सांप से हत्या की साजिश का मामला फिर सुर्खियों में, फांसी की सजा को हाईकोर्ट में चुनौती
मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में चर्चित सर्प हत्या कांड एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। मामले में मौत की सजा सुनाई जाने के बाद दोषी ठहराए गए रविता और अमरदीप ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दोनों ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए अपनी सजा के खिलाफ अपील की है। इस कानूनी कदम के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है। अब हाईकोर्ट में निचली अदालत के फैसले, अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और बचाव पक्ष की दलीलों की न्यायिक समीक्षा होगी।मेरठ का यह मामला अपनी असामान्य परिस्थितियों और हत्या की कथित साजिश को लेकर चर्चा में रहा है। सर्पदंश के जरिए हत्या किए जाने के आरोपों ने इस प्रकरण को सामान्य हत्या के मामलों से अलग बना दिया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और घटनाक्रम से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल उठे थे। निचली अदालत ने सुनवाई के बाद रविता और अमरदीप को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड सुनाया था। हालांकि, अब दोनों दोषियों ने इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है।
मृत्युदंड के मामलों में उच्च न्यायालय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। भारतीय कानून के अनुसार, सत्र न्यायालय द्वारा सुनाई गई मौत की सजा तब तक प्रभावी नहीं हो सकती, जब तक संबंधित उच्च न्यायालय उसकी पुष्टि नहीं कर देता। इसके लिए उच्च न्यायालय साक्ष्यों, गवाहों के बयानों, कानूनी प्रक्रियाओं और निचली अदालत के निष्कर्षों का परीक्षण करता है। दोषियों की ओर से दायर अपील में भी इन्हीं पहलुओं पर सुनवाई होने की संभावना है।रविता और अमरदीप की अपील के बाद अब अदालत के सामने यह महत्वपूर्ण प्रश्न होगा कि क्या निचली अदालत का फैसला उपलब्ध साक्ष्यों और कानून के अनुरूप है। उच्च न्यायालय यह भी देख सकता है कि मामले में दोषसिद्धि और सजा निर्धारित करते समय सभी आवश्यक कानूनी मानकों का पालन किया गया था या नहीं। हालांकि, अपील में उठाए गए विशिष्ट आधारों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
मामले की शुरुआत 12 अप्रैल 2025 की रात हुई थी। मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव निवासी अमित कश्यप उर्फ मिक्की की घर में हत्या कर दी गई थी। अगले दिन 13 अप्रैल को अमित का शव बिस्तर पर मिला था। शव के पास एक जिंदा सांप मौजूद था। शुरुआत में परिजनों को बताया गया कि अमित की मौत सांप के काटने से हुई है। लेकिन शरीर पर चोट के निशान और संदिग्ध परिस्थितियों को देखते हुए परिवार को संदेह हुआ।पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस मामले की दिशा बदल दी। रिपोर्ट में अमित की मौत का कारण सर्पदंश नहीं, बल्कि गला दबाया जाना सामने आया। इसके बाद पुलिस ने हत्या के एंगल से जांच शुरू की। जांच के दौरान अमित की पत्नी रविता और अमरदीप की भूमिका सामने आई। अभियोजन पक्ष के अनुसार, दोनों के बीच संबंध थे और अमित को इसकी जानकारी होने के बाद विवाद बढ़ गया था।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया था कि हत्या को सर्पदंश का रूप देने के लिए एक सपेरे से करीब एक हजार रुपये में सांप खरीदा गया था। अभियोजन के मुताबिक, अमित के सो जाने के बाद उसकी हत्या की गई और शव के पास सांप छोड़ दिया गया, ताकि परिवार और पुलिस को प्राकृतिक दुर्घटना का भ्रम हो। हालांकि, पोस्टमार्टम और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह कहानी गलत साबित हुई।मृतक अमित के भाई मोनू कश्यप ने 16 अप्रैल 2025 को रविता और अमरदीप के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस ने जांच पूरी कर अदालत में आरोपपत्र प्रस्तुत किया। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 12 गवाह पेश किए। इनमें मृतक के परिजन, चिकित्सक, सपेरा और जांच अधिकारी शामिल थे। अदालत ने गवाहों के बयान तथा अन्य साक्ष्यों पर विचार करने के बाद 7 अक्टूबर 2026 को दोनों को दोषी करार दिया।
इसके बाद 16 अक्टूबर 2026 को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयवीर सिंह नागर की अदालत ने रविता और अमरदीप को मौत की सजा सुनाई। अदालत ने हत्या की परिस्थितियों और साक्ष्य छिपाने के प्रयास को गंभीर मानते हुए मामले को दुर्लभतम श्रेणी का अपराध माना। इसके अतिरिक्त साक्ष्य मिटाने के अपराध में दोनों को सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा भी सुनाई गई।सजा सुनाए जाने के दौरान रविता ने अपने तीन छोटे बच्चों के भविष्य की चिंता जताई थी। वहीं अमरदीप ने अपने बुजुर्ग माता-पिता का हवाला देकर अदालत से नरमी बरतने की अपील की थी। अदालत ने बच्चों के हितों को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन को उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और देखभाल सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए थे।
अब हाईकोर्ट में मामला पहुंचने से कानूनी प्रक्रिया का अगला चरण महत्वपूर्ण हो गया है। उच्च न्यायालय के पास निचली अदालत की दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखने, सजा में बदलाव करने अथवा कानूनी आधार मिलने पर दोषसिद्धि को पलटने का अधिकार है। अदालत यह भी जांचेगी कि मृत्युदंड देने के लिए निर्धारित कठोर न्यायिक मानदंड पूरे होते हैं या नहीं।इस मामले में मृतक के परिजनों की नजर भी आगामी न्यायिक कार्यवाही पर रहेगी। निचली अदालत के फैसले के बाद अमित की मां मुनेश देवी ने न्याय मिलने की बात कही थी। अब उच्च न्यायालय की सुनवाई इस चर्चित हत्याकांड की आगे की कानूनी दिशा तय करेगी।फिलहाल यह स्पष्ट करना जरूरी है कि हाईकोर्ट में अपील दायर होने का अर्थ दोषसिद्धि या सजा का स्वतः निरस्त होना नहीं है। निचली अदालत का फैसला उच्च न्यायालय की समीक्षा के अधीन रहेगा। इस मामले में अपील दाखिल होने की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि और अगली सुनवाई की तारीख अभी उपलब्ध नहीं हो सकी है।