लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची की शुद्धता और चुनाव संबंधी कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) को कड़े निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में गलतियां, आवेदनों के निस्तारण में अनावश्यक देरी और निगरानी में लापरवाही पाए जाने पर उनकी जवाबदेही तय की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।

शुक्रवार, 30 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर हिंदी में विस्तृत निर्देश साझा किए। कार्यालय ने कहा कि शुद्ध, त्रुटिरहित और अद्यतन मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया की आधारशिला है। इसलिए मतदाता सूची से संबंधित प्रत्येक कार्य को गंभीरता और निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करना आवश्यक है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी केवल अधीनस्थ अधिकारियों की नहीं है। जिला निर्वाचन अधिकारी को अपने जिले में पूरी प्रक्रिया की निगरानी करनी होगी।

वोटर लिस्ट में गलती होने पर DM भी होंगे जिम्मेदार

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13कक (13AA), निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 और भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का उल्लेख करते हुए अधिकारियों की जिम्मेदारी स्पष्ट की है।

निर्देशों के अनुसार, जिला निर्वाचन अधिकारी अपने जिले में मतदाता सूची से जुड़े सभी कार्यों के समन्वय, पर्यवेक्षण, निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए जिम्मेदार होंगे।

इसका अर्थ है कि यदि किसी जिले में मतदाता सूची में गंभीर गलतियां सामने आती हैं या आवेदनों का निस्तारण समय पर नहीं होता है, तो केवल निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) या सहायक अधिकारियों पर ही जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकेगी।

जिला निर्वाचन अधिकारी की निगरानी संबंधी भूमिका की भी समीक्षा होगी।

हालांकि, किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई मामले की परिस्थितियों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर तय की जाएगी।

हर दिन ECI-Net पर लॉगिन करना होगा अनिवार्य

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को प्रतिदिन ईसीआई-नेट (ECI-Net) प्लेटफॉर्म पर लॉगिन करने के निर्देश दिए हैं।

उन्हें अपने निर्धारित लॉगिन के माध्यम से मतदाता सूची से संबंधित कार्यों की नियमित समीक्षा करनी होगी।

इस दौरान लंबित आवेदनों, अधिकारियों की सक्रियता, मतदाता सूची की गलतियों और शिकायतों के समाधान की स्थिति की निगरानी की जाएगी।

यदि किसी जिले में आवेदन अनावश्यक रूप से लंबित पाए जाते हैं, अधिकारियों के लॉगिन निष्क्रिय रहते हैं या उनकी प्रोफाइल अधूरी मिलती है, तो संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी से जवाब मांगा जा सकता है।

निर्वाचन कार्यालय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची से जुड़े काम केवल औपचारिक रूप से पूरे न किए जाएं, बल्कि उनकी गुणवत्ता भी बनी रहे।

फॉर्म-6, 6A, 7 और 8 पर विशेष निगरानी

निर्वाचन कार्यालय ने मतदाता सूची से संबंधित चार प्रमुख आवेदन फॉर्म की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

फॉर्म-6 का उपयोग नए मतदाता के रूप में नाम दर्ज कराने के लिए किया जाता है।

फॉर्म-6A विदेश में रहने वाले पात्र भारतीय नागरिकों के मतदाता पंजीकरण से संबंधित है।

फॉर्म-7 मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति अथवा नाम हटाने के आवेदन के लिए उपयोग होता है।

वहीं, फॉर्म-8 के जरिए मतदाता अपने विवरण में सुधार, निवास स्थान बदलने और मतदाता पहचान पत्र से जुड़े निर्धारित बदलावों के लिए आवेदन कर सकते हैं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि इन फॉर्मों का निस्तारण निर्धारित प्रक्रिया और समयसीमा के अनुसार होना चाहिए।

गलत अधिकारी को भेजे गए आवेदन तुरंत होंगे स्थानांतरित

निर्देशों के अनुसार, यदि कोई आवेदन गलत निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी या सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को भेज दिया गया है, तो उसे तत्काल सही अधिकारी को स्थानांतरित किया जाए।

इसके अतिरिक्त किसी अन्य जिले से संबंधित आवेदन प्राप्त होने पर उसे बिना देरी संबंधित जिले के निर्वाचन अधिकारी को भेजना होगा।

