मेरठ। दिल्ली रोड स्थित शताब्दीनगर के जलवायु टावर में शनिवार शाम उस समय अफरातफरी मच गई, जब लिफ्ट अचानक खराब होने से छह साल का बच्चा उसके अंदर फंस गया। पहली मंजिल से तीसरी मंजिल पर जा रहा मासूम करीब 20 मिनट तक लिफ्ट में बंद रहा। बच्चे ने समझदारी दिखाते हुए लिफ्ट में लगी आपातकालीन घंटी बजाई, जिसके बाद आसपास के लोगों को घटना की जानकारी हुई। लोगों ने तत्काल प्रयास शुरू किए और करीब 20 मिनट की मशक्कत के बाद लिफ्ट का दरवाजा खोलकर बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। घटना के बाद आवासीय परिसर में लिफ्ट की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, जलवायु टावर के फ्लैट नंबर 305 में रहने वाले देवराज सिंह का छह वर्षीय बेटा अर्जुन सिंह शनिवार शाम करीब छह बजे लिफ्ट में सवार हुआ था। उसे पहली मंजिल से तीसरी मंजिल पर जाना था, लेकिन बीच में लिफ्ट खराब हो गई और बच्चा उसके अंदर फंस गया।
पहली मंजिल से तीसरी मंजिल जा रहा था अर्जुन
शताब्दीनगर के जलवायु टावर में रहने वाले देवराज सिंह का बेटा अर्जुन सिंह शनिवार शाम करीब छह बजे लिफ्ट से ऊपर जा रहा था।
अर्जुन की उम्र महज छह वर्ष है। वह पहली मंजिल से तीसरी मंजिल पर जाने के लिए लिफ्ट में सवार हुआ था।
इसी दौरान तकनीकी खराबी के कारण लिफ्ट रुक गई। अचानक लिफ्ट बंद होने से बच्चा उसके अंदर फंस गया।
घटना के समय अर्जुन के साथ लिफ्ट में कोई अन्य व्यक्ति मौजूद था या नहीं, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।
लिफ्ट खराब होने के बाद बच्चे ने आपातकालीन घंटी बजाकर मदद मांगी।
आपातकालीन घंटी बजाकर मांगी मदद
लिफ्ट में फंसने के बाद अर्जुन ने अंदर लगी आपातकालीन घंटी का इस्तेमाल किया।
घंटी की आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोगों को पता चला कि लिफ्ट के भीतर कोई फंसा हुआ है।
जब लोगों ने स्थिति की जानकारी ली तो पता चला कि छह साल का बच्चा लिफ्ट के अंदर बंद है।
इसके बाद उसे बाहर निकालने के प्रयास शुरू किए गए।
इस घटना में आपातकालीन घंटी महत्वपूर्ण साबित हुई, क्योंकि उसी के जरिए आसपास के लोगों तक मदद की सूचना पहुंची।
लिफ्ट में लगे ऐसे सुरक्षा उपकरण आपात स्थिति में सहायता मांगने के लिए उपयोगी होते हैं।
20 मिनट तक लिफ्ट में फंसा रहा बच्चा
जानकारी के मुताबिक, अर्जुन करीब 20 मिनट तक लिफ्ट के अंदर फंसा रहा।
इस दौरान आसपास के लोगों ने उसे बाहर निकालने का प्रयास किया।
काफी मशक्कत के बाद लिफ्ट का दरवाजा खोला गया और बच्चे को बाहर निकाला गया।
छोटे बच्चे के अचानक बंद लिफ्ट में फंस जाने की घटना से परिसर में चिंता का माहौल बन गया।
राहत की बात यह रही कि अर्जुन को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
हालांकि लिफ्ट के भीतर बच्चे की स्थिति और बाहर निकलने के बाद उसकी चिकित्सकीय जांच के संबंध में कोई विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
लोगों की तत्परता से मिली राहत
लिफ्ट की आपातकालीन घंटी सुनकर आसपास के लोगों ने स्थिति को गंभीरता से लिया।
बच्चे के अंदर फंसे होने की जानकारी मिलने पर उसे निकालने की कोशिश की गई।
लगभग 20 मिनट के प्रयास के बाद लिफ्ट खोलने में सफलता मिली।
इस दौरान लोगों की तत्परता महत्वपूर्ण रही।
यदि आपातकालीन घंटी की आवाज पर समय रहते ध्यान नहीं दिया जाता, तो बच्चे को अधिक देर तक लिफ्ट में रहना पड़ सकता था।
हालांकि लिफ्ट का दरवाजा खोलने के लिए किस तकनीकी प्रक्रिया का उपयोग किया गया, इसकी जानकारी नहीं दी गई है।
