पूर्वोत्तर का स्वास्थ्य विरोधाभास: NFHS-6 के आंकड़ों ने खोली विकास की नई तस्वीर

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में स्वास्थ्य की तस्वीर कई मायनों में विरोधाभासी नजर आती है

Update: 2026-07-30 04:50 GMT
भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में स्वास्थ्य की तस्वीर कई मायनों में विरोधाभासी नजर आती है। एक ओर जहां कुछ स्वास्थ्य संकेतकों में यह क्षेत्र देश के कई हिस्सों से बेहतर प्रदर्शन करता है, वहीं दूसरी ओर कुपोषण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच जैसी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) ऐसे ही कई पहलुओं को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
पूर्वोत्तर भारत में स्वास्थ्य व्यवस्था भौगोलिक परिस्थितियों, सीमित बुनियादी ढांचे और दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाली आबादी के कारण अलग तरह की चुनौतियों का सामना करती है।
कुछ क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन
पूर्वोत्तर के कई राज्यों ने स्वास्थ्य के कुछ मानकों पर उल्लेखनीय सुधार दिखाया है। संस्थागत प्रसव, महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य जागरूकता और कुछ क्षेत्रों में टीकाकरण जैसी सेवाओं में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं।
महिलाओं की शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी बढ़ने से परिवार नियोजन, पोषण और बच्चों की देखभाल से जुड़े फैसलों में भी सुधार आया है।
कुपोषण अब भी बड़ी चुनौती
इसके बावजूद बच्चों में कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याएं कई राज्यों में चिंता का विषय बनी हुई हैं। पोषण की कमी का असर बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पोषण, स्वच्छता और जागरूकता पर भी समान रूप से ध्यान देना जरूरी है।
जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का बढ़ता खतरा
पूर्वोत्तर राज्यों में अब गैर-संचारी रोगों (NCDs) का खतरा भी बढ़ रहा है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी बीमारियां धीरे-धीरे स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए नई चुनौती बन रही हैं।
बदलती जीवनशैली, खानपान में बदलाव और शहरीकरण इसके प्रमुख कारणों में शामिल माने जाते हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की समस्या
पूर्वोत्तर भारत का भौगोलिक स्वरूप स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में बड़ी चुनौती पैदा करता है। पहाड़ी क्षेत्रों और दूरस्थ गांवों तक डॉक्टर, अस्पताल और जांच सुविधाएं पहुंचाना अभी भी कठिन है।
कई इलाकों में लोगों को बेहतर इलाज के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इससे समय पर इलाज मिलने में परेशानी हो सकती है।
स्थानीय जरूरतों के अनुसार नीति की जरूरत
NFHS-6 से मिलने वाले आंकड़े यह संकेत देते हैं कि पूर्वोत्तर के लिए एक समान स्वास्थ्य नीति के बजाय स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार योजनाएं बनाने की जरूरत है।
कुछ राज्यों में जहां पोषण और मातृ स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है, वहीं कुछ क्षेत्रों में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं और विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार जरूरी है।
आगे की राह
पूर्वोत्तर भारत के स्वास्थ्य सुधार के लिए इन क्षेत्रों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा:
ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करना
पोषण कार्यक्रमों को प्रभावी बनाना
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करना
गैर-संचारी रोगों की समय पर पहचान और इलाज
स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल तकनीक का उपयोग बढ़ाना
NFHS-6 पूर्वोत्तर भारत की स्वास्थ्य तस्वीर को समझने का एक महत्वपूर्ण जरिया है। यह बताता है कि क्षेत्र ने कई मामलों में प्रगति की है, लेकिन समान और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है।
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