देवरिया डीएम का एक्शन मोड, विकास कार्यों में लापरवाही पर वेतन रोकने का आदेश
देवरिया : उत्तर प्रदेश के देवरिया में विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में जल निगम, विद्युत, सिंचाई, लघु सिंचाई, नलकूप और बाढ़ विभाग की परियोजनाओं की प्रगति का विस्तृत आकलन किया गया। बैठक में जनहित से जुड़ी योजनाओं को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने के निर्देश देते हुए जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि विकास कार्यों में लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि कार्यों में देरी या लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
बैठक के दौरान नगर पालिका क्षेत्र में निर्माणाधीन नाले के कार्य की समीक्षा करते समय यह सामने आया कि विद्युत पोल समय पर शिफ्ट नहीं किए जाने के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हो रहा है। इस पर जिलाधिकारी ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने अधिशासी अभियंता (विद्युत-सदर) से तत्काल स्पष्टीकरण तलब करते हुए उनका वेतन रोकने के निर्देश जारी किए। जिलाधिकारी ने कहा कि विभागों के बीच बेहतर समन्वय की कमी के कारण विकास कार्य बाधित नहीं होने चाहिए और प्रत्येक अधिकारी अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभाए।
समीक्षा बैठक में जल निगम (ग्रामीण एवं नगरीय), नलकूप, सिंचाई तथा बाढ़ विभाग की विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई। अधिकारियों ने जानकारी दी कि जिले के विभिन्न क्षेत्रों में नए ओवरहेड टैंक निर्माण के लिए भूमि की आवश्यकता है। सलेमपुर में आठ, सदर क्षेत्र में पंद्रह, रुद्रपुर में तीन, बरहज में दो और भाटपाररानी में एक स्थान पर भूमि उपलब्ध कराई जानी है। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित उपजिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो और सभी मामलों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि पेयजल परियोजनाएं समय पर पूरी हो सकें।
जिलाधिकारी ने जल निगम के अधिकारियों को निर्देश दिया कि जहां-जहां पाइपलाइन बिछाने के दौरान सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं, वहां शीघ्र मरम्मत कराई जाए और इसकी विस्तृत रिपोर्ट प्रशासन को उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि लोगों को निर्माण कार्यों के कारण अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि पेयजल आपूर्ति अंतिम छोर तक निर्बाध रूप से पहुंचे और किसी भी गांव या मोहल्ले में जल संकट की स्थिति उत्पन्न न हो।
सिंचाई विभाग की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने रजवाहों और नहरों की नियमित सफाई कराने, अंतिम छोर तक सिंचाई का पानी पहुंचाने तथा किए गए कार्यों के फोटोग्राफ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
बैठक में बाढ़ विभाग की तैयारियों की भी विस्तार से समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने सभी निर्माणाधीन बाढ़ सुरक्षा परियोजनाओं को समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कानूनगो के माध्यम से कार्यों का स्थलीय सत्यापन कराने को कहा ताकि गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए राहत शिविरों के लिए चिन्हित विद्यालयों की सूची पहले से तैयार रखने और संबंधित प्रधानाचार्यों के मोबाइल नंबर उपलब्ध रखने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही बाढ़ राहत सामग्री, नाव, दवाइयों तथा अन्य आवश्यक संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।
लघु सिंचाई विभाग को निर्देश देते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि अधिक से अधिक किसानों को विभागीय योजनाओं से जोड़ा जाए और पात्र किसानों को निःशुल्क बोरिंग सुविधा प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए रूफ वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू करने पर भी बल दिया। उनका कहना था कि वर्षा जल का संरक्षण भविष्य की जल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
जिलाधिकारी ने बैठक के अंत में सभी विभागीय अधिकारियों से कहा कि विकास योजनाओं का उद्देश्य आम जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसलिए प्रत्येक अधिकारी समयबद्ध तरीके से कार्यों को पूरा करें और गुणवत्ता से कोई समझौता न करें। उन्होंने दोहराया कि यदि किसी परियोजना में अनावश्यक देरी या लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय करते हुए कठोर कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी राजेश कुमार सिंह, मुख्य राजस्व अधिकारी वी.के. सिंह, जल निगम, सिंचाई, बाढ़, नलकूप, लघु सिंचाई तथा विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता सहित सभी संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। समीक्षा बैठक के माध्यम से जिला प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया कि जनहित से जुड़ी परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाएगा और लापरवाही करने वाले अधिकारियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।