भदोही। उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में कोडीनयुक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार से जुड़े मामले में विशेष जांच टीम (एसआईटी) की कार्रवाई के बावजूद कई आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। नवंबर 2025 में सामने आए इस मामले में जांच के दौरान करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन, फर्जी फर्मों और दवाओं की आपूर्ति से जुड़ी गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि कोडीनयुक्त कफ सिरप का अवैध नेटवर्क उत्तर प्रदेश और बिहार से पश्चिम बंगाल होते हुए बांग्लादेश सीमा तक फैला हुआ था।
मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दी है। हालांकि, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। पुलिस ने कई आरोपियों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। जांच में सामने आए तथ्यों से संकेत मिले हैं कि दवाओं के वैध कारोबार की आड़ में बड़े पैमाने पर कोडीनयुक्त कफ सिरप की खरीद-बिक्री की जा रही थी।
नवंबर 2025 में दर्ज हुई थीं प्राथमिकी
भदोही में कोडीनयुक्त कफ सिरप के संदिग्ध कारोबार का मामला 18 नवंबर 2025 को लखनऊ से मिली सूचना के बाद सामने आया था। खाद्य एवं औषधि विभाग की शिकायत के आधार पर विभिन्न थाना क्षेत्रों में संबंधित फर्म संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों की कई दवा फर्मों के माध्यम से बड़ी मात्रा में कोडीनयुक्त कफ सिरप की खरीद और बिक्री दिखाई गई थी। कुछ लेनदेन में दवाओं की वास्तविक आपूर्ति और दस्तावेजों में दर्ज विवरण के बीच अंतर मिलने का भी आरोप है।
19 अक्टूबर 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, सात फर्म संचालकों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है। इनमें दो आरोपियों की गिरफ्तारी और पांच के फरार होने की पुष्टि की गई है। फरार पांचों आरोपियों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित है।
शैलेंद्र तिवारी और विजय गुप्ता की हुई गिरफ्तारी
जांच के दौरान पुलिस ने वाराणसी निवासी शैलेंद्र तिवारी को फरवरी 2026 में गिरफ्तार किया था। शैलेंद्र तिवारी से संबंधित फर्म के जरिए कोडीनयुक्त कफ सिरप के बड़े लेनदेन का मामला सामने आया था।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान करोड़ों रुपये के कारोबार और फर्जी ई-वे बिल से जुड़ी जानकारी मिली थी। इसके बाद अप्रैल 2026 में आरोपी विजय गुप्ता को भी गिरफ्तार किया गया।
विजय गुप्ता पर फर्जी फर्म के माध्यम से बड़ी मात्रा में कोडीनयुक्त कफ सिरप की बिक्री करने का आरोप है। पुलिस जांच में उससे जुड़े कारोबार की कीमत करोड़ों रुपये बताई गई थी।
हालांकि, इस प्रकरण में नामजद अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस के सामने चुनौती यह है कि लंबे समय से फरार चल रहे आरोपियों का पता लगाकर उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
बांग्लादेश तक फैले नेटवर्क की आशंका
इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू कोडीनयुक्त कफ सिरप के कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि दवाओं की खेप उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से दूसरे राज्यों में भेजी जाती थी और वहां से अवैध तरीके से बांग्लादेश सीमा तक पहुंचाई जाती थी।
कोडीन एक ओपिऑइड पदार्थ है, जिसका इस्तेमाल कुछ निर्धारित दवाओं में किया जाता है। चिकित्सकीय निगरानी के बिना इसका दुरुपयोग नशे के लिए भी किया जा सकता है।
अप्रैल 2026 में सामने आए एक अन्य संबंधित मामले में पुलिस ने प्रयागराज के पिता-पुत्र पर नमकीन और चिप्स के बिलों की आड़ में कोडीनयुक्त कफ सिरप को त्रिपुरा के रास्ते बांग्लादेश सीमा तक पहुंचाने का आरोप लगाया था।
इससे जांच एजेंसियों के सामने यह सवाल खड़ा हुआ है कि अलग-अलग फर्मों के बीच होने वाले लेनदेन किसी बड़े संगठित नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं थे। हालांकि, भदोही के प्रत्येक आरोपी का अंतरराष्ट्रीय तस्करी से सीधा संबंध न्यायालय में साबित होना अभी बाकी है।
चार्जशीट में दस्तावेजी और तकनीकी साक्ष्य
एसआईटी ने जांच के दौरान आरोपियों से जुड़े बैंक खातों, कारोबारी दस्तावेजों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को एकत्र किया है।
भदोही के अपर पुलिस अधीक्षक शुभम अग्रवाल के अनुसार, आरोपियों से संबंधित ई-वे बिल, बैंक स्टेटमेंट, नकदी जमा पर्चियां, बैंक के सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और बरामद कफ सिरप की फॉरेंसिक रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की गई है।
इसके अतिरिक्त औषधि निरीक्षक और संबंधित दवा कंपनियों से प्राप्त रिपोर्ट को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।
इस मामले में दस्तावेजी साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इनके माध्यम से दवाओं की वास्तविक खरीद-बिक्री, भुगतान और कथित आपूर्ति नेटवर्क का पता लगाया जा सकता है।
चार लाख से अधिक शीशियों के कारोबार की जांच
जांच में सामने आया है कि भदोही की सात फर्मों ने चार लाख से अधिक कोडीनयुक्त कफ सिरप की शीशियों का कारोबार किया था।
बताया गया है कि इन फर्मों ने आजमगढ़ की एक फर्म से करीब 1.65 लाख शीशियां खरीदी थीं। इसके अतिरिक्त सोनभद्र की एक फर्म को लगभग एक लाख शीशियों की आपूर्ति दर्शाई गई थी।
वाराणसी की एक अन्य फर्म से भी लगभग एक लाख शीशियों की खरीद के दस्तावेज सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, इन फर्मों के कारोबार और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया है।
फरार आरोपियों की गिरफ्तारी बनी चुनौती
मामले में कई आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोपियों पर इनाम घोषित होने के बावजूद उनका पुलिस की पकड़ से बाहर रहना चिंता का विषय है।
फरार आरोपियों की गिरफ्तारी से पूरे नेटवर्क, दवाओं की आपूर्ति और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी सामने आ सकती है।
पुलिस के सामने यह भी चुनौती है कि मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों और तकनीकी साक्ष्यों को न्यायालय में मजबूती से प्रस्तुत किया जाए, ताकि आरोपों की निष्पक्ष न्यायिक जांच हो सके।
फिलहाल चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामला न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गया है। अब फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण पर इस बहुचर्चित मामले की आगे की दिशा निर्भर करेगी।