हैदराबाद: वरिष्ठ भाजपा नेता गुडुर नारायण रेड्डी ने मांग की है कि कांग्रेस सरकार राज्य भर में कानूनी विवादों में फंसी सभी सरकारी और सार्वजनिक जमीनों पर एक विस्तृत 'श्वेत पत्र' (white paper) जारी करे।

नारायण रेड्डी ने कहा कि मियापुर में लगभग 550 एकड़ की बेशकीमती जमीन पर राज्य सरकार के मालिकाना हक को बरकरार रखने वाले सुप्रीम कोर्ट के 29 अक्टूबर के फैसले ने यह उजागर कर दिया है कि कितनी बड़ी मात्रा में सार्वजनिक संपत्ति लंबे समय से कानूनी लड़ाई में फंसी हुई है। उन्होंने कहा कि इस फैसले के बाद तेलंगाना भर में इसी तरह के अन्य विवादों की व्यापक समीक्षा की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा, "मियापुर का मामला सार्वजनिक जमीन की भारी कीमत और दशकों तक चलने वाले कानूनी विवादों के नतीजों को दिखाता है। अगर सिर्फ एक विवाद में हजारों करोड़ रुपये की जमीन शामिल है, तो जनता को यह जानने का पूरा हक है कि और कितनी सरकारी संपत्ति अदालती मामलों में फंसी हुई है और उन्हें सुलझाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।"

नारायण रेड्डी ने कहा कि मियापुर कोई इकलौता मामला नहीं है। हैदराबाद जिला कलेक्टर की हालिया समीक्षा का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि जिले में कुल 21.74 लाख वर्ग गज सरकारी जमीन है, जिसमें से लगभग 12 लाख वर्ग गज जमीन 238 अदालती मामलों में फंसी हुई है। इसका मतलब यह है कि उपलब्ध सरकारी जमीन का आधे से अधिक हिस्सा कानूनी विवादों में है, जिसमें शेखपेट मंडल में सबसे ज्यादा, यानी करीब 50 विवाद हैं।

उन्होंने आगे बताया कि राजस्व विभाग से जुड़े मामलों और धारा 22-A के तहत प्रतिबंधित संपत्तियों की सूची से संबंधित लगभग 7,000 मामले मुख्य रूप से हाई कोर्ट में लंबित हैं। वहीं, वक्फ बोर्ड से जुड़े करीब 5,500 विवाद विभिन्न अदालती मंचों पर चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांचा गाचीबोवली, कुकटपल्ली और मंचिरेवुला में भी बेशकीमती जमीनों को लेकर विवाद चल रहे हैं।

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