UPSSSC परीक्षा में नकल का अनोखा जुगाड़ कान में छिपाई ब्लूटूथ डिवाइस से पकड़ा गया अभ्यर्थी
आजमगढ़ में नकल का हाईटेक तरीका फेल कान में छिपी ब्लूटूथ डिवाइस ने खोली पोल
आजमगढ़: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में UPSSSC परीक्षा के दौरान नकल का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। परीक्षा केंद्र पर जांच के दौरान एक अभ्यर्थी के कान के अंदर छिपी हुई ब्लूटूथ डिवाइस बरामद होने के बाद उसे पकड़ लिया गया। आरोपी अभ्यर्थी कथित तौर पर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिए परीक्षा में नकल करने की कोशिश कर रहा था।
मामला सामने आने के बाद परीक्षा केंद्र की सुरक्षा और अभ्यर्थियों की जांच व्यवस्था को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। केंद्र पर तैनात निगरानी टीम ने संदिग्ध गतिविधि को पहचानकर अभ्यर्थी की जांच की, जिसके बाद उसके पास से डिवाइस मिली।
कान के अंदर छिपाई थी डिवाइस
परीक्षा में नकल के लिए अभ्यर्थी ने बेहद छोटे आकार की ब्लूटूथ डिवाइस का इस्तेमाल करने की कोशिश की। इसे कान के अंदर इस तरह छिपाया गया था कि सामान्य तौर पर आसानी से दिखाई न दे। जांच के दौरान शक होने पर अभ्यर्थी की अतिरिक्त तलाशी ली गई। इसी दौरान इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का पता चला और उसे कब्जे में ले लिया गया।
निगरानी टीम को हुआ शक
परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थियों की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही थी। इसी दौरान संबंधित अभ्यर्थी की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। इसके बाद उसकी जांच की गई। जांच में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस मिलने के बाद परीक्षा केंद्र के अधिकारियों ने मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी।
इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से नकल की कोशिश
आरोप है कि अभ्यर्थी ने परीक्षा में अनुचित साधन का इस्तेमाल कर सवालों के जवाब हासिल करने की कोशिश की। ब्लूटूथ डिवाइस का इस्तेमाल बाहरी व्यक्ति से संपर्क करने के लिए किए जाने की आशंका जताई जा रही है।
UPSSSC परीक्षा में सुरक्षा पर जोर
प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और संचार उपकरणों पर सख्ती रहती है। परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की तलाशी और निगरानी की व्यवस्था की जाती है। इसके बावजूद छोटे आकार की इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिए नकल की कोशिशें परीक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बनी हुई हैं।
पुलिस कार्रवाई की तैयारी
मामला सामने आने के बाद आरोपी अभ्यर्थी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। परीक्षा में अनुचित साधन के इस्तेमाल के अलावा इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिए किसी बाहरी व्यक्ति से संपर्क की जांच भी की जा सकती है। अगर जांच में नकल के लिए किसी संगठित गिरोह या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है।
क्या किसी गिरोह से जुड़े तार?
ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश करती हैं कि अभ्यर्थी ने डिवाइस कहां से हासिल की और उसे परीक्षा में इस्तेमाल करने की योजना किसने बनाई। अभ्यर्थी के मोबाइल फोन, संपर्कों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच से संभावित नेटवर्क की जानकारी मिल सकती है।
परीक्षा केंद्रों पर बढ़ी सतर्कता
घटना के बाद परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की जांच और निगरानी को लेकर सतर्कता बढ़ाई जा सकती है। अधिकारियों की कोशिश रहती है कि किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को परीक्षा कक्ष में प्रवेश न करने दिया जाए। परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों को संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए जाते हैं।
नकल पर सख्ती जरूरी
प्रतियोगी परीक्षाओं में एक अभ्यर्थी की नकल का असर हजारों मेहनती उम्मीदवारों पर पड़ सकता है। इसलिए परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा बनाए रखना बेहद जरूरी है। इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिए नकल की कोशिश सामने आने के बाद परीक्षा एजेंसियों के सामने तकनीकी जांच और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की चुनौती भी है।