हैदराबाद। तेलंगाना में आगामी ग्रेजुएट एमएलसी चुनावों से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव (KTR) ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश में गैर-कांग्रेसी और गैर-भाजपाई राजनीतिक विकल्प की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) एक बार फिर तेलंगाना की सत्ता में वापसी करेंगे और राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।हैदराबाद स्थित तेलंगाना भवन में अंबरपेट विधानसभा क्षेत्र के बीआरएस नेताओं और कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित करते हुए केटीआर ने यह बयान दिया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से आगामी चुनावों के लिए संगठन को मजबूत करने और जनता से संपर्क बढ़ाने का आह्वान किया।
KCR की सत्ता में वापसी का किया दावा
केटीआर ने कहा कि तेलंगाना की जनता कांग्रेस सरकार के कामकाज से असंतुष्ट है और विभिन्न वर्गों के लोग फिर से बीआरएस की ओर देख रहे हैं।उन्होंने दावा किया कि केसीआर का दोबारा मुख्यमंत्री बनना निश्चित है। उनके अनुसार, राज्य में कांग्रेस सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ रही है और जनता को बीआरएस सरकार के कार्यकाल की उपलब्धियां याद आ रही हैं।केटीआर ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की सरकार पर चुनावी वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया।हालांकि, सत्ता परिवर्तन और केसीआर की वापसी से जुड़ी बातें केटीआर के राजनीतिक दावे हैं। आगामी चुनावों के परिणाम मतदाताओं के फैसले पर निर्भर करेंगे।
राष्ट्रीय राजनीति में तीसरे विकल्प की वकालत
केटीआर ने कहा कि केसीआर ने करीब चार साल पहले ही देश में कांग्रेस और भाजपा से अलग राजनीतिक विकल्प तैयार करने की आवश्यकता बताई थी।उनके अनुसार, उस समय कई लोगों ने इस विचार को गंभीरता से नहीं लिया था, लेकिन अब राजनीतिक परिस्थितियों के कारण गैर-कांग्रेसी और गैर-भाजपाई दलों की भूमिका पर चर्चा बढ़ रही है।केटीआर ने आरोप लगाया कि केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा विभिन्न मुद्दों पर जनता की अपेक्षाओं को पूरा नहीं कर पा रही है। उन्होंने कांग्रेस पर भी प्रभावी राजनीतिक विकल्प प्रस्तुत करने में विफल रहने का आरोप लगाया।उन्होंने विश्वास जताया कि क्षेत्रीय दल भविष्य में राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कांग्रेस सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
बीआरएस नेता ने तेलंगाना की कांग्रेस सरकार के प्रशासनिक कामकाज पर सवाल उठाए।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुनाव के समय किए गए वादों को पूरा करने में विफल रही है। विशेष रूप से युवाओं, बेरोजगारों और विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों पर उन्होंने सरकार को घेरा।केटीआर ने कहा कि कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणापत्र और युवा घोषणा पत्र में कई आश्वासन दिए थे, लेकिन उनके अनुसार उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।उन्होंने राज्य सरकार पर बेरोजगार युवाओं की समस्याओं की अनदेखी करने का भी आरोप लगाया।ये आरोप बीआरएस नेतृत्व के हैं और सरकार के प्रदर्शन का स्वतंत्र निष्कर्ष नहीं हैं।
ग्रेजुएट एमएलसी चुनावों की तैयारियां तेज
तेलंगाना में आगामी दो ग्रेजुएट एमएलसी निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावों को लेकर बीआरएस ने संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं।इनमें हैदराबाद-रंगारेड्डी-महबूबनगर और नलगोंडा-खम्मम-वारंगल स्नातक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।पार्टी ने छह पूर्ववर्ती जिलों में विधानसभा क्षेत्रवार प्रभारियों की नियुक्ति की है। इन पदाधिकारियों को स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करने तथा मतदाता पंजीकरण अभियान को मजबूत बनाने की जिम्मेदारी दी गई है।केटीआर ने गुरुवार को तेलंगाना भवन में समीक्षा बैठक के बाद इन नियुक्तियों की घोषणा की थी।
कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारी में जुटने का निर्देश
शुक्रवार की बैठक में केटीआर ने पार्टी नेताओं से संगठित तरीके से काम करने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि स्नातक एमएलसी चुनाव बीआरएस के लिए महत्वपूर्ण हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं को पात्र मतदाताओं तक पहुंचने पर ध्यान देना चाहिए।केटीआर ने कांग्रेस पर चुनावों में धनबल का इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।उन्होंने स्थानीय निकाय चुनाव कराने को लेकर भी कांग्रेस सरकार को चुनौती दी और कहा कि बीआरएस जनता के बीच जाकर अपने कामकाज तथा नीतियों को सामने रखेगी।
तेलंगाना में बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी
ग्रेजुएट एमएलसी चुनावों से पहले बीआरएस लगातार कांग्रेस सरकार के खिलाफ बेरोजगारी, शिक्षा, किसानों और प्रशासनिक मुद्दों को उठा रही है।वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर केटीआर के बयान से स्पष्ट है कि बीआरएस अपने राजनीतिक एजेंडे को तेलंगाना तक सीमित रखने के बजाय व्यापक राष्ट्रीय चर्चा का हिस्सा बनाना चाहती है।केसीआर की संभावित राष्ट्रीय भूमिका और गैर-कांग्रेसी, गैर-भाजपाई विकल्प को लेकर केटीआर के बयान ने राजनीतिक बहस को नया विषय दिया है।फिलहाल बीआरएस का ध्यान आगामी एमएलसी चुनावों और संगठनात्मक गतिविधियों पर केंद्रित है। इन चुनावों में पार्टी को कितना समर्थन मिलता है, यह मतदान और चुनाव परिणामों के बाद ही स्पष्ट होगा।
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