लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के बढ़ते दुरुपयोग को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि आज सोशल मीडिया केवल संवाद और सूचना का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि कुछ ताकतों के लिए षड्यंत्र का माध्यम भी बन गया है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भारत विरोधी ताकतें सोशल मीडिया का इस्तेमाल देश के खिलाफ अफवाहें फैलाने और समाज को गुमराह करने के लिए कर रही हैं। उन्होंने लोगों से ऐसे किसी भी भ्रामक प्रचार से सावधान रहने और देश की एकता को कमजोर करने वाली गतिविधियों से बचने की अपील की।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ऐतिहासिक 'काकोरी ट्रेन एक्शन' के 101 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित 'काकोरी ट्रेन कांड शताब्दी वर्ष' के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास, क्रांतिकारियों के योगदान और देश के सामने मौजूद सामाजिक चुनौतियों पर विस्तार से अपनी बात रखी।
सीएम योगी ने कहा कि भारत बिना किसी कारण के गुलाम नहीं बना था। इसके पीछे कई कारण थे, जिनमें समाज के भीतर का विभाजन और भारत के खिलाफ रचे गए षड्यंत्र प्रमुख थे। उन्होंने कहा कि आज भी कुछ ताकतें जाति, धर्म और भाषा के नाम पर समाज को बांटकर भारत को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं। उनके अनुसार, सोशल मीडिया इस तरह की गतिविधियों के लिए एक नया माध्यम बन गया है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत विरोधी ताकतें सोशल मीडिया के जरिए झूठी और भ्रामक सूचनाएं फैलाकर लोगों को गुमराह करने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि समाज को ऐसे प्रयासों के प्रति जागरूक रहना होगा। मुख्यमंत्री के मुताबिक, सोशल मीडिया पर किसी भी सूचना को बिना जांचे-परखे आगे बढ़ाना कई बार गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है। ऐसे में नागरिकों को जिम्मेदारी के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारियों को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने युवा पीढ़ी को देश के क्रांतिकारियों से दूर रखा, उन्होंने उनके साथ बड़ा अन्याय किया। योगी ने आरोप लगाया कि आजादी के बाद राम प्रसाद बिस्मिल, रोशन सिंह, अशफाक उल्ला खान, चंद्रशेखर आजाद, वीर सावरकर, भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे क्रांतिकारियों को लोगों की स्मृति से दूर रखने के प्रयास किए गए।
योगी ने चौरीचौरा की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि 1922 में गोरखपुर में हुई घटना के बाद कांग्रेस ने आंदोलन स्थगित कर दिया था और खुद को इस प्रकरण से अलग कर लिया था। उन्होंने कहा कि पंडित मदन मोहन मालवीय ने इन क्रांतिकारियों की ओर से मुकदमा लड़ा था। मुख्यमंत्री के अनुसार, कई क्रांतिकारियों को आजीवन कारावास की सजा मिली थी। उन्होंने दावा किया कि लखनऊ में कांग्रेस से जुड़े दो नेताओं और वकीलों ने अदालत में इन क्रांतिकारियों के खिलाफ बहस की थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के वास्तविक नायकों को सम्मान दिलाने के लिए 2014 के बाद विशेष प्रयास किए गए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान डॉ. बीआर आंबेडकर, वीर सावरकर, राम प्रसाद बिस्मिल, रोशन सिंह और अशफाक उल्ला खान से जुड़े स्मारकों के विकास पर काम किया जा रहा है।
योगी आदित्यनाथ ने काकोरी की ऐतिहासिक घटना के नाम को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इसे 'काकोरी डकैती' कहने के बजाय 'काकोरी ट्रेन एक्शन' के रूप में संदर्भित किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, अंग्रेजों ने इस घटना को डकैती बताया था, जबकि स्वतंत्र भारत में भी लंबे समय तक इसे 'काकोरी डकैती कांड' कहा जाता रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसा करके क्रांतिकारियों के योगदान और उनके उद्देश्य को उचित सम्मान नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को नई पीढ़ी तक सही स्वरूप में पहुंचाना जरूरी है। युवाओं को यह जानना चाहिए कि देश की आजादी के लिए कितने लोगों ने अपना जीवन समर्पित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के आंदोलन के नायकों के संघर्ष से प्रेरणा लेकर देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता को मजबूत करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
सीएम योगी के संबोधन में सोशल मीडिया के जरिए फैलाए जा रहे कथित दुष्प्रचार और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को लेकर राजनीति दोनों प्रमुख मुद्दे रहे। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी सूचना को स्वीकार करने से पहले उसकी सत्यता जांचें और समाज में विभाजन पैदा करने वाली अफवाहों से बचें। साथ ही उन्होंने युवाओं को देश के स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन और उनके संघर्ष से प्रेरणा लेने का संदेश दिया।