चेन्नई। तमिलनाडु सरकार ने राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और राजस्व बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। पूर्व केंद्रीय योजना आयोग के अध्यक्ष और जाने-माने अर्थशास्त्री मोंटेक सिंह अहलूवालिया की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय समिति ने गुरुवार को चेन्नई सचिवालय में मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन से मुलाकात की। बैठक में राज्य के टैक्स और नॉन-टैक्स राजस्व को बढ़ाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।
राज्य सरकार ने इस समिति का गठन तमिलनाडु के वित्तीय संसाधनों को मजबूत करने के उद्देश्य से किया है। समिति को राज्य के मौजूदा राजस्व स्रोतों का अध्ययन करने, नए स्रोत तलाशने और आय बढ़ाने के लिए ठोस सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई है। बैठक के दौरान समिति के सदस्यों ने मुख्यमंत्री स्टालिन के साथ राज्य की आर्थिक चुनौतियों और संभावित समाधान पर विचार-विमर्श किया।
समिति का मुख्य उद्देश्य तमिलनाडु सरकार के अपने टैक्स राजस्व में वृद्धि करना है। इसके अलावा नॉन-टैक्स राजस्व बढ़ाने, नए आय स्रोत विकसित करने और सरकारी उपक्रमों के माध्यम से अतिरिक्त राजस्व जुटाने के तरीकों का अध्ययन भी किया जाएगा। समिति अपनी रिपोर्ट में सरकार को नीतिगत सुझाव देगी, जिनके आधार पर राज्य की वित्तीय स्थिति को और बेहतर बनाया जा सकेगा।
इस छह सदस्यीय समिति में मोंटेक सिंह अहलूवालिया के अलावा कई आर्थिक और कर विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। समिति में अर्थशास्त्री के.पी. कृष्णन, टैक्स नीति विशेषज्ञ अरविंद मोदी, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के पूर्व अध्यक्ष नजीब शाह, तमिलनाडु सरकार के वित्त सचिव एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव एम.ए. सिद्दीकी और चेन्नई इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज के निदेशक डॉ. एम. सुरेश बाबू सदस्य हैं।
सरकार का मानना है कि तेजी से बढ़ते विकास कार्यों, कल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचे पर बढ़ते खर्च के बीच राजस्व में वृद्धि बेहद जरूरी है। राज्य सरकार को अपनी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए अधिक वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता है। ऐसे में समिति की सिफारिशें तमिलनाडु की आर्थिक नीति को नई दिशा दे सकती हैं।
समिति ने आम जनता और विशेषज्ञों से भी सुझाव मांगे हैं। सरकार चाहती है कि राजस्व बढ़ाने के लिए केवल प्रशासनिक स्तर पर ही नहीं बल्कि आम लोगों, उद्योगों और आर्थिक विशेषज्ञों की राय को भी शामिल किया जाए। जनता से मिले सुझावों के आधार पर समिति अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी।
राज्य के टैक्स राजस्व में मुख्य रूप से वस्तु एवं सेवा कर (GST), स्टांप ड्यूटी, पंजीकरण शुल्क, शराब से मिलने वाला राजस्व और अन्य कर शामिल हैं। वहीं नॉन-टैक्स राजस्व में सरकारी सेवाओं से मिलने वाली आय, शुल्क, जुर्माना और सार्वजनिक उपक्रमों से होने वाली कमाई शामिल होती है। समिति इन सभी क्षेत्रों की समीक्षा करेगी और सुधार के उपाय सुझाएगी।
तमिलनाडु देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में शामिल है। ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में राज्य की मजबूत स्थिति है। सरकार का प्रयास है कि आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ-साथ राज्य के राजस्व में भी लगातार बढ़ोतरी हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्व बढ़ाने के लिए केवल नए कर लगाने के बजाय मौजूदा कर व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना, टैक्स चोरी रोकना, डिजिटल निगरानी बढ़ाना और सरकारी संपत्तियों का बेहतर उपयोग करना जरूरी है। समिति इन सभी पहलुओं का अध्ययन कर सकती है।
मोंटेक सिंह अहलूवालिया लंबे समय से भारत की आर्थिक नीतियों से जुड़े रहे हैं। उनके अनुभव को देखते हुए तमिलनाडु सरकार को उम्मीद है कि समिति राज्य की वित्तीय मजबूती के लिए व्यावहारिक और दीर्घकालिक सुझाव देगी।
मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के साथ हुई बैठक के बाद अब समिति अपने अध्ययन को आगे बढ़ाएगी। आने वाले समय में समिति राज्य के विभिन्न विभागों, आर्थिक विशेषज्ञों और हितधारकों से बातचीत कर अपनी सिफारिशें तैयार करेगी। सरकार को उम्मीद है कि इन सुझावों के जरिए तमिलनाडु अपने राजस्व आधार को मजबूत कर विकास योजनाओं को और गति दे सकेगा।