उत्तर प्रदेश : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज सांसद अखिलेश यादव ने FCRA और परिसीमन विधेयक को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी दोनों विधेयकों का विरोध कर रही है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष के सवालों से बचने की कोशिश कर रही है और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर नियंत्रण बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनता अपने जनप्रतिनिधियों को इसलिए चुनकर संसद भेजती है, ताकि वे सरकार से सवाल पूछ सकें और जनता से जुड़े मुद्दों को सदन में उठा सकें।
अखिलेश यादव ने सवाल किया कि आखिर सरकार विपक्ष के सवालों का जवाब देने से क्यों बच रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की जिम्मेदारी है कि वह सरकार की नीतियों और फैसलों पर सवाल उठाए। यदि किसी विधेयक को लेकर विपक्ष के मन में आशंकाएं हैं तो सरकार को उन आशंकाओं को दूर करना चाहिए और सदन में स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
सपा प्रमुख ने प्रयागराज में छात्रों के आंदोलन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया और आंसू गैस के गोले छोड़े गए। उनके मुताबिक, कार्रवाई में कई छात्र घायल हुए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अखिलेश ने दावा किया कि आंदोलन के बाद भी कई छात्रों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ ऐसे छात्रों को भी मुकदमों में शामिल किया गया, जो कथित तौर पर आंदोलन में शामिल नहीं थे।
FCRA विधेयक को लेकर अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार से कई सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि भारत से कितना पैसा विदेश गया है और विदेश से भारत में आने वाले पैसे को लेकर उसकी नीति क्या है। उन्होंने सवाल किया कि यदि विदेश से पैसा भारत में अच्छे और सामाजिक कार्यों के लिए आ रहा है तो सरकार को उससे परेशानी क्यों है।
अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार विदेशी फंडिंग पर पाबंदी लगाने की बात कर रही है, लेकिन उसे यह भी बताना चाहिए कि भारत का कितना पैसा विदेश गया और उसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि FCRA के प्रावधानों के जरिए लोगों और संस्थाओं में डर पैदा करने की कोशिश की जा सकती है।
सपा अध्यक्ष ने भाजपा पर संस्थाओं पर नियंत्रण करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए उसे ‘बहुत बड़ी भू-माफिया पार्टी’ तक बता दिया। अखिलेश ने आरोप लगाया कि जहां खाली तालाब या जमीन दिखाई देती है, वहां कब्जे की कोशिश की जाती है। उन्होंने कहा कि सरकार को इन सवालों का जवाब देना चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि FCRA विधेयक के जरिए किन गतिविधियों को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है।
परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर भी अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष को जनता ने सरकार से सवाल पूछने के लिए चुना है। लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष दोनों की अपनी-अपनी भूमिका होती है। सरकार को विपक्ष के सवालों का जवाब देना चाहिए और महत्वपूर्ण विधेयकों पर व्यापक चर्चा करानी चाहिए।
अखिलेश यादव ने अयोध्या का जिक्र करते हुए भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वहां आस्था के साथ भी बड़ा खिलवाड़ हुआ है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपने पुराने नारों और वादों को याद करने की बात कही और FCRA विधेयक के प्रावधानों पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की।
वहीं, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की गाड़ी पर हुए हमले की घटना पर भी अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में इस तरह की घटना होना दुखद है। अखिलेश ने कहा कि ममता बनर्जी एक वरिष्ठ नेता हैं और लंबे समय तक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री रही हैं। उनके साथ इस तरह का व्यवहार नहीं होना चाहिए।
अखिलेश यादव ने कहा कि यदि किसी सरकार की ओर से इस तरह की कार्रवाई कराई जा रही है तो यह बेहद निंदनीय है। सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन किसी वरिष्ठ नेता का अपमान नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और उन्हें पर्याप्त सुरक्षा मिलनी चाहिए।
कुल मिलाकर, अखिलेश यादव ने FCRA और परिसीमन विधेयक के साथ-साथ छात्र आंदोलन, संस्थाओं की भूमिका और ममता बनर्जी की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने विपक्ष की भूमिका को लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि सरकार को विपक्ष के सवालों से बचने के बजाय उनका जवाब देना चाहिए।