लिफ्ट की खराबी से उठे सुरक्षा संबंधी सवाल
आवासीय इमारतों में लिफ्ट रोजमर्रा की जरूरत बन चुकी है।
विशेष रूप से बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले लोगों के लिए यह आवागमन का प्रमुख साधन होती है।
ऐसे में लिफ्ट का अचानक खराब हो जाना चिंता का विषय है।
जलवायु टावर में हुई घटना ने लिफ्ट के नियमित रखरखाव और तकनीकी जांच के महत्व को सामने रखा है।
हालांकि इस मामले में लिफ्ट खराब होने का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं है।
यह भी जानकारी उपलब्ध नहीं है कि संबंधित लिफ्ट की आखिरी बार तकनीकी जांच कब की गई थी।
इसलिए बिना जांच के किसी व्यक्ति या संस्था की लापरवाही तय करना उचित नहीं होगा।
बच्चों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान जरूरी
लिफ्ट में छोटे बच्चों के फंसने जैसी घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था के महत्व को उजागर करती हैं।
छोटे बच्चों के लिए अचानक बंद लिफ्ट में अकेले रहना तनावपूर्ण अनुभव हो सकता है।
ऐसी स्थिति में आपातकालीन घंटी या इंटरकॉम का उपयोग करना महत्वपूर्ण होता है।
अभिभावकों को बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार लिफ्ट के सुरक्षित उपयोग के बारे में जानकारी देनी चाहिए।
छोटे बच्चों के साथ किसी जिम्मेदार वयस्क का होना सुरक्षा की दृष्टि से बेहतर माना जाता है।
इसके अलावा लिफ्ट में उपलब्ध आपातकालीन संपर्क व्यवस्था के काम करने की नियमित जांच भी आवश्यक है।
आपात स्थिति में क्या सावधानी बरतें?
लिफ्ट अचानक बंद हो जाने पर अंदर मौजूद व्यक्ति को शांत रहने और सहायता मांगने का प्रयास करना चाहिए।
लिफ्ट में आपातकालीन घंटी या इंटरकॉम उपलब्ध हो तो उसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
बिना प्रशिक्षित सहायता के दरवाजे को जबरन खोलने या लिफ्ट से बाहर निकलने की कोशिश जोखिम भरी हो सकती है।
ऐसी परिस्थितियों में भवन प्रबंधन, प्रशिक्षित लिफ्ट तकनीशियन या आवश्यकतानुसार आपातकालीन सेवाओं से सहायता लेना अधिक सुरक्षित होता है।
जलवायु टावर की घटना में बच्चे ने आपातकालीन घंटी बजाकर आसपास के लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
रखरखाव व्यवस्था की जांच महत्वपूर्ण
लिफ्ट के सुरक्षित संचालन के लिए समय-समय पर तकनीकी जांच और रखरखाव जरूरी होता है।
इसमें दरवाजों की कार्यप्रणाली, आपातकालीन घंटी, संचार उपकरण और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच शामिल हो सकती है।
किसी खराबी की स्थिति में लिफ्ट का उपयोग रोककर प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों से परीक्षण कराना आवश्यक होता है।
जलवायु टावर की घटना के बाद संबंधित लिफ्ट की खराबी का कारण पता लगाना महत्वपूर्ण होगा।
हालांकि भवन प्रबंधन की ओर से लिफ्ट की मरम्मत या जांच को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित बाहर आने पर लोगों ने ली राहत की सांस
शनिवार शाम करीब छह बजे हुई इस घटना में छह वर्षीय अर्जुन सिंह पहली मंजिल से तीसरी मंजिल पर जाते समय लिफ्ट में फंस गया था।
करीब 20 मिनट तक अंदर रहने के बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
बच्चे ने आपातकालीन घंटी बजाकर मदद मांगी, जिसके बाद आसपास के लोगों ने उसे निकालने के प्रयास किए।
इस घटना ने आवासीय इमारतों में लिफ्ट की सुरक्षा व्यवस्था और नियमित रखरखाव की जरूरत को एक बार फिर सामने रखा है।
फिलहाल लिफ्ट खराब होने के कारणों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।