वाराणसी : गो संरक्षण और गो सम्मान की मांग को लेकर संत समाज ने सोमवार को एक विशाल पदयात्रा निकाली। "गो सम्मान आवाह्न अभियान" के तहत आयोजित इस यात्रा में संतों और श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन करते हुए शिवपुर के पुरानी चुंगी से जिला मुख्यालय तक मार्च किया। इस दौरान संत समाज ने गौ हत्या निषेध के लिए केंद्रीय कानून बनाने, गौ माता को राष्ट्र माता का सम्मान देने और केंद्रीय गो मंत्रालय की स्थापना सहित 30 सूत्रीय मांगों को प्रमुखता से उठाया।
पदयात्रा में बड़ी संख्या में संत, धार्मिक संगठनों से जुड़े लोग और गौ संरक्षण समर्थक शामिल हुए। यात्रा के दौरान श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए आगे बढ़े और गो संरक्षण को लेकर जनजागरूकता का संदेश दिया। संत समाज ने अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के उद्देश्य से यह आयोजन किया।
यात्रा की विशेष बात यह रही कि इसमें बुलडोजर को भी शामिल किया गया था। आयोजकों के अनुसार, यह प्रतीकात्मक रूप से अभियान की मजबूती और उनकी मांगों को प्रभावी तरीके से सामने रखने का प्रयास था। बुलडोजर के साथ निकली इस पदयात्रा ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
संत समाज की ओर से केंद्र सरकार से मांग की गई कि देशभर में गौ हत्या पर रोक लगाने के लिए एक समान केंद्रीय कानून बनाया जाए। उनका कहना है कि गाय भारतीय संस्कृति और परंपरा में विशेष स्थान रखती है, इसलिए इसके संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
आंदोलनकारियों ने गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा देने की मांग भी रखी। संत समाज का कहना है कि गायों के संरक्षण और संवर्धन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक ठोस नीति की आवश्यकता है। इसी क्रम में उन्होंने अलग से केंद्रीय गो मंत्रालय की स्थापना की मांग उठाई, ताकि गो संरक्षण से जुड़े कार्यों को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सके।
पदयात्रा में शामिल संतों ने कहा कि गोवंश संरक्षण केवल धार्मिक विषय नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने सरकार से अपील की कि गोशालाओं की स्थिति सुधारने, आवारा गोवंश की देखभाल और गो आधारित योजनाओं को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
आयोजकों ने बताया कि अभियान के तहत कुल 30 मांगें रखी गई हैं। इनमें गौ संरक्षण से जुड़े विभिन्न मुद्दों के साथ-साथ गोवंश के लिए बेहतर व्यवस्था, नीतिगत सुधार और कानूनी प्रावधानों की मांग शामिल है।
शिवपुर के पुरानी चुंगी से शुरू हुई पदयात्रा जिला मुख्यालय तक पहुंची। रास्ते में कई स्थानों पर लोगों ने यात्रा का स्वागत किया। श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों और नारों के माध्यम से गो संरक्षण के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।
यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन भी सतर्क रहा। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को देखते हुए पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए।
संत समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी विरोध या विवाद को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि गो संरक्षण के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता और नीति निर्माण की जरूरत है।
वाराणसी धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता है। ऐसे में गो संरक्षण से जुड़े इस अभियान को संत समाज ने धार्मिक भावनाओं और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़कर प्रस्तुत किया।
पदयात्रा के समापन के बाद संत समाज की ओर से जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपे जाने की बात कही गई। प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई कि उनकी मांगों पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी और गो संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
गो सम्मान आवाह्न अभियान के तहत निकाली गई इस पदयात्रा ने एक बार फिर गो संरक्षण के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। अब संत समाज की ओर से रखी गई 30 सूत्रीय मांगों पर प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा।