‘बांग्लादेश जैसी स्थिति बनाने की कोशिश’, दिल्ली प्रदर्शन पर विपक्ष से भिड़े योगी
विरोध प्रदर्शनों पर सीएम योगी का हमला
लखनऊ: दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें भारत में बांग्लादेश की तर्ज पर राजनीतिक अस्थिरता पैदा करके सत्ता परिवर्तन चाहती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार बनाने का रास्ता जनता के जनादेश से होकर गुजरता है। उनका बयान चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर जारी विरोध की पृष्ठभूमि में आया है।
शुक्रवार को सामने आए अपने संदेश में योगी ने युवाओं की भूमिका पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि युवाशक्ति का उपयोग राष्ट्र निर्माण में होना चाहिए। उन्होंने राजनीतिक विरोधियों पर आरोप लगाया कि वे युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के बजाय अव्यवस्था की ओर ले जाने का प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इस पूरी गतिविधि को सत्ता हासिल करने की कोशिश से जोड़ा। हालांकि, यह विपक्ष के उद्देश्यों को लेकर उनका राजनीतिक आरोप है; इसे किसी जांच में स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
मुख्यमंत्री ने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की तुलना जनविश्वास पर खड़े विशाल वटवृक्ष से की। उनके अनुसार, चुनाव सुधार और न्याय जैसे नारों की आड़ में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश सफल नहीं होगी। इस तुलना के जरिए उन्होंने संस्थागत व्यवस्था और जनता के फैसले की मजबूती का संदेश दिया। योगी का तर्क था कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का आधार जनसमर्थन होना चाहिए और सत्ता की दावेदारी उसी प्रक्रिया के माध्यम से तय होनी चाहिए।
योगी की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब राजधानी में सीजेपी और छात्र संगठनों के कार्यक्रमों को लेकर पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच खींचतान बनी हुई है। शुक्रवार, 16 अक्टूबर को प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च के दौरान कनॉट प्लेस और मंडी हाउस क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाई गई थी। कार्यक्रम से जुड़े लोगों को अलग-अलग स्थानों पर हिरासत में लिया गया। प्रदर्शनकारी अपनी मांगें रखने और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की बात कर रहे थे, जबकि पुलिस सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई कर रही थी।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शुक्रवार की कार्रवाई में लगभग 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। इनमें सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके और आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा भी शामिल थे। सुरक्षा व्यवस्था के तहत सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर के लिए बंद रखा गया था। इसके बावजूद लोग राष्ट्रीय ध्वज लेकर कनॉट प्लेस पहुंचे। पुलिस की तैनाती और हिरासत की कार्रवाई ने प्रदर्शन के साथ-साथ राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया।
शनिवार सुबह इस घटनाक्रम में नया अपडेट सामने आया। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद नेहा बोरा को रिहा कर दिया गया। वहीं, अभिजीत दीपके को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाना था। इस तरह शुक्रवार की हिरासत और शनिवार की स्थिति को अलग-अलग समझना जरूरी है। नेहा की रिहाई हो चुकी थी, जबकि दीपके के संबंध में अगला निर्णय पेशी से जुड़ा था।
प्रदर्शनों का प्रमुख संदर्भ मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर उठाए जा रहे सवाल हैं। सीजेपी और उससे जुड़े समूह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं। दूसरी ओर, भाजपा के नेता इन आंदोलनों की मंशा और राजनीतिक समर्थन पर सवाल उठा रहे हैं। इसलिए विवाद में चुनाव प्रक्रिया से संबंधित आरोप और आंदोलन के उद्देश्य को लेकर राजनीतिक आरोप—दोनों अलग विषय हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी दिल्ली प्रदर्शनों को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा है। उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास करने का आरोप लगाया तथा बांग्लादेश जैसी सत्ता परिवर्तन की स्थिति का उल्लेख किया। योगी के बयान के साथ राजनाथ की प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि भाजपा नेतृत्व इस आंदोलन को व्यापक राजनीतिक चुनौती के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। वहीं, प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ रहे हैं।
दिल्ली के इस घटनाक्रम में अब प्रशासनिक कार्रवाई के साथ बयानबाजी भी तेज है। योगी ने जनादेश और स्थिरता को अपने संदेश का केंद्र बनाया है। आगे प्रदर्शन के कार्यक्रम, हिरासत संबंधी आदेश और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाएं इस विवाद की दिशा तय करेंगी। फिलहाल मुख्यमंत्री के बांग्लादेश संबंधी बयान को विपक्ष पर लगाए गए राजनीतिक आरोप के रूप में ही प्रस्तुत करना जरूरी है।