Hyderabad हैदराबाद: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के हैदराबाद ज़ोनल ऑफिस ने 'हीरा ग्रुप पोंज़ी केस' से जुड़ी सात अचल संपत्तियों की नीलामी पूरी कर ली है। इन संपत्तियों को 15.03 करोड़ रुपये में नीलाम किया गया और अब इन्हें सफल बोलीदाताओं के नाम रजिस्टर कर दिया गया है। इन संपत्तियों में हैदराबाद के शेखपेट गांव स्थित 'एच.एस. रॉयल' में छह फ्लैट और हैदराबाद के बंजारा हिल्स (रोड नंबर 12, एमएलए कॉलोनी) में एक घर शामिल है।
बुधवार को जारी एक बयान में ED ने कहा कि इन संपत्तियों की नीलामी से मिली रकम को 'सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस' (SFIO) को सौंप दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, SFIO इस रकम को उन असली पीड़ितों या दावा करने वालों (claimants) को बांट देगा, जिन्हें नोहेरा शेख और हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज (तथा अन्य) की वजह से नुकसान उठाना पड़ा है।
नोहेरा शेख और उनके साथियों ने निवेशकों से सालाना 36% रिटर्न देने का झूठा वादा करके 5,978 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत, 6 अक्टूबर को इन संपत्तियों की नीलामी की गई थी। 5 मार्च 2025 के अपने आदेश में, सुप्रीम कोर्ट ने ED की उस अर्जी को मंज़ूरी दे दी थी, जिसमें नोहेरा शेख, हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज और अन्य से जुड़ी ज़ब्त संपत्तियों की नीलामी की अनुमति मांगी गई थी। इसका मकसद इन संपत्तियों से ज़्यादा से ज़्यादा रकम जुटाना था, ताकि पीड़ितों या दावा करने वालों को उनका पैसा वापस मिल सके।
इसके बाद, सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि वे रजिस्ट्रार (प्रोटोकॉल) टी. वेंकटेश्वर राव को नियुक्त करें, जो आरोपी की ओर से सेल डीड (बिक्री विलेख) पर हस्ताक्षर कर सकें। इसी के तहत, इन सात संपत्तियों की सेल डीड सफल बोलीदाताओं के नाम रजिस्टर कर दी गई हैं। ED ने 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA), 2002 के तहत नोहेरा शेख, हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज और अन्य के खिलाफ जांच शुरू की थी। यह जांच अलग-अलग राज्यों की पुलिस द्वारा दर्ज की गई कई FIR के आधार पर की गई थी।
जांच में पता चला कि नोहेरा शेख और उनके साथियों ने लोगों से सालाना 36% से ज़्यादा का बहुत ऊंचा रिटर्न देने का वादा करके 5,978 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश जुटाया था। हालांकि, बाद में इन संस्थाओं ने बड़ी संख्या में निवेशकों को मूल राशि और वादे के मुताबिक रिटर्न चुकाने में चूक की। जांच में यह भी पता चला कि इस तरह से कमाए गए गैर-कानूनी पैसे (प्रोसीड्स ऑफ़ क्राइम) का कुछ हिस्सा नोहेरा शेख, हीरा ग्रुप की कंपनियों, उनके रिश्तेदारों और सहयोगियों के नाम पर अलग-अलग चल और अचल संपत्तियां खरीदने में इस्तेमाल किया गया था।
जांच के दौरान, ED के हैदराबाद ज़ोनल ऑफिस ने PMLA, 2002 के प्रावधानों के तहत 428.83 करोड़ रुपये की संपत्तियों को ज़ब्त करने के लिए पांच प्रोविज़नल अटैचमेंट ऑर्डर (PAO) जारी किए। PMLA के तहत हैदराबाद की स्पेशल कोर्ट में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट और सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट भी दायर की गई हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने नोहेरा शेख के व्यवहार का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए 8 अप्रैल, 2026 के आदेश के ज़रिए उनकी ज़मानत रद्द कर दी और उन्हें एक हफ़्ते के भीतर जेल अधिकारियों के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया। आदेश का पालन न करने पर, PMLA के तहत हैदराबाद की स्पेशल कोर्ट ने 7 मई को उनके खिलाफ़ गैर-ज़मानती वारंट (NBW) जारी किया। इसके बाद, खुफिया जानकारी के आधार पर ED ने हरियाणा पुलिस के साथ मिलकर चलाए गए एक संयुक्त ऑपरेशन में 21 मई को गुरुग्राम, हरियाणा से नोहेरा शेख का पता लगाया और उन्हें NBW के तहत गिरफ़्तार कर लिया। उन्हें हैदराबाद लाया गया, PMLA के स्पेशल जज के सामने पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, जहां वह अभी भी हैं। ED ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, ज़ब्त की गई बाकी संपत्तियों को बेचकर उनसे मिलने वाली रकम को पीड़ितों को वापस दिलाने के लिए ज़रूरी कदम उठाना जारी रखेगी।
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