आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां इंसानों के अंतिम संस्कार के लिए बनाए गए श्मशान घाट पर एक कुत्ते का दाह संस्कार किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मामला ताजगंज थाना क्षेत्र स्थित मोक्षधाम का है, जहां कथित तौर पर एक कुत्ते की चिता सजाकर उसका अंतिम संस्कार किया गया। आरोप है कि इसके लिए 700 रुपये भी लिए गए थे। घटना की जानकारी मिलने के बाद हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों ने नाराजगी जताई और पुलिस से शिकायत की। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मोक्षधाम की प्रबंधन कमेटी के पदाधिकारियों, प्रबंधक और कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि, 700 रुपये के लेनदेन की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
परिचित के अंतिम संस्कार में पहुंचे व्यक्ति ने देखी कुत्ते की चिता
जानकारी के अनुसार, यह मामला बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 का है। आगरा कैंट के मुस्तफा क्वार्टर निवासी अनुपम शर्मा अपने एक परिचित के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए ताजगंज मोक्षधाम पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी नजर श्मशान घाट के उस स्थान पर पड़ी, जहां सामान्य रूप से इंसानों के शवों का अंतिम संस्कार किया जाता है।
अनुपम शर्मा के अनुसार, वहां एक कुत्ते की चिता जल रही थी। यह देखकर वह हैरान रह गए। उन्होंने मौके पर मौजूद कर्मचारियों और प्रबंधन से जुड़े लोगों से इसकी जानकारी मांगी। इस दौरान कथित तौर पर विवाद की स्थिति बन गई।
शिकायतकर्ता का कहना है कि धार्मिक परंपराओं से जुड़े स्थान पर इस तरह कुत्ते का अंतिम संस्कार कराया जाना अनुचित है। उन्होंने इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला बताते हुए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की।
हिंदू रीति-रिवाज से किया गया कुत्ते का अंतिम संस्कार
शिकायतकर्ता के अनुसार, जब उन्होंने इस बारे में सवाल किया तो वहां मौजूद एक व्यक्ति ने बताया कि कुत्ते का अंतिम संस्कार उसी ने हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार कराया है।
बताया जा रहा है कि कुत्ते की मौत के बाद उसका शव मोक्षधाम लाया गया था। इसके बाद वहां चिता तैयार कर उसका दाह संस्कार किया गया। हालांकि, कुत्ते को वहां लाने वाले व्यक्ति की पहचान और प्रबंधन से अनुमति मिलने की परिस्थितियां पुलिस जांच का विषय हैं।
घटना सामने आने के बाद इस बात को लेकर सवाल उठने लगे कि इंसानों के अंतिम संस्कार के लिए निर्धारित स्थान पर किसी जानवर का दाह संस्कार किसकी अनुमति से कराया गया।
700 रुपये लेकर चिता सजाने का आरोप
इस मामले में एक और आरोप सामने आया है कि कुत्ते का अंतिम संस्कार कराने के लिए 700 रुपये दिए गए थे। शिकायत में उठाए गए सवालों के बाद श्मशान घाट की व्यवस्थाओं और वहां काम करने वाले कर्मचारियों की जिम्मेदारी पर भी चर्चा शुरू हो गई है।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में इस रकम के भुगतान की आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि रकम किसने ली और किस मद में ली गई थी।
यदि इस संबंध में कोई भुगतान हुआ है तो जांच के दौरान यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि वह निर्धारित शुल्क था या बिना अनुमति लिया गया पैसा।
प्रबंधन की अनुमति और कर्मचारियों की भूमिका स्पष्ट होने के बाद ही इस आरोप की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
विरोध करने पर अभद्रता करने का भी आरोप
शिकायतकर्ता अनुपम शर्मा का आरोप है कि जब उन्होंने मोक्षधाम में कुत्ते का अंतिम संस्कार करने पर आपत्ति जताई, तो वहां मौजूद प्रबंधन से जुड़े लोगों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि सवालों का संतोषजनक जवाब देने के बजाय उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की शिकायत पुलिस से की।
हालांकि, मोक्षधाम का संचालन करने वाली श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी ने अभद्रता के आरोपों से इनकार किया है। कमेटी के अध्यक्ष अनिल जिंदल के अनुसार, जानकारी मिलने पर पदाधिकारी मौके पर पहुंचे और मामले की जांच की। उन्होंने यह भी कहा कि कर्मचारियों को भविष्य में ऐसी घटना दोबारा नहीं होने देने के लिए सख्त हिदायत दी गई है।
पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, जांच शुरू
घटना को लेकर शिकायत मिलने के बाद ताजगंज थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस ने मोक्षधाम की प्रबंधन कमेटी के पदाधिकारियों, प्रबंधक और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच शुरू कर दी है।
एसीपी ताज सुरक्षा यतेंद्र नागर के अनुसार, शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले में लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है।
पुलिस के सामने यह स्पष्ट करने की चुनौती है कि कुत्ते के अंतिम संस्कार की अनुमति किसने दी थी और इसमें संबंधित कर्मचारियों की क्या भूमिका रही।
इसके साथ ही अभद्रता के आरोपों की भी जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही संबंधित लोगों की कानूनी जिम्मेदारी तय हो सकेगी।
धार्मिक परंपराओं और पशु प्रेम को लेकर उठी बहस
इस घटना ने धार्मिक परंपराओं और पशुओं के प्रति संवेदनशीलता के बीच एक नई चर्चा को जन्म दिया है। कई परिवार अपने पालतू जानवरों को परिवार का सदस्य मानते हैं और उनकी मृत्यु के बाद सम्मानजनक तरीके से अंतिम विदाई देते हैं।
दूसरी ओर, धार्मिक परंपराओं के अनुसार संचालित श्मशान घाटों में अंतिम संस्कार की व्यवस्थाएं और नियम अलग हो सकते हैं।
ऐसे में सवाल यह नहीं है कि किसी जानवर का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया जा सकता है या नहीं, बल्कि यह है कि संबंधित स्थल पर इसके लिए अनुमति और निर्धारित व्यवस्था मौजूद थी या नहीं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के विवादों से बचने के लिए स्थानीय प्रशासन और संबंधित संस्थाओं को पशुओं के अंतिम संस्कार के लिए स्पष्ट व्यवस्थाएं विकसित करनी चाहिए।
मोक्षधाम की व्यवस्थाओं पर भी उठे सवाल
इस घटना के सामने आने के बाद मोक्षधाम के संचालन और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। श्मशान घाट जैसे संवेदनशील स्थान पर किसी भी गतिविधि के लिए स्पष्ट नियमों का पालन होना आवश्यक माना जाता है।
यदि निर्धारित व्यवस्था से हटकर कोई कार्य किया जाता है तो उसकी जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। यही कारण है कि शिकायतकर्ता ने प्रबंधन से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की मांग की है।
प्रबंधन कमेटी की ओर से कर्मचारियों को भविष्य में सावधानी बरतने की हिदायत दिए जाने के बाद अब पुलिस की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
फिलहाल, इस पूरे मामले में प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है और पुलिस जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा कि कुत्ते का अंतिम संस्कार किन परिस्थितियों में कराया गया, अनुमति किसने दी और शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
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