जिन आवेदनों को अब तक किसी अधिकारी को आवंटित नहीं किया गया है, उन्हें भी तत्काल संबंधित अधिकारी को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

निर्वाचन कार्यालय ने कहा है कि आवेदन किसी भी स्तर पर अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रहने चाहिए।

BLO और अन्य अधिकारियों की प्रोफाइल होगी जांची

जिला निर्वाचन अधिकारियों को अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों की डिजिटल प्रोफाइल का सत्यापन करने का भी निर्देश दिया गया है।

इसके अंतर्गत उप जिला निर्वाचन अधिकारी, ईआरओ, एईआरओ, बीएलओ सुपरवाइजर और बूथ लेवल अधिकारियों की प्रोफाइल में दर्ज नाम, मोबाइल नंबर, पदनाम और फोटो की शुद्धता की जांच की जाएगी।

साथ ही इन अधिकारियों के अंतिम लॉगिन की स्थिति भी रोज देखी जाएगी।

निर्वाचन कार्यालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कोई अधिकारी अपना यूजर आईडी, पासवर्ड या ओटीपी किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा नहीं करेगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य निर्वाचन संबंधी डिजिटल कार्यों में सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

BLO को 48 घंटे में करना होगा मतदाता से संपर्क

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मतदाताओं के लिए उपलब्ध 'बुक ए कॉल विद बीएलओ' सुविधा को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं।

यह सुविधा ईसीआई-नेट ऐप और निर्वाचन आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर उपलब्ध है।

निर्देशों के अनुसार, नागरिक की ओर से की गई कॉल रिक्वेस्ट 48 घंटे से अधिक लंबित नहीं रहनी चाहिए।

यदि कोई बूथ लेवल अधिकारी निर्धारित समय के भीतर संपर्क नहीं करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

इसके अतिरिक्त वास्तविक संपर्क किए बिना किसी रिक्वेस्ट को 'Contacted' या 'Unavailable' दिखाने पर भी सख्ती बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

शिकायतों के निस्तारण की होगी साप्ताहिक समीक्षा

निर्वाचन कार्यालय ने मतदाता सूची और मतदाता फोटो पहचान पत्र (EPIC) से जुड़ी शिकायतों के समाधान को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।

राष्ट्रीय शिकायत सेवा पोर्टल (NGSP) और अन्य माध्यमों से प्राप्त शिकायतों की प्रतिदिन समीक्षा की जाएगी।

जिला निर्वाचन अधिकारी स्वयं या उनके द्वारा नामित वरिष्ठ अधिकारी शिकायतों के जवाबों की नमूना जांच करेंगे।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिकायतों का निस्तारण केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे।

इसके साथ ही प्रत्येक सप्ताह समीक्षा बैठक आयोजित कर लंबित मामलों की प्रगति का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं।

पीलीभीत में गड़बड़ियों के बाद बढ़ी सख्ती

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची की निगरानी को लेकर सख्ती ऐसे समय बढ़ाई गई है, जब कई क्षेत्रों में मतदाता विवरण से संबंधित गड़बड़ियां सामने आई हैं।

पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता संबंधी फॉर्मों की जांच के दौरान बड़ी संख्या में त्रुटिपूर्ण प्रविष्टियों का मामला सामने आया था।

रिपोर्टों के अनुसार, 10,470 त्रुटिपूर्ण फॉर्म स्वीकार किए जाने के मामले में वर्तमान और पूर्व जिला निर्वाचन अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।

इसके अलावा अप्रैल में विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद दर्ज किए गए मतदाता आवेदनों की समीक्षा के निर्देश भी जारी किए गए हैं।

चुनावी तैयारियों के बीच बड़ा संदेश

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर मतदाता सूची की शुद्धता महत्वपूर्ण है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी के ताजा निर्देशों से स्पष्ट है कि चुनाव प्रशासन अब जिला स्तर पर निगरानी और जवाबदेही को अधिक मजबूत बनाने पर जोर दे रहा है।

निर्वाचन कार्यालय ने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनावश्यक देरी या त्रुटिपूर्ण कार्यप्रणाली को गंभीरता से लिया जाएगा।

इस कदम का उद्देश्य प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम सही तरीके से मतदाता सूची में दर्ज करना और मतदाताओं को समय पर सेवाएं उपलब्ध कराना है।

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