हैदराबाद : तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने शनिवार को बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि राज्य सरकार जल्द ही विधानसभा का विशेष सत्र बुलाएगी। इस विशेष सत्र में केंद्र सरकार से लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र 25 साल से घटाकर 21 साल करने की मांग को लेकर प्रस्ताव पारित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगस्त के पहले सप्ताह में विधानसभा और विधान परिषद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी की जा रही है। इस सत्र में चुनावी प्रक्रिया में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने को लेकर चर्चा होगी और प्रस्ताव पारित कर प्रधानमंत्री को भेजा जाएगा।
वर्तमान में भारत में लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम उम्र 25 वर्ष निर्धारित है। वहीं, राज्यसभा और विधान परिषद के चुनाव के लिए न्यूनतम उम्र 30 वर्ष है। तेलंगाना सरकार का तर्क है कि देश की बड़ी युवा आबादी को देखते हुए चुनावी राजनीति में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए उम्र सीमा में बदलाव जरूरी है।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने यह घोषणा हैदराबाद में NEET पेपर लीक मामले को लेकर आयोजित कैंडल लाइट रैली को संबोधित करते हुए की। इस दौरान उन्होंने युवाओं के मुद्दों पर सरकार की प्रतिबद्धता को भी दोहराया।
रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा पीढ़ी की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने दावा किया कि ‘जेन-Z’ यानी नई युवा पीढ़ी के आंदोलनों ने केंद्र सरकार पर दबाव बनाया है। उन्होंने NEET पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि युवाओं के विरोध ने बड़ा राजनीतिक असर पैदा किया।
रेवंत रेड्डी ने कहा कि युवाओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था में अधिक अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने कहा कि जब देश की बड़ी आबादी युवा है तो उन्हें नीति निर्माण और चुनावी राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तेलंगाना विधानसभा और विधान परिषद के विशेष सत्र में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इसके बाद प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र घटाने की मांग की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यह फैसला केवल तेलंगाना के युवाओं के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के युवाओं के हित से जुड़ा हुआ है। उनका मानना है कि कम उम्र में युवाओं को राजनीतिक प्रक्रिया से जुड़ने का अवसर मिलने से लोकतंत्र और मजबूत होगा।
NEET पेपर लीक मामले को लेकर आयोजित कैंडल लाइट रैली में मुख्यमंत्री ने शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि युवाओं के मुद्दों को गंभीरता से लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि छात्र और युवा देश का भविष्य हैं और उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।
तेलंगाना सरकार के इस प्रस्ताव पर अब राजनीतिक चर्चा तेज होने की संभावना है। यदि केंद्र सरकार इस मांग पर विचार करती है तो देश में चुनाव लड़ने की उम्र को लेकर लंबे समय से चली आ रही बहस को नई दिशा मिल सकती है।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, चुनाव लड़ने की उम्र घटाने का मुद्दा युवाओं की राजनीतिक भागीदारी से जुड़ा हुआ है। समर्थकों का कहना है कि 21 साल की उम्र तक कई युवा उच्च शिक्षा पूरी कर लेते हैं, रोजगार और सामाजिक मुद्दों को समझने लगते हैं, इसलिए उन्हें चुनावी राजनीति में आने का अवसर मिलना चाहिए।
वहीं, इस प्रस्ताव को लेकर आगे की प्रक्रिया केंद्र सरकार और संसद के स्तर पर निर्भर करेगी। चुनाव संबंधी नियमों में बदलाव के लिए संविधान और संबंधित कानूनों में संशोधन की आवश्यकता हो सकती है।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के इस ऐलान के बाद तेलंगाना की राजनीति में एक नया मुद्दा सामने आया है। अब देखना होगा कि विधानसभा के विशेष सत्र में यह प्रस्ताव किस रूप में पारित होता है और केंद्र सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।
फिलहाल, तेलंगाना सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह युवाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी में है।