अयोध्या चढ़ावा चोरी केस: आरोपियों के खुलासों के बाद रमाशंकर मिश्र के घर पहुंची पुलिस
पुलिस रिमांड में आरोपियों ने खोले कई राज, रमाशंकर मिश्र के घर छापेमारी
Uttar Pradesh: अयोध्या के बहुचर्चित राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। पुलिस रिमांड के दौरान आरोपियों से हुई गहन पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आने का दावा किया जा रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों ने पूछताछ में ऐसे कई तथ्यों का खुलासा किया है, जिनके आधार पर अब जांच का दायरा और व्यापक हो गया है। इसी कड़ी में पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) ने मामले से जुड़े रमाशंकर मिश्र के आवास पर भी छानबीन की।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस का उद्देश्य कथित चोरी की पूरी साजिश, उसमें शामिल लोगों की भूमिका और चढ़ावे से जुड़ी रकम या अन्य सामान के संभावित ठिकानों का पता लगाना है। अधिकारियों का कहना है कि जांच साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले हर तथ्य का सत्यापन किया जा रहा है।
रिमांड में पूछताछ से मिले नए सुराग
पुलिस सूत्रों के अनुसार, न्यायालय से रिमांड मिलने के बाद आरोपियों से कई चरणों में पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान उनसे घटना के समय की गतिविधियों, मंदिर परिसर में उनकी भूमिका, आपसी संपर्क, नकदी और अन्य सामग्री के प्रबंधन से जुड़े सवाल पूछे गए।
जांचकर्ताओं ने आरोपियों के बयानों का मिलान पहले से उपलब्ध दस्तावेजों, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), लोकेशन डेटा और अन्य डिजिटल साक्ष्यों से भी किया। कई बिंदुओं पर आरोपियों के बयान एक-दूसरे से मेल खाते पाए गए, जबकि कुछ मामलों में विरोधाभास सामने आने पर उनसे दोबारा पूछताछ की गई।
रमाशंकर मिश्र के घर पर छानबीन
जांच के दौरान पुलिस टीम ने मामले से जुड़े रमाशंकर मिश्र के घर पर पहुंचकर विस्तृत छानबीन की। अधिकारियों ने घर में मौजूद दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य संभावित साक्ष्यों की जांच की। आवश्यकता पड़ने पर कुछ दस्तावेज और डिजिटल सामग्री को परीक्षण के लिए अपने कब्जे में भी लिया गया।
छानबीन का उद्देश्य यह पता लगाना था कि क्या मामले से संबंधित कोई ऐसा रिकॉर्ड, लेनदेन या अन्य सामग्री मौजूद है, जो जांच में मददगार साबित हो सकती है। पुलिस ने आसपास के लोगों से भी पूछताछ कर घटना और संबंधित व्यक्तियों की गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाई।
डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड की हो रही जांच
जांच एजेंसियां इस मामले में केवल मौखिक बयानों पर निर्भर नहीं हैं। पुलिस डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड की भी बारीकी से जांच कर रही है। बैंक खातों, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, संदेशों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि आरोपियों के दावों की पुष्टि की जा सके।
विशेषज्ञों की सहायता से इलेक्ट्रॉनिक डेटा का फॉरेंसिक परीक्षण भी कराया जा रहा है। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि घटना से पहले और बाद में संबंधित लोगों के बीच किस प्रकार का संपर्क हुआ था।
आमने-सामने बैठाकर भी हुई पूछताछ
सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान पुलिस ने कुछ आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर भी पूछताछ की। इसका उद्देश्य उनके बयानों में मौजूद विरोधाभासों को दूर करना और घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने लाना था।
अधिकारियों का मानना है कि इस प्रक्रिया से जांच को कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। हालांकि पुलिस ने अभी तक पूछताछ में सामने आई सभी जानकारियों का आधिकारिक खुलासा नहीं किया है, क्योंकि जांच अभी जारी है।
बरामदगी और साक्ष्यों पर फोकस
जांच टीम कथित चोरी से जुड़े सामान, नकदी और अन्य संभावित साक्ष्यों की बरामदगी पर विशेष ध्यान दे रही है। पुलिस उन स्थानों की भी जांच कर रही है, जिनका उल्लेख पूछताछ के दौरान सामने आया है।
यदि जांच के दौरान कोई नया तथ्य सामने आता है, तो उससे जुड़े व्यक्तियों से भी पूछताछ की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति की भूमिका केवल साक्ष्यों के आधार पर तय की जाएगी।
SIT और पुलिस का समन्वित अभियान
इस मामले में स्थानीय पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) मिलकर काम कर रहे हैं। दोनों एजेंसियां नियमित रूप से उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा कर रही हैं और आवश्यकतानुसार नई जांच दिशा तय की जा रही है।
जांच में सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान, वित्तीय रिकॉर्ड, डिजिटल डेटा और फॉरेंसिक रिपोर्ट जैसे सभी पहलुओं को शामिल किया गया है ताकि अदालत में मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकें।
चार्जशीट की तैयारी तेज
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस रिमांड के दौरान मिले इनपुट और छानबीन में जुटाए गए साक्ष्यों को अब जांच रिपोर्ट का हिस्सा बनाया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद आरोपपत्र (चार्जशीट) तैयार किया जाएगा, जिसमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि किन लोगों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं और उनके विरुद्ध कौन-कौन सी धाराएं लागू की जाएंगी।
मंदिर प्रशासन भी दे रहा सहयोग
जांच एजेंसियों के अनुसार, राम मंदिर प्रशासन और संबंधित ट्रस्ट जांच में आवश्यक सहयोग कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं और जांच प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है।