मीरजापुर। ऐतिहासिक नगरी चुनार अब अपनी सदियों पुरानी प्रस्तर कला और विश्वप्रसिद्ध बलुआ पत्थरों को नई पहचान दिलाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मीरजापुर जिले के चुनार में करीब सात करोड़ रुपये की लागत से ‘चुनार सैंड स्टोन हेरिटेज पार्क’ विकसित किया जाएगा। पर्यटन विभाग ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दे दी है। करीब पांच एकड़ क्षेत्र में बनने वाला यह हेरिटेज पार्क चुनार के शिल्पकारों, मूर्तिकारों और पत्थर उद्योग को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में मदद करेगा।
चुनार अपनी ऐतिहासिक धरोहरों, प्राचीन किले, गंगा तट और खासतौर पर अपने उच्च गुणवत्ता वाले बलुआ पत्थरों के लिए प्रसिद्ध है। यहां के पत्थरों का उपयोग सदियों से देश के कई ऐतिहासिक स्मारकों, मंदिरों और वास्तु निर्माण में किया जाता रहा है। अब सरकार इस विरासत को पर्यटन और व्यापार से जोड़ने की योजना पर काम कर रही है।
परियोजना के तहत नई कोतवाली परेड ग्राउंड के पास लगभग पांच एकड़ भूमि पर हेरिटेज पार्क का निर्माण किया जाएगा। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस योजना को स्वीकृति दी गई। अधिकारियों के अनुसार, पार्क में चुनार के बलुआ पत्थरों से तैयार मूर्तियों, कलाकृतियों, सजावटी वस्तुओं और वास्तुशिल्प सामग्री को प्रदर्शित करने की व्यवस्था होगी।
इस पार्क का उद्देश्य केवल एक पर्यटन स्थल बनाना नहीं है, बल्कि स्थानीय शिल्पकारों और पत्थर कारोबार से जुड़े लोगों को एक व्यवस्थित मंच उपलब्ध कराना भी है। लंबे समय से चुनार के कारीगरों को अपनी कला और उत्पादों के प्रदर्शन के लिए स्थायी स्थान की जरूरत महसूस हो रही थी। हेरिटेज पार्क बनने के बाद उन्हें अपनी कलाकृतियों को सीधे पर्यटकों, व्यापारियों और कला प्रेमियों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।
चुनार के बलुआ पत्थरों से बनी कलाकृतियां देश के कई हिस्सों के साथ-साथ विदेशों तक भी पहुंचती हैं। यहां के शिल्पकार साधारण पत्थरों को अपनी मेहनत और हुनर से आकर्षक मूर्तियों और कलात्मक वस्तुओं में बदल देते हैं। वर्तमान समय में चुनार क्षेत्र में कई प्रस्तर प्रसंस्करण इकाइयां संचालित हैं और बड़ी संख्या में कारीगर इस परंपरागत व्यवसाय से जुड़े हुए हैं।
माना जा रहा है कि हेरिटेज पार्क बनने के बाद इस कारोबार को नई गति मिलेगी। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक एक ही स्थान पर चुनार की कला और शिल्प को देख सकेंगे। इससे स्थानीय बाजार को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
चुनार की प्रस्तर कला का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। मौर्यकाल और गुप्तकाल से ही यहां के पत्थरों का इस्तेमाल महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों में होता रहा है। इतिहासकारों के अनुसार, चुनार के बलुआ पत्थरों की मजबूती और टिकाऊपन के कारण इनका उपयोग अशोक स्तंभों, लाटों और कई ऐतिहासिक संरचनाओं में किया गया।
आज भी चुनार के पत्थर अपनी गुणवत्ता और सुंदरता के लिए देशभर में पहचान रखते हैं। यहां की कला परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है और हजारों परिवार इससे जुड़े हुए हैं। हेरिटेज पार्क बनने से इस परंपरा को संरक्षण मिलने के साथ-साथ नई पीढ़ी के कलाकारों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
विधायक अनुराग सिंह ने बताया कि यह परियोजना चुनार की हजारों वर्षों पुरानी प्रस्तर कला को नई दिशा देने वाली है। उन्होंने कहा कि पार्क के माध्यम से स्थानीय कारीगरों को एक स्थायी मंच मिलेगा और उनकी कला को बड़े स्तर पर बाजार उपलब्ध होगा।
पर्यटन विभाग की इस पहल से चुनार में पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने की उम्मीद है। ऐतिहासिक स्थलों के साथ-साथ अब पर्यटक यहां की पत्थर कला और शिल्प को भी करीब से जान सकेंगे। इससे चुनार की पहचान एक ऐतिहासिक शहर के साथ-साथ कला और संस्कृति के प्रमुख केंद्र के रूप में भी मजबूत होगी।