UP चुनाव से पहले सपा में हलचल का दावा, राजभर ने अखिलेश पर साधा निशाना

Update: 2026-07-20 12:30 GMT

Lucknow लखनऊ :   उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां अभी से तेज होने लगी हैं। चुनाव में अभी काफी समय बाकी है, लेकिन प्रदेश की सियासत में बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) लगातार समाजवादी पार्टी (सपा) पर निशाना साध रही है। वहीं, सुभासपा प्रमुख और प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर भी सपा और अखिलेश यादव पर लगातार हमलावर नजर आ रहे हैं।

ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए सपा प्रमुख अखिलेश यादव को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव अपने चाचा और सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव का टिकट काट सकते हैं। राजभर के इस बयान के बाद यूपी की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है।

राजभर ने अपनी पोस्ट में परिवारवाद के मुद्दे को उठाते हुए अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि अखिलेश यादव अब समाजवादी पार्टी पर लगे परिवारवाद के आरोपों को हटाने के लिए कथित तौर पर "सफाई अभियान" चलाने की तैयारी कर रहे हैं। राजभर ने कहा कि इस अभियान की शुरुआत वह सबसे पहले अपने चाचा शिवपाल यादव को चुनावी मैदान से बाहर करके कर सकते हैं।

सुभासपा प्रमुख ने अखिलेश यादव को सलाह देते हुए कहा कि अगर पार्टी में बदलाव करना है तो केवल परिवार के लोगों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मेहनत करने वाले पुराने और कर्मठ कार्यकर्ताओं को भी मौका देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सैफई परिवार से जुड़े नेताओं को हटाकर संगठन के जमीनी कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाने की जरूरत है।

ओम प्रकाश राजभर ने अपने बयान में शिवपाल यादव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि शिवपाल यादव अब उम्रदराज हो चुके हैं, ऐसे में उनके साथ इस तरह का व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। राजभर ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या राजनीतिक बदलाव के नाम पर अपने ही परिवार के वरिष्ठ नेता को किनारे करना उचित होगा।

हालांकि, राजभर के इस दावे पर समाजवादी पार्टी की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सपा और अखिलेश यादव पहले भी भाजपा और सहयोगी दलों के नेताओं के ऐसे बयानों को राजनीतिक बयानबाजी बताते रहे हैं।

गौरतलब है कि शिवपाल यादव समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे हैं और लंबे समय तक मुलायम सिंह यादव के साथ पार्टी संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच पिछले वर्षों में राजनीतिक मतभेद भी सामने आए थे, लेकिन बाद में दोनों नेताओं के बीच संबंधों में सुधार हुआ और शिवपाल यादव सपा के साथ सक्रिय भूमिका में नजर आए।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में परिवारवाद हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रहा है। भाजपा समेत विपक्षी दल सपा पर परिवारवाद का आरोप लगाते रहे हैं, जबकि सपा इसे पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के योगदान से जोड़कर देखती है।

फिलहाल ओम प्रकाश राजभर के इस बयान ने यूपी की राजनीतिक बहस को नया मुद्दा दे दिया है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ऐसे दावे और आरोप-प्रत्यारोप आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।

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