कोनियाम्मन मंदिर में गबन का मामला, 8 कर्मचारी निलंबित

Update: 2026-07-26 09:17 GMT

कोयंबटूर :  तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित प्रसिद्ध अरुलमिगु कोनियाम्मन मंदिर में हुंडी की राशि में कथित गबन के मामले में राज्य सरकार ने सख्त कार्रवाई की है। मंदिर प्रशासन में तैनात आठ अधिकारियों और कर्मचारियों को रविवार को निलंबित कर दिया गया। आरोप है कि मंदिर की हुंडी में जमा राशि में करीब 31,000 रुपये का गबन किया गया। मामले में सीधे तौर पर शामिल चार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, जबकि प्रशासनिक लापरवाही के आरोप में चार सुपरवाइजरों को भी निलंबित किया गया है।

यह कार्रवाई हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग के आदेश के बाद की गई। विभाग ने मंदिर की वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने और धार्मिक संस्थानों में किसी भी तरह की अनियमितता को रोकने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है।

जानकारी के अनुसार, अरुलमिगु कोनियाम्मन मंदिर कोयंबटूर के प्रमुख और प्राचीन मंदिरों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और मंदिर की हुंडी में भक्तों द्वारा दान राशि जमा की जाती है। मंदिर की आय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा इसी हुंडी से प्राप्त होता है, जिसका उपयोग मंदिर के रखरखाव, धार्मिक गतिविधियों और अन्य सेवाओं के लिए किया जाता है।

मामले में जांच के दौरान हुंडी राशि के हिसाब-किताब में अंतर सामने आया। इसके बाद अधिकारियों ने जांच शुरू की, जिसमें कथित रूप से 31,000 रुपये की राशि के गबन का मामला सामने आया। जांच में चार कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई, जिन पर सीधे तौर पर राशि के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है।

इसके अलावा, मंदिर प्रशासन की निगरानी व्यवस्था में लापरवाही बरतने के आरोप में चार सुपरवाइजरों पर भी कार्रवाई की गई है। अधिकारियों का कहना है कि केवल प्रत्यक्ष रूप से शामिल कर्मचारियों के खिलाफ ही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी निभाने में विफल रहने वाले पर्यवेक्षकों पर भी कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

HR&CE विभाग ने स्पष्ट किया है कि मंदिरों की संपत्ति और आय की सुरक्षा सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। धार्मिक संस्थानों में आने वाली दान राशि का सही उपयोग सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर जांच और ऑडिट की व्यवस्था की जाती है। किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मंदिर प्रशासन से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि हुंडी की राशि की गिनती और रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार की जाती है। इसमें कई स्तरों पर निगरानी की व्यवस्था होती है। इसके बावजूद यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी होती है तो जिम्मेदार लोगों की पहचान कर कार्रवाई की जाती है।

इस घटना के बाद मंदिर प्रशासन में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि वे वित्तीय लेनदेन और रिकॉर्ड प्रबंधन में पूरी सावधानी बरतें। साथ ही निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने पर भी विचार किया जा रहा है।

धार्मिक संस्थानों में दान राशि से जुड़े मामलों को लेकर सरकार पहले भी कई बार सख्ती दिखा चुकी है। मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा दी गई राशि और संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर पारदर्शी व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया जाता रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मंदिरों में आने वाली दान राशि केवल आर्थिक संसाधन नहीं होती, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी होती है। ऐसे में इसमें किसी भी प्रकार की अनियमितता गंभीर मामला माना जाता है। इसलिए प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करना आवश्यक है।

निलंबन की कार्रवाई के बाद अब आगे की जांच जारी रहने की संभावना है। विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि गबन की घटना किस तरह हुई और इसमें अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका तो नहीं रही। यदि जांच में और लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

तमिलनाडु सरकार और HR&CE विभाग ने संकेत दिया है कि मंदिरों की व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए भविष्य में भी सख्त कदम उठाए जाएंगे। कोयंबटूर के कोनियाम्मन मंदिर में हुई यह कार्रवाई इसी दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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