित धोखाधड़ी में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा रकम के लेन-देन में किन खातों या माध्यमों का इस्तेमाल किया गया।क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े वित्तीय अपराधों की जांच पारंपरिक आर्थिक अपराधों की तुलना में कई स्तरों पर जटिल हो सकती है। डिजिटल वॉलेट, अलग-अलग क्रिप्टो प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन लेन-देन के कारण जांच एजेंसियों को तकनीकी और वित्तीय दोनों तरह के रिकॉर्ड की जांच करनी पड़ती है। किसी मामले में रकम को कई खातों या डिजिटल माध्यमों से स्थानांतरित किए जाने के आरोप हों तो धन के वास्तविक प्रवाह का पता लगाना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है।
इस मामले में मूल FIR पुडुचेरी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने दर्ज की थी। साइबर अपराध से जुड़े मामलों में पुलिस आमतौर पर शिकायतकर्ताओं के बयान, ऑनलाइन लेन-देन, बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल कम्युनिकेशन और संबंधित तकनीकी साक्ष्यों की जांच करती है। वहीं अपराध से प्राप्त कथित रकम के धन शोधन का पहलू सामने आने पर ED PMLA के तहत अलग जांच कर सकती है।एजेंसी की जांच में यह भी देखा जाएगा कि कथित रूप से जुटाई गई रकम का अंतिम लाभ किसे मिला और क्या इस धन को किसी अन्य संपत्ति या निवेश में परिवर्तित किया गया। मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में अपराध से अर्जित संपत्ति की पहचान और उसके वित्तीय रास्ते का पता लगाना जांच का अहम हिस्सा होता है।
क्रिप्टोकरेंसी में निवेश को लेकर वित्तीय और साइबर सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर लोगों को सावधानी बरतने की सलाह देती रही हैं। निवेशकों को किसी भी डिजिटल निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले संबंधित प्लेटफॉर्म, कंपनी और उसके दावों की जांच करनी चाहिए। बहुत कम समय में असामान्य रूप से अधिक रिटर्न का दावा करने वाली योजनाओं में विशेष सतर्कता जरूरी होती है।फिलहाल कथित Hashpe क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी मामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ED की जांच आगे बढ़ रही है। करीब 146 करोड़ रुपये से जुड़े इस मामले में एजेंसी धन के स्रोत, लेन-देन और कथित लाभार्थियों से संबंधित पहलुओं की पड़ताल कर रही है। मामले में लगाए गए आरोप अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं और आरोपियों की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण अदालत करेगी।
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