गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को विजयादशमी के पावन अवसर पर गोरखपुर स्थित प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान मुख्यमंत्री पारंपरिक महंत की वेशभूषा में नजर आए और उन्होंने मंदिर की ऐतिहासिक धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया। मुख्यमंत्री ने भगवान श्री गोरखनाथ जी की विशेष पूजा करते हुए प्रदेश और देशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि तथा उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। इसके बाद उन्होंने विजयादशमी के अवसर पर निकाले गए पारंपरिक विजय जुलूस का नेतृत्व किया।विजयादशमी के अवसर पर गोरखनाथ मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में मंदिर की परंपराओं का पालन करते हुए पूजा संपन्न की। यह आयोजन गोरखनाथ मंदिर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
महंत की पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए मुख्यमंत्री
विजयादशमी के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने सामान्य राजनीतिक कार्यक्रमों से अलग पारंपरिक धार्मिक स्वरूप में दिखाई दिए। उन्होंने गोरक्षपीठ की परंपरा के अनुरूप महंत की वेशभूषा धारण की और मंदिर में पूजा-अर्चना की।गोरखनाथ मंदिर में विजयादशमी का विशेष महत्व है। इस अवसर पर गोरक्षपीठाधीश्वर द्वारा धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन और पारंपरिक विजय जुलूस का नेतृत्व करने की परंपरा रही है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राजनीति के साथ गोरक्षपीठ के प्रमुख की जिम्मेदारी भी निभाते हैं। ऐसे में विजयादशमी के अवसर पर उनकी भूमिका धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
भगवान गोरखनाथ की पूजा कर मांगा आशीर्वाद
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंदिर में श्री गोरखनाथ जी की विधि-विधान से पूजा की। उन्होंने भगवान गोरखनाथ को भगवान शिव का अवतार बताते हुए श्रद्धापूर्वक आराधना की।पूजा के दौरान मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहने की प्रार्थना की। उन्होंने लोगों के अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण के लिए भी मंगलकामना की।गोरखनाथ मंदिर नाथ संप्रदाय की प्रमुख पीठों में शामिल है। यहां गुरु गोरखनाथ की आराधना की जाती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
विजय जुलूस का किया नेतृत्व
विजयादशमी की पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पारंपरिक विजय जुलूस का नेतृत्व किया। यह आयोजन गोरखनाथ मंदिर की ऐतिहासिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है।विजय जुलूस के माध्यम से विजयादशमी के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को प्रदर्शित किया जाता है। यह पर्व धर्म, सत्य और न्याय की विजय का प्रतीक माना जाता है।गोरखपुर में गोरक्षपीठ की विजयादशमी परंपराओं का विशेष स्थान है। वर्षों से इस अवसर पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं।
ढोल-नगाड़ों के साथ निकली भव्य शोभायात्रा
गोरखनाथ मंदिर से निकली विजयादशमी शोभायात्रा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रथ पर सवार हुए। ढोल-नगाड़ों और जय श्रीराम के जयघोष के बीच शोभायात्रा मानसरोवर रामलीला मैदान की ओर रवाना हुई।इस आयोजन में धार्मिक परंपराओं के साथ सामाजिक सद्भाव की झलक भी देखने को मिली। स्थानीय मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों द्वारा शोभायात्रा के स्वागत की परंपरा भी इस उत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
नाथ संप्रदाय की प्राचीन परंपरा का निर्वहन
गोरखनाथ मंदिर नाथ संप्रदाय का प्रमुख धार्मिक केंद्र है। यहां गुरु-शिष्य परंपरा, योग, अनुशासन और आध्यात्मिक साधना को विशेष महत्व दिया जाता है।विजयादशमी के दिन होने वाला श्रीनाथ पूजन इसी आध्यात्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुख्यमंत्री ने मंदिर में पूजा के साथ गोसेवा भी की और भीम सरोवर में मछलियों को लाई खिलाई।
विजयादशमी पर दिया लोककल्याण का संदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विजयादशमी के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए इस पर्व को धर्म की अधर्म पर विजय का प्रतीक बताया।उन्होंने कहा कि विजयादशमी समाज को सत्य, न्याय, एकता और नैतिक मूल्यों के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। यह पर्व भगवान श्रीराम के आदर्शों का स्मरण कराता है और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने का संदेश देता है।गोरखनाथ मंदिर में आयोजित पूजा-अर्चना और पारंपरिक विजय जुलूस के माध्यम से मुख्यमंत्री ने गोरक्षपीठ की धार्मिक विरासत का निर्वहन किया। उन्होंने भगवान गोरखनाथ से प्रदेशवासियों के अच्छे स्वास्थ्य, समृद्धि और सभी के कल्याण की कामना की।
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