हैदराबाद : 29 अक्टूबर 2026। तेलंगाना की राजनीति में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भारत राष्ट्र समिति (BRS) के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व मंत्री केटी रामाराव (KTR) ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए जनता से उसे राजनीतिक तौर पर 'छुट्टी' देने की अपील की है। केटीआर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार चुनाव से पहले किए गए वादों को पूरा करने में विफल रही है और किसानों को अपनी फसल बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने राज्य में सिंचाई, बिजली आपूर्ति और कृषि क्षेत्र की समस्याओं को लेकर सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए।केटीआर ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए कांग्रेस सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने दावा किया कि चुनाव से पहले किसानों के कल्याण के बड़े-बड़े वादे करने वाली कांग्रेस अब उन्हें अपनी फसल बचाने की जिम्मेदारी खुद उठाने के लिए मजबूर कर रही है। बीआरएस नेता ने कहा कि जिस सरकार की नीतियों से किसान परेशान हैं, उसे जनता को सत्ता से बाहर करने का अवसर मिलना चाहिए।
किसानों की समस्याओं पर कांग्रेस सरकार को घेरा
केटीआर ने आरोप लगाया कि तेलंगाना में किसानों को पर्याप्त सिंचाई सुविधा और निर्बाध बिजली आपूर्ति नहीं मिल रही है। इसके कारण कई किसानों को अपनी फसल बचाने के लिए निजी डीजल जनरेटर और पानी के टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।उन्होंने कहा कि किसानों को खेती के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद किसानों को अपनी जेब से अतिरिक्त पैसा खर्च करना पड़ रहा है।केटीआर के अनुसार, किसानों के लिए यह स्थिति आर्थिक रूप से बेहद कठिन है। खेती की लागत पहले ही बढ़ चुकी है और अब सिंचाई के लिए अतिरिक्त खर्च करने से किसानों पर आर्थिक दबाव और बढ़ रहा है।हालांकि, किसानों द्वारा निजी जनरेटर और टैंकर इस्तेमाल किए जाने के संबंध में केटीआर के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
रायथु डिक्लेरेशन' से 'सेल्फ डिक्लेरेशन' तक
केटीआर ने कांग्रेस के चुनाव पूर्व 'रायथु डिक्लेरेशन' का जिक्र करते हुए सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया।उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने, कृषि क्षेत्र को मजबूत करने और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के अनेक वादे किए थे।लेकिन अब स्थिति ऐसी बन गई है कि किसानों से कथित तौर पर अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए स्वयं जिम्मेदारी लेने संबंधी घोषणाएं कराई जा रही हैं।केटीआर ने इसे कांग्रेस के चुनावी वादों और वर्तमान कृषि परिस्थितियों के बीच बड़ा अंतर बताया।उन्होंने कहा कि किसानों को राहत देने के बजाय सरकार अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रही है।
'क्रॉप हॉलिडे' के मुद्दे पर तीखा कटाक्ष
बीआरएस नेता ने कांग्रेस सरकार पर हमला बोलते हुए 'क्रॉप हॉलिडे' का मुद्दा भी उठाया।केटीआर ने कहा कि किसानों को ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें खेती जारी रखना मुश्किल होता जा रहा है।उन्होंने कांग्रेस सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि जो सरकार किसानों को पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पा रही, उसे जनता को ही राजनीतिक छुट्टी दे देनी चाहिए।उनका यह बयान राज्य में कृषि संकट को लेकर विपक्ष की ओर से सरकार पर बढ़ाए जा रहे दबाव के रूप में देखा जा रहा है।हालांकि, 'क्रॉप हॉलिडे' को लेकर केटीआर का बयान राजनीतिक आरोप है। इससे यह स्थापित नहीं होता कि राज्य सरकार ने आधिकारिक रूप से खेती बंद करने का कोई व्यापक आदेश दिया है।
मूसी नदी परियोजना पर भी उठाए सवाल
