चेन्नई: सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स (CBIC) के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी ने फील्ड अधिकारियों से कहा है कि वे GST लागू करने और अनुपालन नियमों में किए गए सबसे बड़े बदलावों को सुचारू रूप से लागू करें। इन बदलावों में गिरफ्तारी की शक्तियों को खत्म करना, रिफंड प्रक्रिया में तेजी लाना और छोटी रकम वाले नोटिसों पर रोक लगाना शामिल है।

सोमवार को चेन्नई में व्यापारियों और CBIC अधिकारियों के साथ बैठक के बाद, उन्होंने अधिकारियों से कहा कि व्यापार को आसान बनाने के चक्कर में सरकारी राजस्व का नुकसान नहीं होना चाहिए। ये बदलाव 8 अक्टूबर को नई दिल्ली में हुई 57वीं GST काउंसिल की बैठक के नतीजों पर आधारित हैं। काउंसिल ने CGST एक्ट की उस धारा को हटाने की सिफारिश की है, जो अधिकारियों को गिरफ्तारी करने का अधिकार देती है।

इसके अलावा, मुकदमा चलाने के लिए सीमा (थ्रेशोल्ड) को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने, अधिकतम सामान्य जुर्माने को 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये करने और 10,000 रुपये से कम टैक्स वाले मामलों में 'शो-कॉज नोटिस' (कारण बताओ नोटिस) जारी करने पर रोक लगाने का प्रस्ताव भी दिया गया है।

साथ ही, कैश-लेजर में मौजूद अतिरिक्त बैलेंस का रिफंड अब अपने आप (ऑटोमैटिक तरीके से) मंजूर हो जाएगा। निर्यातकों और 'इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर' (जहाँ कच्चे माल पर टैक्स, तैयार माल पर लगने वाले टैक्स से अधिक होता है) से प्रभावित व्यवसायों के लिए, सिस्टम उनके क्लेम का 90% हिस्सा अस्थायी तौर पर जारी कर देगा। एकनॉलेजमेंट (पावती) या 'डेफिशिएंसी मेमो' (कमियों के बारे में सूचना) जारी करने का समय 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दिया जाएगा।

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