हैदराबाद: 'सिटिजन काउंसिल' के संस्थापक अध्यक्ष सीताराम धुलिपाला ने तेलंगाना के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर रंगारेड्डी जिले के गांडीपेट मंडल स्थित मणिकोंडा जागीर गांव के सर्वे नंबर 42 में मौजूद लगभग 1,450 वर्ग गज सरकारी जमीन की सुरक्षा के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। पंचवटी कॉलोनी के पास स्थित इस जमीन का अनुमानित बाजार मूल्य 45 करोड़ रुपये है।
22 अक्टूबर, 2026 को दिए गए एक ज्ञापन में उन्होंने बताया कि राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, यह जमीन तेलंगाना सरकार की है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस जगह पर लगभग 15 वर्षों तक सरकार का आधिकारिक साइनबोर्ड लगा हुआ था। हालांकि, बार-बार आग्रह करने के बावजूद, संबंधित अधिकारियों ने न तो वहां उचित बाड़ (फेंसिंग) लगाई और न ही कोई प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था की, जिससे इस सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और अवैध हस्तांतरण का खतरा बना हुआ है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गांडीपेट के मंडल राजस्व अधिकारी (MRO), संबंधित उप-पंजीयक (सब-रजिस्ट्रार) और HMDA जैसे जिम्मेदार कार्यालयों ने 'सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005' (RTI Act) के तहत दायर आवेदनों का कोई जवाब नहीं दिया है। यह प्रशासनिक जवाबदेही, पारदर्शिता और जमीन की वर्तमान स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
ज्ञापन में आगे कहा गया है कि इस मामले की जांच 'तेलंगाना भूमि अतिक्रमण अधिनियम, 1905' की धारा 4 और 5, RTI अधिनियम, 2005 के प्रावधानों और अन्य संबंधित कानूनों के तहत की जानी चाहिए। विशेष रूप से, यदि रिकॉर्ड में कोई हेराफेरी, अवैध हस्तांतरण या जानबूझकर कर्तव्य में लापरवाही पाई जाती है, तो साक्ष्यों के आधार पर उसकी जांच होनी चाहिए और कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। चूंकि HYDRAA (हैदराबाद आपदा प्रतिक्रिया और संपत्ति संरक्षण एजेंसी) का काम सार्वजनिक संपत्तियों की रक्षा करना है, इसलिए उनसे भी अनुरोध किया गया है कि वे हस्तक्षेप करें, ताकि अतिक्रमण को रोका जा सके और जमीन को सुरक्षित किया जा सके।
अनुरोध
उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि वह रंगारेड्डी जिले के जिला कलेक्टर को निर्देश दे कि वे इस जमीन के मालिकाना हक, सीमाओं और वर्तमान स्थिति की जांच करें। साथ ही, जमीन की सही पैमाइश (सीमांकन) करवाकर वहां तुरंत बाड़ लगाने या चारदीवारी बनाने की व्यवस्था करें। उन्होंने यह भी मांग की है कि HYDRAA को इस जगह का निरीक्षण करने और अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर उचित सुरक्षात्मक व प्रवर्तन (enforcement) उपाय करने का निर्देश दिया जाए। इसके अलावा, उन्होंने ज़मीन की सुरक्षा करने में कथित विफलता और RTI आवेदनों पर कोई जवाब न देने के मामले में एक स्वतंत्र विभागीय जांच की मांग की, ताकि जहां भी चूक पाई जाए, वहां ज़िम्मेदारी तय की जा सके। साथ ही, उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह संबंधित लोक सूचना अधिकारियों (PIOs) को निर्देश दे कि वे लंबित RTI आवेदनों का निपटारा कानून के अनुसार करें। साथ ही, सभी राजस्व, पंजीकरण और योजना संबंधी रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने और उनका सत्यापन सुनिश्चित करने को कहा। यदि कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो उसके खिलाफ उचित दीवानी, अनुशासनात्मक या आपराधिक कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए।
धुलिपाला ने कहा कि इस तरह की बहुमूल्य सार्वजनिक ज़मीन की सुरक्षा करने में लगातार विफलता के कारण सरकारी खजाने को भारी नुकसान हो सकता है और लंबे समय तक कानूनी विवाद चल सकता है। इसलिए, उन्होंने ज़मीन को सुरक्षित करने और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए व्यक्तिगत हस्तक्षेप और समयबद्ध निर्देश जारी करने का अनुरोध किया।