केटीआर ने तेलंगाना सरकार की महत्वाकांक्षी मूसी नदी विकास परियोजना को लेकर भी सवाल उठाए हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कई क्षेत्रों के किसान पानी की समस्या से जूझ रहे हैं, जबकि सरकार मूसी नदी के विकास और सौंदर्यीकरण पर लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये खर्च करने की योजना को प्राथमिकता दे रही है।बीआरएस नेता ने सवाल किया कि इतने बड़े वित्तीय प्रावधान वाली परियोजना पर आगे बढ़ने से पहले जनता की बुनियादी जरूरतों को प्राथमिकता क्यों नहीं दी जा रही।उन्होंने परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर को लेकर भी सवाल उठाए।केटीआर का कहना है कि राज्य सरकार को पहले किसानों के लिए पर्याप्त पानी, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करनी चाहिए।
चुनावी वादों को लेकर कांग्रेस पर निशाना
बीआरएस लंबे समय से कांग्रेस सरकार पर चुनावी वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगा रही है।केटीआर ने इससे पहले भी किसानों की आर्थिक सहायता, रोजगार, बेरोजगारी भत्ता और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठाए थे।उन्होंने आरोप लगाया था कि विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने जनता से अनेक वादे किए, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्हें निर्धारित समय में पूरा नहीं किया गया।केटीआर का दावा है कि युवाओं, किसानों, महिलाओं और अन्य वर्गों में सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष है।हालांकि, इन आरोपों पर सरकार का पक्ष और योजनाओं की वास्तविक प्रगति का आकलन संबंधित आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर ही किया जा सकता है।
केसीआर सरकार की योजनाओं का किया जिक्र
केटीआर ने पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) के नेतृत्व वाली बीआरएस सरकार के कार्यकाल का भी उल्लेख किया।उन्होंने कहा कि बीआरएस शासन के दौरान किसानों को आर्थिक सहायता देने के लिए रायथु बंधु जैसी योजना शुरू की गई थी।इस योजना का उद्देश्य किसानों को कृषि संबंधी निवेश के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना था।केटीआर ने दावा किया कि पिछली सरकार ने सिंचाई और कृषि क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता दी थी।बीआरएस लगातार अपनी पूर्ववर्ती योजनाओं की तुलना वर्तमान कांग्रेस सरकार की नीतियों से कर रही है।वहीं, तेलंगाना में कांग्रेस सरकार कृषि और कल्याणकारी योजनाओं के संचालन की जिम्मेदारी संभाल रही है। दोनों दलों के बीच इन योजनाओं के क्रियान्वयन और उपलब्धियों को लेकर राजनीतिक मतभेद बने हुए हैं।
रोजगार और युवाओं के मुद्दे पर भी घमासान
केटीआर ने हाल के महीनों में सरकारी भर्तियों और बेरोजगार युवाओं की समस्याओं को लेकर भी कांग्रेस सरकार की आलोचना की है।उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले रोजगार उपलब्ध कराने के बड़े वादे किए गए थे, लेकिन कई भर्ती प्रक्रियाओं में देरी हो रही है।16 अक्टूबर को आयोजित पार्टी बैठक में उन्होंने स्नातक मतदाताओं और शिक्षित युवाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की थी।उन्होंने बीआरएस कार्यकर्ताओं से मतदाता पंजीकरण अभियान को मजबूत करने और युवाओं की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने को कहा था।
सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
केटीआर के ताजा आरोपों पर 29 अक्टूबर तक उपलब्ध रिपोर्टों में तेलंगाना कृषि विभाग की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।ऐसे में किसानों से कथित स्वघोषणा कराने, सिंचाई सुविधाओं की कमी और अन्य मुद्दों पर सरकार का पक्ष महत्वपूर्ण होगा।राज्य में कांग्रेस और बीआरएस के बीच कृषि नीतियों, विकास परियोजनाओं और सरकारी योजनाओं को लेकर राजनीतिक टकराव लगातार जारी है।फिलहाल केटीआर ने साफ कर दिया है कि बीआरएस किसानों और आम जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस सरकार पर सवाल उठाती रहेगी। उनके ताजा बयान ने राज्य में कृषि संकट और सरकारी जवाबदेही को लेकर चल रही बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है।
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