हैदराबाद: BITS पिलानी के प्रो. हेमंत शर्मा सहित एक अंतरराष्ट्रीय शोध टीम ने एक ऐसी नई मैकेनिकल प्रणाली तैयार की है, जो बाहरी सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल या बिजली की मदद के बिना, कंपन (vibration) की बदलती स्थितियों के अनुसार खुद को ढाल सकती है।
'मैकेनिकल इंटेलिजेंस' (यांत्रिक बुद्धिमत्ता) की अवधारणा पर आधारित यह शोध 'इंटरनेशनल जर्नल ऑफ मैकेनिकल साइंसेज' में प्रकाशित हुआ है। इसमें BITS पिलानी, सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी, कोरिया इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी और शंघाई जिओ टोंग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता शामिल हैं।
मशीनों, वाहनों, सटीक उपकरणों और हल्के ढांचों में कंपन एक आम समस्या है। अत्यधिक कंपन से सटीकता (accuracy) प्रभावित हो सकती है, पुर्जों की टूट-फूट बढ़ सकती है और उन्हें नुकसान पहुंच सकता है। कंपन से बचाव की पारंपरिक प्रणालियां आमतौर पर स्थिर स्थितियों के लिए डिज़ाइन की जाती हैं, जबकि कंपन में बदलाव के अनुसार काम करने वाली उन्नत प्रणालियां अक्सर सेंसर, कंट्रोलर, एक्चुएटर और बाहरी बिजली पर निर्भर होती हैं।
टीम ने एक ऐसा ढांचा विकसित किया है जो कंपन की स्थितियां प्रतिकूल होने पर अपने आप दो स्थिर अवस्थाओं (stable states) के बीच बदल सकता है। प्रो. शर्मा ने बताया, "जब कंपन 'रेज़ोनेंस' (resonance) के करीब पहुंचता है, तो ढांचे की अपनी गति और उसमें जमा मैकेनिकल ऊर्जा इस बदलाव को सक्रिय कर देती है। इससे ढांचे की कठोरता (stiffness) और रेज़ोनेंस व्यवहार बदल जाता है, जिससे बाहरी सेंसर या इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल के बिना ही अत्यधिक कंपन को कम करने में मदद मिलती है।"
शोधकर्ताओं ने सबसे पहले इस प्रणाली को विकसित करने के लिए कंप्यूटेशनल डिज़ाइन और ऑप्टिमाइज़ेशन का उपयोग किया, फिर एक प्रोटोटाइप बनाया और स्टेटिक तथा डायनेमिक प्रयोगों के जरिए उसका परीक्षण किया। परीक्षणों से पुष्टि हुई कि यह ढांचा दो अलग-अलग अवस्थाओं को बनाए रख सकता है और कंपन की स्थितियों में बदलाव आने पर उनके बीच स्विच कर सकता है।
सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी में प्रो. जिनक्यू यांग की प्रयोगशाला में प्रायोगिक प्रदर्शन और विश्लेषण किए गए, जिसने इस अवधारणा की व्यावहारिक व्यवहार्यता (practical feasibility) साबित करने में मुख्य भूमिका निभाई।
प्रो. शर्मा ने इस शोध में अवधारणा तैयार करने, देखरेख करने, और शोध-पत्र (manuscript) की समीक्षा व उसे बेहतर बनाने में योगदान दिया। उन्होंने कहा कि इस तकनीक से कंपन से बचाव की प्रक्रिया सरल, अधिक भरोसेमंद और ऊर्जा-कुशल (energy-efficient) बन सकती है, साथ ही इसके लिए रखरखाव (maintenance) की जरूरत भी कम हो जाएगी।
इसके संभावित उपयोग विनिर्माण (manufacturing), परिवहन, मशीनरी और सटीक उपकरणों के क्षेत्रों में हो सकते हैं, जहां कंपन की बदलती स्थितियां प्रदर्शन और पुर्जों के जीवनकाल (life) पर असर डाल सकती हैं।