गांव में ही होगा आधार अपडेट, यूपी की 110 पंचायतों में सुविधा शुरू

Update: 2026-07-29 14:58 GMT

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब आधार कार्ड बनवाने, उसमें संशोधन कराने या बायोमेट्रिक अपडेट जैसी जरूरी सेवाओं के लिए ग्रामीणों को शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के डिजिटल पंचायतों के विजन के तहत पंचायती राज विभाग ने ग्राम पंचायत स्तर पर आधार नामांकन और अपडेट सेवाओं की शुरुआत कर दी है। फिलहाल प्रदेश के छह जिलों की 110 ग्राम पंचायतों में यह सुविधा शुरू हो चुकी है।

इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके घर के नजदीक ही सरकारी डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराना है। इससे लोगों का समय और पैसा दोनों बचेंगे। पहले ग्रामीणों को आधार से जुड़े छोटे-छोटे कामों के लिए भी जिला मुख्यालय या नजदीकी शहरों में स्थित आधार केंद्रों तक जाना पड़ता था। कई बार लंबी दूरी और भीड़ के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। अब पंचायत स्तर पर सुविधा मिलने से उनकी यह समस्या काफी हद तक खत्म होगी।

पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार ग्राम पंचायतों को डिजिटल सेवा केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। योजना के तहत प्रदेश की सभी 57,694 ग्राम पंचायतों में भविष्य में आधार सेवाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इसके पहले चरण में 5000 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है।

वर्तमान में लखनऊ, अयोध्या, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी, सीतापुर और बलरामपुर जिलों की 110 ग्राम पंचायतों में आधार केंद्र संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से अब तक 75 हजार से अधिक आधार संबंधी सेवाएं ग्रामीणों को दी जा चुकी हैं। इसमें नए आधार नामांकन के साथ नाम, पता, मोबाइल नंबर, फोटो और बायोमेट्रिक अपडेट जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

इस योजना को सफल बनाने के लिए पंचायत सहायकों को आधार ऑपरेटर के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। विभाग की ओर से अब तक 1200 से अधिक पंचायत सहायकों को प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके अलावा कई अन्य कर्मचारियों का प्रशिक्षण भी जारी है। वर्तमान में 179 पंचायत सहायकों की ऑपरेटर आईडी सक्रिय हो चुकी है, जबकि 157 आधार मशीनों का एक्टिवेशन पूरा किया जा चुका है।

सरकार का उद्देश्य केवल आधार सेवा उपलब्ध कराना ही नहीं है, बल्कि ग्राम पंचायतों को पूरी तरह डिजिटल नागरिक सेवा केंद्र के रूप में विकसित करना है। आने वाले समय में ग्रामीणों को कई सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ गांव में ही मिल सकेगा। इससे पंचायतों की भूमिका भी मजबूत होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

पंचायती राज विभाग का मानना है कि आधार केंद्रों की स्थापना से ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही पंचायतों की आर्थिक आत्मनिर्भरता भी बढ़ सकती है, क्योंकि इन सेवाओं के संचालन से पंचायतों को आय का एक नया माध्यम मिलेगा।

ग्रामीण विकास की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आधार आज लगभग हर सरकारी योजना, बैंकिंग सेवा और डिजिटल सुविधा के लिए जरूरी दस्तावेज बन चुका है। ऐसे में गांव स्तर पर इसकी सुविधा उपलब्ध होना ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत साबित होगी। सरकार की योजना है कि आने वाले चरणों में प्रदेश के अधिक से अधिक गांवों तक यह सुविधा पहुंचाई जाए, ताकि किसी भी नागरिक को आधार संबंधी कामों के लिए दूर नहीं जाना पड़े।

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