भूमि रिकॉर्ड और मौके की जमीन में अंतर, एक्सप्रेसवे अधिग्रहण में देरी

Update: 2026-07-11 12:43 GMT

उत्तर प्रदेश: महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए बिजनौर जिले में भूमि सत्यापन का काम तेजी से चल रहा है। तहसील सदर क्षेत्र के 63 चयनित गांवों में से 40 गांवों में किसानों की भूमि और रिकॉर्ड की जांच पूरी हो चुकी है, जबकि 23 गांवों में सत्यापन प्रक्रिया अभी जारी है। जांच के दौरान कुछ गांवों में राजस्व रिकॉर्ड और मौके पर मौजूद जमीन की स्थिति में अंतर सामने आया है।

अधिकारियों के अनुसार, भूमि सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सत्यापन के दौरान किसानों के भूमि अंश, स्वामित्व और वास्तविक स्थिति की जांच की जा रही है, ताकि अधिग्रहण प्रक्रिया में किसी तरह की परेशानी न आए।

गंगा एक्सप्रेसवे अमरोहा से बिजनौर होते हुए हरिद्वार तक प्रस्तावित है। इस परियोजना में बिजनौर जिले की तीन तहसीलों के कुल 105 गांव शामिल किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक 63 गांव तहसील सदर क्षेत्र के हैं। एक्सप्रेसवे निर्माण को लेकर प्रशासन ने भूमि संबंधी रिकॉर्ड को दुरुस्त करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

सर्वे के दौरान ग्राम झाल समेत कई गांवों में रिकॉर्ड और मौके पर मौजूद भूमि के क्षेत्रफल में अंतर पाया गया है। कुछ स्थानों पर जमीन का अंतर काफी अधिक मिला है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों की जांच कर रिकॉर्ड में जरूरी सुधार किए जाएंगे, ताकि भविष्य में भूमि अधिग्रहण के दौरान विवाद की स्थिति पैदा न हो।

जानकारी के मुताबिक, नोएडा की एसए इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी के विशेषज्ञों ने चयनित गांवों में सर्वे का कार्य पूरा करने के बाद अपनी रिपोर्ट उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) को सौंप दी थी। अब स्थानीय स्तर पर राजस्व विभाग की टीम वास्तविक स्थिति का सत्यापन कर रही है।

भूमि सत्यापन के दौरान किसानों के नाम, भूमि का क्षेत्रफल, खसरा नंबर और मौके की स्थिति का मिलान किया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य है कि सभी रिकॉर्ड सही होने के बाद ही अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाए, जिससे किसानों को मुआवजा देने और अन्य प्रक्रियाओं में कोई बाधा न आए।

गंगा एक्सप्रेसवे को प्रदेश की बड़ी सड़क परियोजनाओं में शामिल किया जा रहा है। यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा और औद्योगिक एवं आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में मददगार माना जा रहा है।

बिजनौर में इस परियोजना को लेकर प्रशासनिक स्तर पर लगातार बैठकें की जा रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि सत्यापन कार्य जल्द पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जिन गांवों में रिकॉर्ड और जमीन की स्थिति में अंतर मिला है, वहां संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर खामियों को दूर किया जाएगा।

भूमि संबंधी सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद गंगा एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहण कार्य शुरू होगा। प्रशासन की कोशिश है कि परियोजना समय पर आगे बढ़े और किसानों को भी नियमानुसार सभी सुविधाएं और मुआवजा मिल सके।

Tags:    

Similar News